दक्षिणी हरियाणा में 13 साल बाद भी राव इंद्रजीत सिंह का विकल्प नहीं तलाश पाई भाजपा, कोई चेहरा नहीं पहुंचा उनके कद तक

दक्षिणी हरियाणा में 13 साल बाद भी राव इंद्रजीत सिंह का विकल्प नहीं तलाश पाई भाजपा, कोई चेहरा नहीं पहुंचा उनके कद तक

फतह  सिंह उजाला/गुरुग्राम  /14 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

दक्षिणी हरियाणा की राजनीति में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले करीब 13 वर्षों में भाजपा ने संगठन और सरकार के स्तर पर कई नेताओं को आगे बढ़ाया है। पार्टी ने राव के समानांतर राजनीतिक चेहरा खड़ा करने के प्रयास भी किए हैं। लेकिन अभी तक कोई भी नेता उनके कद का विकल्प बनकर सामने नहीं आ पाया है। यही वजह है कि दक्षिणी हरियाणा की राजनीति में राव इंद्रजीत सिंह आज भी सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं।

भाजपा सरकार में नेताओं को मिली तवज्जो

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भाजपा के सत्ता में आने के बाद दक्षिणी हरियाणा में समय-समय पर कई नेताओं को विशेष तवज्जो दी गई है। किसी को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिली है तो किसी को सरकार में महत्वपूर्ण पद मिला है। कुछ नेताओं को राव के राजनीतिक प्रभाव की काट के तौर पर भी देखा गया है। इसके बावजूद इन नेताओं का प्रभाव मुख्य रूप से उनकी अपनी विधानसभा या सीमित राजनीतिक क्षेत्र तक ही दिखाई दिया है। राव के मुकाबले पूरे दक्षिणी हरियाणा में व्यापक जनाधार वाला नेता तैयार नहीं हो पाया है।

विभिन्न समाजों में स्वीकार्यता है सबसे बड़ी ताकत

राव इंद्रजीत सिंह के समर्थक लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि दक्षिणी हरियाणा की 11 विधानसभा सीटों में उनका राजनीतिक प्रभाव किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है। विभिन्न समाजों और वर्गों के लोगों के बीच उनकी स्वीकार्यता को ही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत माना जाता है। यही कारण है कि राव केवल अपनी विधानसभा तक सीमित नेता नहीं रहे हैं। गुरुग्राम, रेवाड़ी, बावल, कोसली और आसपास के व्यापक क्षेत्र की राजनीति में उनका प्रभाव लगातार दिखाई देता रहा है।

सीमित रही अन्य नेताओं की राजनीतिक पकड़

राव के समानांतर खड़े होने की कोशिश करने वाले कई नेताओं को पार्टी ने समय-समय पर महत्व दिया है। लेकिन उनकी पकड़ अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र तक ही ज्यादा मजबूत रही है। सवाल यही है कि क्या कोई ऐसा नेता तैयार हो पाया है जो अपनी विधानसभा से बाहर निकलकर पूरे दक्षिणी हरियाणा में उसी तरह भीड़ जुटा सके। ऐसा नेता अलग-अलग सामाजिक वर्गों को अपने साथ जोड़ सके, फिलहाल इसका जवाब राजनीतिक तौर पर 'नहीं' ही नजर आता है।

रघु यादव का बयान और चुनावी इतिहास

कुछ दिन पूर्व रेवाड़ी विधानसभा से विधायक रह चुके 'जल युद्ध नायक' के तौर पर चर्चित रघु यादव ने भी इसी राजनीतिक वास्तविकता की ओर इशारा किया था। उनका कहना था कि आज तक राव इंद्रजीत सिंह के मुकाबले उनके कद का कोई नेता सामने ही नहीं आया है। राव के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो उनके समर्थक यह भी तर्क देते हैं कि चुनावी राजनीति में उन्हें सीमित मौकों पर ही हार का सामना करना पड़ा है। उनके लंबे राजनीतिक करियर में एक विधानसभा और एक लोकसभा चुनाव में हार के अलावा कोई तीसरा प्रतिद्वंद्वी उन्हें मात नहीं दे पाया है।

पार्टी के भीतर सक्रिय रहे राजनीतिक धड़े

राव इंद्रजीत सिंह के राजनीतिक विरोधियों ने अलग-अलग समय पर एकजुट होकर उनके प्रभाव को चुनौती देने का प्रयास किया है। पार्टी के भीतर भी कई बार अलग-अलग राजनीतिक धड़े सक्रिय रहे हैं। इसके बावजूद राव का राजनीतिक प्रभाव समाप्त नहीं किया जा सका है। यही कारण है कि दक्षिणी हरियाणा में राव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं आज भी केंद्र में रहती हैं।

शीर्ष नेतृत्व के लिए भी नजरअंदाज करना आसान नहीं

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए भी दक्षिणी हरियाणा में राव के राजनीतिक प्रभाव को नजरअंदाज करना आसान नहीं है। यही वजह है कि पार्टी भले ही कई नेताओं को आगे बढ़ा रही हो लेकिन राव के विकल्प के रूप में किसी एक चेहरे को स्थापित करना अब तक संभव नहीं हुआ है। यह सवाल भी उठता रहा है कि आखिर राव इंद्रजीत सिंह का विकल्प तैयार क्यों नहीं हो पाया है। इसकी सबसे बड़ी वजह उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में लगातार सक्रियता को माना जाता है।

विकल्प बनने के लिए लंबी राजनीतिक तपस्या जरूरी

राव का विकल्प बनने की इच्छा रखने वाले नेताओं के लिए सरकार में प्रभाव पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें दक्षिणी हरियाणा के गांव-गांव तक अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज करानी होगी। लोगों के बीच लगातार रहना होगा और अलग-अलग समाजों का भरोसा हासिल करना होगा। अपनी विधानसभा की सीमा से बाहर निकलकर पूरे क्षेत्र में स्वीकार्यता बनानी होगी।

भविष्य की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती

दक्षिणी हरियाणा की राजनीति में राव इंद्रजीत सिंह का राजनीतिक कद एक दिन में तैयार नहीं हुआ है। इसके पीछे दशकों की राजनीतिक सक्रियता और लगातार जनसंपर्क की भूमिका रही है। इसलिए राव का विकल्प बनने की चाहत रखने वाले नेताओं के सामने चुनौती सिर्फ चुनाव जीतने की नहीं है। उन्हें लंबी राजनीतिक तपस्या के जरिए अपना अलग जनाधार तैयार करना होगा। फिलहाल स्थिति यही है कि भाजपा कई राजनीतिक चेहरे आगे बढ़ाने के बावजूद राव इंद्रजीत सिंह के कद का सर्वस्वीकार्य विकल्प तैयार नहीं कर पाई है। आने वाले समय में पार्टी की राजनीति में यह सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

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