भिवानी के शिक्षक शैलेश कुमार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य शिक्षक पुरस्कार से किया सम्मानित

भिवानी के शिक्षक शैलेश कुमार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य शिक्षक पुरस्कार से किया सम्मानित

राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिक्षक शैलेश कुमार को राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया है। शिक्षा के प्रति समर्पण और शैक्षणिक विकास समेत कई उपलब्धियों के आधार पर उन्हें यह सम्मान दिया गया है। भिवानी के लेघां गांव में पीजीटी फिजिक्स के पद पर कार्यरत शैलेश कुमार अपनी ड्यूटी को पूरी शिद्द्त से निभाते हैं।

शैलेश कुमार का सफर और तकनीकी ज्ञान

शैलेश कुमार ने साल 2006 में अतिथि भौतिक प्रवक्ता के रूप में हरियाणा के शिक्षा विभाग में अपने सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने अपने ज्ञान कौशल से बच्चों को तकनीकी ज्ञान से भी जोडऩे का काम किया है। उनके इन्हीं बेहतरीन कार्यों के आधार पर शिक्षा विभाग हरियाणा की तरफ से मूल्यांकन किया गया था। इस मूल्यांकन के बाद ही उनका चयन शिक्षक दिवस पर राज्य पुरस्कार के लिए किया गया था।

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मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री द्वारा सम्मान

शनिवार के दिन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने शिक्षक शैलेश कुमार को सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने शैक्षणिक क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए बेहतर कार्यों की जमकर सराहना की। एक राष्ट्र निर्माता के रूप में शैलेश कुमार ने विद्यालय में केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया, बल्कि उससे आगे बढ़कर विद्यार्थियों को ज्ञान प्रदान किया है।

शिक्षक का कर्तव्य और बच्चों के संस्कार

राज्य पुरस्कार मिलने के बाद शिक्षक शैलेश कुमार ने कहा कि उन्होंने केवल अपना कर्म किया है। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य बनाने के लिए वे पहले से भी अधिक उत्साह के साथ आगे काम करेंगे। एक शिक्षक का बच्चों के प्रति जो कर्तव्य होता है, उन्होंने केवल उसी कर्तव्य का निर्वहन किया है। उनका मानना है कि शिक्षक होना सिर्फ एक नौकरी या रोजगार नहीं है, बल्कि यह एक पवित्र जिम्मेदारी होती है।

किताबी ज्ञान के साथ अच्छे इंसान का निर्माण

शिक्षक का कर्तव्य केवल बच्चों को ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार देना भी है। शैलेश कुमार ने स्पष्ट किया कि बच्चे को केवल किताब पढ़ाना ही शिक्षक का मुख्य काम नहीं होता है। हमारा मुख्य काम बच्चे को एक अच्छा इंसान बनाना है। यदि कोई बच्चा पढ़ाई या गणित में तेज है, लेकिन उसमें बड़ों का आदर करने की भावना नहीं है, तो वह शिक्षा पूरी तरह से अधूरी है।

समानता और छिपी हुई प्रतिभा को तराशना

शैलेश कुमार ने बताया कि कक्षा में कोई बच्चा पढ़ाई में तेज होता है तो कोई कमजोर होता है। एक सच्चे शिक्षक के लिए कक्षा का हर बच्चा एक समान होता है। कमजोर बच्चे का हाथ पकड़कर उसे आगे बढ़ाना ही सबसे बड़ी सेवा है। हर बच्चे के अंदर के हुनर को पहचानना और उसे सही दिशा में तराशना भी शिक्षक का ही महत्वपूर्ण कर्तव्य है।

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