ब्रह्माकुमारीज़ ओआरसी बोहड़ाकलां में रजत जयंती वर्ष पर 300 माताएं सम्मानित

ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के बोहड़ाकलां स्थित ओआरसी में मातृशक्ति के त्याग, तपस्या और समर्पण का अलौकिक दृश्य देखने को मिला। ओआरसी के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष समारोह में बीते 10 से अधिक वर्षों से अध्यात्म और ज्ञान मार्ग पर निरंतर अग्रसर 300 माताओं को भावपूर्ण सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में वरिष्ठ राजयोगिनी बहनों और प्रबुद्ध जनों ने माना कि समाज और राष्ट्र के सांस्कृतिक व आध्यात्मिक नवनिर्माण की वास्तविक कर्णधार 'मातृशक्ति' ही है। यह कार्यक्रम 13 सितंबर 2026 को फतह सिंह उजाला द्वारा बोहड़ाकलां में कवर किया गया।
मां का दर्जा संसार में सर्वोपरि
समारोह को संबोधित करते हुए ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी ने कहा कि मां का दर्जा संसार में सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि जब हम परमात्मा की स्तुति करते हैं, तो भी 'तुम्हीं हो माता, पिता तुम्हीं हो' कहकर पहले माता के रूप का स्मरण किया जाता है। संस्थान के इतिहास में आदरणीय दादियों की दृढ़ता और सहनशक्ति का अद्भुत उदाहरण है। यह उसी मातृशक्ति का कमाल है कि आज यह आध्यात्मिक यज्ञ विश्व पटल पर इतनी सम्पन्नता के साथ सेवा कर रहा है। दिल्ली, हरिनगर सेवाकेंद्रों की निदेशिका राजयोगिनी शुक्ला दीदी ने कहा कि माता को समाज का 'प्रथम गुरु' माना गया है। उनके भीतर समाहित वात्सल्य, धैर्य और सहनशीलता जैसे अलौकिक गुणों के कारण स्वयं भगवान भी उनकी महिमा और वंदना करते हैं।
ईश्वर ने माताओं को सौंपा शिवशक्ति का दायित्व
माउंट आबू से पधारे राजयोगी बीके मोहन सिंघल ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ दुनिया का एकमात्र ऐसा विशाल संगठन है, जिसका नेतृत्व पूर्णतः माताओं और बहनों के दूरदर्शी और सशक्त हाथों में है। माताओं में सभी को समेटकर साथ चलने का प्राकृतिक गुण होता है, जो किसी भी संस्थान की असली ताकत है। वहीं, दिल्ली शक्तिनगर से पधारीं राजयोगिनी चक्रधारी दीदी ने कहा कि माताओं की निस्वार्थ सेवा और तपस्या के बल पर ही संस्था आज सफलताओं की बुलंदियों को छू रही है। ईश्वर ने माताओं को 'शिवशक्ति' का स्वरूप बनाकर समाज कल्याण का दायित्व सौंपा है।
आध्यात्मिक जीवनशैली आधुनिक समाज के लिए प्रासंगिक
समारोह में देश के प्रतिष्ठित और विशिष्ट वैज्ञानिक डॉ. विलियम सेल्वामूर्ति ने विशेष रूप से शिरकत की और संस्थान के साथ अपने दीर्घकालिक अनुभवों को साझा किया। उन्होंने आध्यात्मिक जीवनशैली को आधुनिक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। कार्यक्रम में दिल्ली के सिरी फोर्ट सेवाकेंद्र की निदेशिका एवं 95 वर्षीया वयोवृद्ध तपस्विनी राजयोगिनी बीके गीता दीदी की उपस्थिति सभी के लिए प्रेरणा का केंद्र रही। इसके अतिरिक्त, माउंट आबू से पधारे राजयोगिनी बीके रुक्मणी दीदी, राजयोगिनी बीके विजय दीदी, राजयोगिनी राजकुमारी दीदी और राजयोगिनी सुनीता दीदी ने भी अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की।
नाटिका और गीतों से जीवंत हुआ माताओं का चरित्र
सम्मान समारोह के दौरान ओआरसी परिसर सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा। गायक बीके गौरव ने माताओं के सम्मान में भावपूर्ण गीत प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। ओआरसी के कलाकारों ने नृत्य की सुंदर प्रस्तुति से माताओं का अभिनंदन किया। वहीं दूसरी ओर, दिल्ली से आए कलाकारों ने एक विशेष नाटिका के माध्यम से माताओं के त्यागमय जीवन चरित्र और आध्यात्मिक यात्रा को बेहद जीवंत रूप में मंचित किया।