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chandigarh-रणजीत सिंह को 32 साल बाद सत्ता में मिली  हिस्सेदारी ,दादा और पोता एक साथ दे रहे इम्तिहान

ओम प्रकाश चौटाला पिता की सियासत के  उत्तराधिकारी बने,रणजीत सिंह को 32 साल बाद सत्ता में मिली  हिस्सेदारी

दादा और पोता एक साथ दे रहे इम्तिहान

32 साल बाद रणजीत सिंह 31 साल के पोते दुष्यंत के साथ साबित करेंगे काबिलियत

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चंडीगढ़-राजकुमार अग्रवाल –

एक ही विधानसभा में पांच विधायक बनाने का गौरव हासिल करने वाले देवीलाल परिवार पर मौजूदा गठबंधन सरकार का दारोमदार टिका हुआ है। यह खास संयोग है कि 32 साल पहले 1987 में अपने पिता जननायक स्वर्गीय देवीलाल की सरकार में मंत्री बनने वाले रणजीत सिंह अपने 31 साल के पोते दुष्यंत चौटाला के साथ सरकार की सबसे मजबूत धुरी नजर आ रहे हैं।
रणजीत सिंह जहां मौजूदा मंत्रिमंडल में सबसे पुराना अनुभव रखते हैं, वहीं दूसरी तरफ दुष्यंत चौटाला मंत्रिमंडल के सबसे युवा और प्रतिभावान चेहरे के रूप में चमक बिखेर रहे हैं।
दुष्यंत चौटाला बेशक उप मुख्यमंत्री के रूप में मंत्रिमंडल की टीम की उपकप्तानी कर रहे हैं लेकिन रणजीत सिंह भी सबसे पुराने और मजबूत स्तम्भ होने के चलते गठबंधन सरकार में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
1987 के बाद पहली बार देवीलाल परिवार के दो सदस्य एक साथ मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं और इन दोनों की कारगुजारी पर सरकार के पास या फेल होने का दारोमदार टिका होगा।

रणजीत सिंह की है खास अहमियत

90 के दौर में जन नायक चौधरी देवी लाल के सबसे बड़े सियासी वारिस माने जाने वाले रणजीत सिंह को 32 साल बाद सत्ता में हिस्सेदारी मिली है। कई चुनाव में हार के बावजूद हथियार नहीं डालने वाले रणजीत सिंह संघर्ष की सबसे बड़ी मिसाल बनकर उभरे हैं।
रणजीत सिंह की 90 के दौर में पूरी तूती बोलती थी और चौधरी देवीलाल के अधिकांश समर्थक उनको मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे लेकिन वक्त के हेरफेर में उनके बड़े भाई ओम प्रकाश चौटाला पिता की सियासत के साथ-साथ सत्ता के भी उत्तराधिकारी बन गए और रणजीत सिंह बहुमत के पसंद होने के बावजूद उत्तराधिकार की रेस में पिछड़ गए।
सियासी मजबूरियों के चलते उन्हें परिवार की पार्टी को छोड़ना पड़ा और अपने सियासी वजूद को बचाए रखने के लिए उन्हें कांग्रेस और भाजपा की चौखटों पर जाना पड़ा। हर हार के साथ उनके मंसूबे मजबूत होते चले गए और इसीलिए 32 साल बाद वे सत्ता के हिस्सेदार बनने में सफल रहे।
2019 में कांग्रेस पार्टी का टिकट नहीं मिलना उनके लिए भाग्यशाली साबित हुआ और लंबे अंतराल के बाद विधायक बनने के साथ-साथ मंत्री भी बन गए। रणजीत सिंह शासन और प्रशासन के मंझे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं। इसीलिए तीन दशक के संघर्ष के बावजूद वे अपना अलग सियासी रसूख बनाए रखने में सफल रहे। मौजूदा सरकार में उन्हें बिजली, गैर परंपरागत ऊर्जा और जेल विभाग मिले हैं।रणजीत सिंह इन तीनों विभागों का कायाकल्प करके अपनी काबिलियत और दमखम का डंका बजाने की हसरत रखते हैं। उनको मिले तीनों ही विभागों में आने वाले समय में बड़े बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

दुष्यंत के लिए कसौटी तैयार
परिवार की पार्टी इनेलो से बेदखल किए जाने के बाद मजबूरी में जननायक जनता पार्टी बनाने वाले दुष्यंत चौटाला ने 10 ही महीनों में यह साबित कर दिया कि वे अपने परदादा जननायक चौधरी देवीलाल की तरह जनता की नब्ज पहचानने की क्षमता रखते हैं।
देश में सबसे कम समय में सरकार में हिस्सेदारी हासिल करने वाले दुष्यंत चौटाला के लिए कई चुनौतियां कसौटी के रूप में तैयार खड़ी हैं।
देश के सबसे युवा सांसद के रूप में अपनी प्रतिभा का डंका संसद में बजाने के बाद अब दुष्यंत चौटाला के सामने प्रदेश की सरकार में अपनी काबिलियत का धमाका करने का गलीचा बिछ गया है। दुष्यंत चौटाला को बीजेपी की सरकार में 11 विभागों को संचालित करने की बागडोर मिली है।
दुष्यंत चौटाला इन विभागों को शिखर पर पहुंचाकर यह साबित करेंगे कि वे वर्तमान और भविष्य दोनों के ही सबसे बेहतर नेता हैं। दुष्यंत चौटाला को हिस्सेदारी की सरकार में बेहतर तालमेल के साथ गठबंधन सहयोगी के साथ सरकार को 5 साल तक सफलता के साथ चलाना होगा।

बात यह है कि रणजीत सिंह और दुष्यंत चौटाला दोनों ही अलग-अलग पीढ़ियों और अलग-अलग दौर की राजनीति के बेहद चर्चित चेहरे हैं। यह भी खास सहयोग है कि रणजीत सिंह को 32 साल पहले उस समय सरकार में हिस्सेदारी मिली थी जब उनके साथ मंत्रिमंडल में शामिल उनके पोते दुष्यंत चौटाला का जन्म भी नहीं हुआ था।
रणजीत सिंह ने अपने पिता जननायक चौधरी देवी लाल के मार्गदर्शन में सियासत की बारीकियों को सीखते हुए कुछ ही समय में अपना खास रसूख बनाया था। तकदीर के सितारों ने बेशक उनको सियासत के शिखर पर नहीं पहुंचने दिया लेकिन गजब के संघर्ष के बलबूते पर उन्होंने खुद को लगातार फील्ड में बनाए रखा और उसी के बलबूते पर वे एक बार फिर से सत्ता में हिस्सेदारी हासिल कर गए हैं।
रणजीत सिंह को हमेशा यह कसक रही कि वे आपनी काबिलियत को कभी भी साबित नहीं कर पाए। मौजूदा सरकार में मंत्री के रूप में उनके पास खुद को दमदार और वजनदार कुशल प्रशासक के रूप में दिखाने का बेहतरीन अवसर मिला है।
रणजीत सिंह इस अवसर को हाथ से नहीं जाने देंगे और अपने विभागों में वे बदलाव का नया इतिहास रचने का काम करेंगे।
दुष्यंत चौटाला ने बहुत ही कम समय में खुद को बेहद प्रतिभाशाली युवा नेता के रूप में साबित कर दिया है। सरकार की आधी बागडोर का सर्वेसर्वा होने के कारण उनके कंधों पर यह जिम्मेदारी है कि वह अपने विभागों को चकाचक बनाते हुए अपनी काबिलियत और क्षमता का बिगुल बजाएं।
दुष्यंत चौटाला को जहां एक तरफ सरकार की गठबंधन सहयोगी भाजपा के साथ बेहतर तालमेल रखते हुए आगे बढ़ना है, दूसरी तरफ अपने विभागों का कायाकल्प करते हुए नए दौर की सियासत का सबसे बड़ा चेहरा बनाना है।
दुष्यंत चौटाला की सूझबूझ और समझदारी ही जहां एक तरफ गठबंधन सरकार की उम्र को तय करने का काम करेगी वहीं दूसरी तरफ उनकी कार्यक्षमता और दूरदर्शिता प्रशासन पर पकड़ का पैमाना तय करेगी।
गठबंधन सरकार में दुष्यंत चौटाला का कामकाज है खुद उनके और जेजेपी दोनों के भविष्य की दशा और दिशा तय करेगा।
रणजीत सिंह और दुष्यंत चौटाला की दादा-पोते की जोड़ी मौजूदा सरकार की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। सबसे ज्यादा अनुभव और सबसे युवा नेताओं की यह पारिवारिक जोड़ी सफलता का नया इतिहास रचने का सामर्थ्य रखती है।
अब देखना यह है कि तीन दशकों की सोच के अंतर वाले यह दोनों नेता एक दूसरे से तालमेल बनाते हुए किस तरह से अपने-अपने विभागों का संचालन करते हुए खुद को दूसरे से इक्कीस साबित करते हैं।

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