कर्मचारियों के डीए पर कुंडली मारकर बैठी भगवंत मान सरकार, लेकिन विज्ञापनों और राजनीतिक प्रचार के लिए खजाना खुला: परमजीत सिंह कैंथ

भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा, पंजाब के प्रदेश उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते यानी डीए और डीआर के बकाए को लेकर भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोला है। परमजीत सिंह कैंथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भगवंत मान सरकार की कर्मचारियों के अधिकारों के प्रति पूरी तरह से बेरुखी अब जनता के सामने बेनकाब हो चुकी है।
कैंथ ने अपने बयान में आगे कहा कि जिन कर्मचारियों की कड़ी मेहनत से राज्य के सभी सरकारी कार्यालय, अस्पताल, स्कूल और प्रशासन का कामकाज सुचारू रूप से चलता है, उन्हें उनका जायज डीए देने के समय पर सरकार को हमेशा खजाना खाली नजर आता है। लेकिन इसके विपरीत अपनी सरकार की उपलब्धियों के बड़े-बड़े विज्ञापनों और राजनीतिक प्रचार-प्रसार के लिए पैसों की कभी भी कोई कमी नहीं दिखाई देती है।
हाई कोर्ट के निर्देशों का भी हो रहा है हवाला
उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 8 अप्रैल 2026 को पंजाब सरकार को बकाया डीए और डीआर की सभी लंबित किस्तें तुरंत जारी करने के कड़े निर्देश दिए थे। इसके बाद आगामी 3 अगस्त 2026 को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकार की तमाम अपीलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया और बकाया डीए तथा डीआर को ठीक 14 दिनों के भीतर अंदर जारी करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
अदालत ने अपने आदेश में यह बात भी बहुत स्पष्ट रूप से कही थी कि जब तक कर्मचारियों की इस बकाया राशि का पूरा भुगतान नहीं हो जाता, तब तक सरकार को बड़े पैमाने पर चलाए जाने वाले विज्ञापन अभियानों जैसे सभी गैर-उत्पादक खर्चों से पूरी तरह बचना चाहिए। कैंथ ने कहा कि सरकार द्वारा बार-बार वित्तीय संकट का बहाना बनाकर कर्मचारियों के इन अधिकारों को लगातार टालते रहना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं किया जा सकता है।
मई 2026 की रिपोर्ट और कर्मचारियों का अधिकार
सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, मई 2026 में पंजाब सरकार पर लंबित डीए बकाए की कुल देनदारी लगभग ₹15,000 करोड़ आंकी गई थी। कैंथ ने जोर देकर कहा कि डीए सरकार की तरफ से दी जाने वाली कोई भी मेहरबानी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देश और राज्य के कर्मचारियों का उनका मौलिक अधिकार है।
आज के इस लगातार महंगाई के दौर में कर्मचारियों के वेतन में मिलने वाला यह महंगाई भत्ता उनकी आर्थिक सुरक्षा के साथ सीधे तौर पर जुड़ा हुआ होता है। इस प्रकार से बकाया किस्तों को लगातार लटकाए रखना इस बात का सीधा प्रमाण है कि यह सरकार की गहरी वित्तीय विफलता और उसकी प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है।
सरकार की प्राथमिकताओं पर खड़े किए गए गंभीर सवाल
कैंथ ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि यदि सरकार के पास अपने ही कर्मचारियों के बकाए का भुगतान करने के लिए बिल्कुल भी पैसा नहीं है, तो उसे पंजाब की जनता को यह बात साफ-साफ बतानी चाहिए कि आखिर विज्ञापन, राजनीतिक कार्यक्रमों और सरकारी प्रचार पर पानी की तरह कितना पैसा खर्च किया जा रहा है। पंजाब के मेहनती कर्मचारियों को अपने ही हक के पैसों के लिए आज सरकार के दर-दर दरवाजे खटखटाने की नौबत आ गई है, जो भगवंत मान सरकार की तथाकथित बदलाव वाली राजनीति की असली तस्वीर को देश के सामने उजागर करती है।
उन्होंने अंत में मांग की कि सरकार को अदालत के इन सभी निर्देशों और कर्मचारियों की इन सभी जायज मांगों को पूरी गंभीरता के साथ लेते हुए बकाया डीए और डीआर की पूरी राशि तुरंत प्रभाव से जारी कर देनी चाहिए। सरकार को अब और अधिक बहाने बनाने के बजाय एक स्पष्ट समय-सीमा जारी करनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि किस तारीख तक कर्मचारियों की कौन-सी बकाया किस्त का भुगतान उनके खातों में कर दिया जाएगा।