जींद में भारतीय मजदूर संघ का प्रदर्शन, सरकार पर वादाखिलाफी का लगाया गंभीर आरोप

जींद में सोमवार को भारतीय मजदूर संघ जिला कार्य समितियों के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने डीआरओ राजकुमार के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।
गुरुग्राम सम्मेलन के वादों पर उठा सवाल
भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री विनोद शर्मा और दिनेश कौशिक ने अपनी बात रखते हुए कहा कि गुरुग्राम में एक श्रमिक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। इस समारोह में मुख्यमंत्री ने स्वयं सभी श्रमिकों को एक बड़ा आश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि 15 जून तक सभी पात्र कर्मचारियों का रोजगार सुरक्षा अधिनियम के तहत सेवा को सुरक्षित कर दिया जाएगा। इसके बाद इस समय सीमा को बढ़ाकर 15 जून से 15 अगस्त कर दिया गया था, परंतु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सरकार ने श्रमिकों की पंचायत में किए गए वादे की पूरी तरह से वादाखिलाफी की है।
मांग पत्र पर बैठक न होने से बढ़ा रोष
भारतीय मजदूर संघ ने सरकार को अपना मांग पत्र भेजे हुए काफी समय बीत चुका है। इसके बावजूद सरकार ने इस मांग पत्र पर कोई भी आधिकारिक बैठक नहीं बुलाई है। इसी मुख्य कारण की वजह से प्रदेश के सभी कर्मचारियों और श्रमिकों में भारी रोष देखा जा रहा है। इसी के परिणाम स्वरूप भारतीय मजदूर संघ के कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों और समस्याओं से जुड़ा हुआ 11 सूत्रीय ज्ञापन केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री के पास भेजा है।
ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें
कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं। ज्ञापन के अनुसार न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 30 हजार रुपये किया जाना चाहिए। इसके अलावा ईएसआइसी की सीलिंग सीमा को 21 हजार से बढ़ाकर 42 हजार करना, ईपीएस पेंशन को 7500 रुपये प्रति माह करना और इसमें डीए तथा मेडिकल स्कीम को भी जोड़ना शामिल है।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि ईपीएफ की सीमा को 15 हजार से बढ़ाकर 30 हजार किया जाए। बोनस गणना की सीलिंग को सात हजार से बढ़ाकर 21 हजार किया जाए और बोनस पात्रता की सीमा को 21 हजार से बढ़ाकर 42 हजार किया जाए।
इसके साथ ही सभी स्कीम वर्कर जैसे कि एनएचएम, समग्र शिक्षा, आंगनबाड़ी, आशा वर्कर और मिड डे मील को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देकर नियमित किया जाए। ग्रेच्युटी अधिनियम 1972 के अनुसार सभी को ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए और इसकी अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 40 लाख रुपये किया जाए। साथ ही श्रम संहिताओं में मौजूद सभी एंटी वर्कर प्रावधानों को हटाया जाए और बैंकिंग क्षेत्र में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू किया जाए।
आंदोलन को व्यापक करने की चेतावनी
अंत में चेतावनी देते हुए कहा गया है कि यदि सरकार ने शीघ्र ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो भारतीय मजदूर संघ पूरे प्रदेश भर में अपने इस आंदोलन को और अधिक व्यापक और तेज कर देगा।