भिवानी में सरकार के खिलाफ फूटा कर्मचारियों का आक्रोश, 37वें दिन महापंचायत में विभिन्न संगठनों ने भरी हुंकार

भिवानी में नगर पालिका कर्मचारी संघ के आह्वान पर सफाई और अग्निशमन कर्मचारियों की जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल अब अत्यंत रोषपूर्ण रूप धारण करती जा रही है। हड़ताल के 37वें दिन शुक्रवार को भिवानी नगर परिषद कार्यालय परिसर में महापंचायत का आयोजन किया गया। इस महापंचायत में केवल सफाई व फायर ब्रिगेड कर्मचारी ही नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक, किसान, राजनीतिक संगठनों और राज्य के अन्य विभागीय कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर हुंकार भरी। इन प्रतिनिधियों ने सरकार की जनविरोधी व कर्मचारी-विरोधी नीतियों की तीखी आलोचना की।
इस महापंचायत में हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के राज्य नेता मा. सुखदर्शन सरोहा, दलित अधिकार मंच जिला प्रधान सुखदेव सिंह, रिटायर्ड कर्मचारी संघ जिला सचिव राजवीर कादियान, युवा कल्याण संगठन के संरक्षक कमल सिंह प्रधान, अखिल भारतीय किसान सभा, ऑल हरियाणा पॉवर कारपोरेशसन वर्कज यूनियन से लोकेश व रविंद्र, एससी-एसटी यूनियन के राज्य प्रधान बिजेंद्र सिंह बराड़, मैकेनिकल-41 के जिला प्रधान अनिल बागड़ी, हरियाणा रोडवेज राज्य प्रधान नरेंद्र दिनोद, सीआईटीयू जिला सचिव कामरेड अनिल, माकपा जिला सचिव कामरेड ओमप्रकाश, आशा वर्करज यूनियन जिला प्रधान सुशीला सरोहा, ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ जिला प्रधान राजबीर, जनवादी महिला समिति जिला प्रधान बिमला घणघस, एआईकेकेएमएस सचिव मा. बस्तीराम एडवोकेट, एआईयूटीयूसी जिला सचिव कामरेड राजकुमार बासिया, सीजेपी नेता डा. लोकेश भिवानी, सुधीर सांगवान, युवा नेता अभिजीत लाल सिंह सहित कई अन्य नेता मौजूद रहे। इसके अलावा कांग्रेस शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप गुलिया जोगी, कांग्रेस एससी सेल प्रदेश उपाध्यक्ष समीर खटीक, जजपा जिला प्रधान जितेंद्र भारद्वाज, जजपा युवा जिला अध्यक्ष सेठी धनाना, जजपा नेता राजू मेहरा, जजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सज्जन कुमार, जजपा महिला प्रदेश महासचिव भानी देवी, बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण जमालपुर और एनएसयूआई से सुमित बराड़ सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने महापंचायत में पहुंचकर कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया।
कर्मचारी नेताओं की मुख्य मांगें और चेतावनी
कर्मचारी नेताओं ने मांग रखी कि टेबल टॉक और किसी भी समझौते की पहली शर्त आंदोलन के दौरान प्रताड़ित या सस्पेंड किए गए कर्मचारियों की बिना शर्त बहाली होगी। मुख्यमंत्री को स्वयं पहल करते हुए कर्मचारी संगठनों के शीर्ष नेताओं को वार्ता के लिए बुलाना चाहिए। 13 मई को हुई टेबल टॉक में 22 सूत्रीय मांग पत्र की 17 मांगों पर सहमति बनी थी। मुख्य पेच कर्मचारियों को पक्का करने पर अटका है। वर्ष 2003 की नीति यानी तीन साल की सेवा पूरी करने पर पक्का करने का नियम को पुनः लागू किया जाना चाहिए। इस नियम को लागू करके प्रदेश के लगभग एक लाख 23 हजार कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाना चाहिए, जो राज्य के लाखों परिवारों के लिए बड़ी सौगात होगी। सरोहा ने यह भी चेतावनी दी कि प्रदेश भर में गंदगी के ढेर, उफनते नाले और स्वाइन फ्लू जैसी महामारियों के फैलते खतरे के लिए केवल और केवल हरियाणा सरकार की हठधर्मिता जिम्मेदार है।