तुम बिन कौन उबारे

  तुम बिन कौन उबारे थोड़ी सी मुस्कान कन्हैया , जग को दे दो प्यारे ।…

अनीता निधि लिखती है एक रचना झारखंड से ‘ चाय हमारी चाह,

चाय हमारी चाह ************* हर रोज सुबह तलब जगती है चाय की दिन शुरु होता नहीं…

सावित्री मिश्रा लिखती है एक रचना ओडिशा से ‘ विदाई

विदाई ———– माता -पिता ने खुशी -खुशी कर दी बेटी की विदाई, पर किस्मत को शायद…

सरोज भारद्वाज लिखती है एक रचना जम्मू से

घर की छत सिमट गई है घर की छत जिनपे कभी पतंगबाजी करते हुए गूंजा करती…

मेरा गांव

शहर क्या आज गांव भी विराना लगता है ।
आफत क्या आई खमोश ठिकाना लगता है ।
कहाँ चला गई वो चकाचौंध जमाने की ,
जाना नामुमकिन वो गुलशन बेगाना लगता है ॥
हर मोहल्ले की अलग सी खूबी व अंदाज है ।
आज फीकी पड़ी है रौनक ऐसा कहाँ रिवाज है,
हसीन वादियां, ऊंचे पर्वत , झरने गहरी नदियां ,
हिम का आंचल देश का ये सरताज है ॥
शहर मेरा फिर चमकेगा थोड़ा सब्र सा कर लो ।
माटी देगी फिर से खुशबू हिम्मत जहन भर लो ,
घने जंगलों की फगडंडी से आना तुम यहाँ,
इन्तजार में मीलने  की उम्मीद ठान ग़र लो ॥
रचनाकार :- दिलाराम भारद्वाज ‘ दिल ,
करसोग , मण्डी (हिमाचल प्रदेश )
8278819997

बनावटी प्यार

लाख मिन्नतें मांग कर जो तुझको पाया ,
थी भूल मेरी जो अब था पछताय़ा ।
हुई थी मुलाकात रहा में जो तुमसे ,
झुकी नजरों से प्यार था जताया ।
दिन बीत जाता था कठिन डगर में ,
रातों ने हमको जगना सिखाया ।
यादों में तेरी दिल में थी जो लपटें ,
जाने कैसे था ये शोला दबाया ।
घड़ी पल तब तो लगती थी साले ,
जानें वो वक़्त कैसे था हमने बिताया ।
न जानें कैसे थी जोड़ी वो दौलत ,
रात दिन था हमने लहू बहाया ।
बड़ी मूश्क्त से जगह झोंपड़ी की ,
तेरे लिए था एक आशियाँ बनाया ।
आज रहते हो तुम रजो महल में ,
दुनिया को था हमने आईना दिखाया।
रहती थी हमसे लिपट कर ए जालिम ,
आज लगता है दुश्मन मेरा साया ।
देह जर जर हुई जो मेरी अब ,
तूने मुझपर जो कहर था ढ़ाया ।
आज मेरी चौखट हुई मुझे पराई ,
भाग दुश्मन से दामन बचाया ।
न रहा अब आसरा उसको अपने घर,
आशिक उसके ने था घर से भगाया ।
पकड़े जो तूने आवारा आशिक ,
तेरी शैह पर था मुझको डराया ।
न रह सकोगी चैन से तुम उम्र भर ,
सरे राह से था जो मुझको भटकाय़ा ।

दिलाराम भारद्वाज ‘ दिल ,
करसोग , मण्डी हिमाचल प्रदेश♥

यह सूरज हमसे ही रोशन है

यह सूरज हमसे ही रोशन है यह सूरज हमसे ही रौशन है यह धरती हमसे ही…

देश आत्मनिर्भर हो गया…. कोरोना के मामले में अब

देश आत्मनिर्भर हो गया…. कोरोना के मामले में अब केंद्र सरकार(PM) ने अपना जिम्मा राज्य सरकार(CM)…

बावरी हो गई हूं मैं

बावरी हो गई हूं मैं   •      प्रमोद दीक्षित ‘मलय’ मेरा जीवन संवर गया…

मां सबसे प्यारी लगती है

मां सबसे प्यारी लगती है • आँचल की मृदुल हवा से खुशियां हम सबको देती है।…

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