भारतीय किसान संघ ने पोर्टल की तकनीकी खामियों और फसल खरीद के मुद्दों को लेकर दी चेतावनी

भारतीय किसान संघ ने पोर्टल की तकनीकी खामियों और फसल खरीद के मुद्दों को लेकर दी चेतावनी

भारतीय किसान संघ ने डिजिटल व्यवस्था के नाम पर किसानों को मिल रही परेशानियों और कृषि से जुड़े गंभीर मुद्दों को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल उठाया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो मजबूरन बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। भिवानी जिला प्रमुख पवन लक्ष्मणपुरा ने सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अन्नदाता पहले से ही प्राकृतिक मार और आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और सरकारी तंत्र की नीतियां उसकी मुश्किलें बढ़ा रही हैं।

जमीन इंतकाल पोर्टल की तकनीकी खामियां

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सरकार द्वारा जमीन की विरासत के इन्तकाल से जुड़े कार्यों को ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है क्योंकि यह पोर्टल या तो अधिकांश समय ठप रहता है या ठीक से काम नहीं करता है। यदि किसी तरह प्रक्रिया शुरू भी हो जाए तो इसे पूरा होने में 60 से 70 दिन का लंबा समय लग जाता है। इस अनावश्यक देरी के कारण किसानों के बैंक लोन, जमीन की खरीद-फरोख्त और अन्य जरूरी आर्थिक कार्य बीच में ही अटक जाते हैं। जब तक सरकार इस पोर्टल को पूरी तरह सुचारू और तकनीकी रूप से मजबूत नहीं कर लेती तब तक विरासत के इन तमाम कार्यों को पूरी तरह ऑफलाइन मोड में किया जाना चाहिए ताकि किसानों को राहत मिल सके।

फसल भुगतान राशि को आय का स्त्रोत न मानने की मांग

किसानों द्वारा अपनी फसल बेचने पर मिलने वाली भुगतान राशि को सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाता है। इस राशि को सरकार द्वारा आय का स्रोत मान लिया जाता है। फसल तैयार करने के लिए किसान को बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, मजदूरी और सिंचाई पर भारी-भरकम खर्च करना पड़ता है। सारे खर्च निकालने के बाद किसान के हाथ में जो बचता है वह मात्र एक आम मजदूरी के बराबर ही होता है। इसे टैक्स योग्य आय मानना किसानों के साथ सरासर अन्याय है।

बाजरे की खरीद और ग्वार का एमएसपी

कृषि विपणन और सुरक्षा को लेकर पवन लक्ष्मणपुरा ने बताया कि सरकार सबसे पहले मंडियों में बाजरे की सुचारू खरीद सुनिश्चित करे। ग्वार उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए ग्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए ताकि किसानों को औने-पौने दामों पर फसल बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े। भारतीय किसान संघ के भिवानी जिला प्रमुख पवन लक्ष्मणपुरा ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अन्नदाता की सहनशीलता की परीक्षा न ली जाए। सरकार डिजिटल व्यवस्था के नाम पर किसानों को कागजी कार्रवाई में उलझाकर रख रही है। यदि सरकार ने किसानों की इन जायज और गंभीर माँगों पर जल्द संज्ञान नहीं लिया और पोर्टल की खामियों को दूर कर ऑफलाइन विकल्पों को बहाल नहीं किया, तो भारतीय किसान संघ सडक़ों पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन करने को मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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