बैंक घोटाले में आईएफएस समेत तीन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, सीबीआई को जांच में मिला 75 करोड़ का फर्जीवाड़ा

बैंक घोटाले में आईएफएस समेत तीन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, सीबीआई को जांच में मिला 75 करोड़ का फर्जीवाड़ा

सीबीआई को जांच में 75 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा मिला है। सीईओ ने खुद इस घोटाले की साजिश रची थी। चंडीगढ़ में 11 सितंबर को आईडीएफसी और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने एक बड़ा कदम उठाया है। सीबीआई ने चंडीगढ़ रिन्यूएबल Energy एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी यानी क्रेस्ट के तत्कालीन सीईओ और इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) अधिकारी नवनीत श्रीवास्तव समेत कुल तीन लोगों के खिलाफ चार्जशीट फाइल कर दी है।

विपम कंसल्टेंसी और उसके डायरेक्टर पर भी शिकंजा

इस मामले में आईएफएस अधिकारी के अलावा विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और इसके डायरेक्टर के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की गई है। यह पूरा मामला यूटी चंडीगढ़ के क्रेस्ट के फंड के गबन से जुड़ा हुआ है। इन सभी आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने, सबूत मिटाने, आपराधिक विश्वासघात करने, धोखाधड़ी करने, जालसाजी करने और जाली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप बीएनएस के तहत लगाए गए हैं। इसके अलावा इन पर रिश्वतखोरी, आपराधिक कदाचार और अपराध में मदद करने के आरोप भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 के तहत तय किए गए हैं।

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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खातों से निकाले गए थे पैसे

यह सारा फंड आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खातों से गलत तरीके से निकाला गया था। जांच में यह बात सामने आई है कि क्रेस्ट के सीईओ के तौर पर काम करते हुए नवनीत श्रीवास्तव ने दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची थी। उन्होंने क्रेस्ट के फंड का गबन किया और एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर आपराधिक कदाचार में शामिल होकर गैर-कानूनी तरीके से पैसे लिए। उनकी पत्नी, जो विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर हैं, और उनकी कंपनी को भी इस अपराध में मदद करने और आपराधिक साजिश का मुख्य हिस्सा होने के लिए आरोपी बनाया गया है।

अचल संपत्ति खरीदने में हुआ धोखाधड़ी के पैसों का इस्तेमाल

इस कंपनी को धोखाधड़ी से निकाली गई रकम में से कुल 95 लाख रुपये मिले थे। कंपनी ने इस अवैध पैसे का इस्तेमाल अचल संपत्ति खरीदने में किया था। क्रेस्ट मामले में धोखाधड़ी की कुल रकम 75.4 करोड़ रुपये है। नवनीत श्रीवास्तव को सीबीआई ने इस मामले में पहले ही गिरफ्तार कर लिया था और वह अभी भी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। सीबीआई ने यह पूरा मामला चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश से अपने हाथ में लिया था।

अन्य मामलों में भी हो चुकी है चार्जशीट दाखिल

इस नई चार्जशीट से पहले इस मामले में 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। ये सभी मामले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ में स्थित सेक्टर-32 शाखा में हुई बहुत बड़ी बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़े हुए हैं। इस बड़ी धोखाधड़ी में हरियाणा सरकार के आठ विभागों और संगठनों के लगभग 504 करोड़ रुपये के सरकारी फंड को जाली और फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट तथा धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांज़ैक्शन के जरिए निकाल लिया गया था।

सीबीआई ने हरियाणा और चंडीगढ़ के अन्य मामले भी लिए हैं हाथ में

राज्य सरकार के विशेष अनुरोध पर सीबीआई ने हरियाणा के इस मामले को राज्य विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो, हरियाणा से अपने हाथ में ले लिया था। हरियाणा वाले मामले में सीबीआई ने अब तक कुल 37 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसके अलावा सीबीआई ने चंडीगढ़ के स्मार्ट सिटी और चंडीगढ़ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से जुड़े तीसरे मामले को भी अपने हाथ में ले लिया है। म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के साथ 78 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में सीबीआई 07 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जनता के धन और फंड के सही लेन-देन का पता लगाने और बाकी अन्य आरोपियों की पहचान करने के लिए इन तीनों ही मामलों की आगे की जांच अभी भी लगातार जारी है।

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