चीन में फिर गिरी जन्मदर: क्या गहरा रहा आबादी का संकट?

Atal Hind Team Online29 August 202619 min read28 viewsविदेश
चीन में फिर गिरी जन्मदर: क्या गहरा रहा आबादी का संकट?

चीन में जन्मदर फिर गिरी, 2025 में 79.2 लाख जन्म

कब, कहाँ, कैसे, क्यों?

  • कब: चीनी नेशनल हेल्थ कमीशन द्वारा आधिकारिक बुलेटिन जारी कर वर्ष 2025 के जनसांख्यिकीय आंकड़े सार्वजनिक किए गए।
  • कहाँ: चीन (बीजिंग/वैश्विक स्तर पर जनसांख्यिकीय असर)।
  • कैसे: साल 2024 में मामूली उछाल के बाद 2025 में नवजात बच्चों की संख्या घटकर महज 79.2 लाख रह गई, जबकि मौतों का आंकड़ा 1.131 करोड़ दर्ज हुआ।
  • क्यों: युवाओं में शादी और बच्चे पैदा करने के प्रति घटती रुचि, बच्चों के पालन-पोषण का अत्यधिक खर्च, जीवन-शैली का दबाव और पुरानी 'वन चाइल्ड पॉलिसी' के दीर्घकालिक दुष्परिणामों के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।
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चीन में जन्मदर बढ़ाने की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। 2024 में कुछ सुधार दिखाई देने के बाद 2025 में देश में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या फिर तेजी से घट गई। नए आंकड़ों के मुताबिक 2025 में चीन में 79.2 लाख बच्चों का जन्म हुआ, जबकि इसी साल 1.13 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हुई।

चीन के लिए यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल चीन पिछले कई वर्षों से जनसंख्या में गिरावट और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी की समस्या से जूझ रहा है। सरकार ने शादी और बच्चे पैदा करने को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन अब तक इनका असर स्थायी रूप से दिखाई नहीं दे रहा है।

चीन की आधिकारिक जनसंख्या जानकारी के अनुसार 2025 के अंत में देश की कुल आबादी करीब 140.489 करोड़ थी। एक साल पहले के मुकाबले इसमें 33.9 लाख की कमी आई। 2025 में जन्मदर प्रति 1,000 लोगों पर 5.63 रही, जबकि मृत्यु दर 8.04 प्रति 1,000 रही। इसके कारण प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि दर -2.41 प्रति 1,000 हो गई।

2024 में बढ़े थे जन्म, लेकिन एक साल बाद फिर गिरावट

29 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

चीन की जनसंख्या कहानी में 2024 का साल थोड़ा अलग रहा था। उस साल 95.4 लाख बच्चों का जन्म हुआ था। 2023 में यह संख्या 90.2 लाख थी। यानी 2024 में करीब 5.2 लाख ज्यादा बच्चों का जन्म हुआ था।

2024 में जन्मदर भी 6.77 प्रति 1,000 तक पहुंच गई थी। यह 2023 के 6.39 प्रति 1,000 के मुकाबले 0.38 की बढ़ोतरी थी। लगातार कई वर्षों तक गिरावट के बाद यह सुधार चीन सरकार के लिए कुछ राहत लेकर आया था।

लेकिन यह बढ़ोतरी लंबे समय तक नहीं टिक सकी।

2025 में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या घटकर 79.2 लाख रह गई। यानी 2024 के मुकाबले करीब 16.2 लाख कम बच्चों का जन्म हुआ। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो एक साल में जन्मों की संख्या में लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट आई।

यही कारण है कि चीन में जनसंख्या को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। सवाल यह है कि 2024 में दिखाई दिया सुधार आखिर अस्थायी क्यों साबित हुआ और सरकार की लगातार कोशिशों के बावजूद परिवार ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए तैयार क्यों नहीं हैं?

चीन में कितने बच्चे पैदा हुए?

पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों को देखें तो तस्वीर काफी साफ दिखाई देती है।

2021 में चीन में करीब 1.062 करोड़ बच्चों का जन्म हुआ था। 2022 में यह संख्या घटकर 95.6 लाख हो गई। 2023 में 90.2 लाख बच्चे पैदा हुए और 2024 में संख्या बढ़कर 95.4 लाख पहुंची।

अब 2025 में यह आंकड़ा सिर्फ 79.2 लाख रह गया है।

यानी चार साल में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में करीब 25 लाख से ज्यादा की कमी आई है। चीन के आधिकारिक आंकड़ों में 2021 से लगातार कम जन्म का यह रुझान साफ दिखाई देता है, हालांकि 2024 में कुछ समय के लिए इसमें सुधार हुआ था।

वर्ष चीन में जन्म
2021 1.062 करोड़
2022 95.6 लाख
2023 90.2 लाख
2024 95.4 लाख
2025 79.2 लाख

इन आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 की बढ़ोतरी को चीन में जन्मदर की स्थायी वापसी नहीं माना जा सकता।

चीन की कुल आबादी भी घट रही है

कम जन्म का सीधा असर चीन की कुल आबादी पर पड़ रहा है।

2025 के अंत में चीन की आबादी 140.489 करोड़ रही। यह 2024 के मुकाबले 33.9 लाख कम है। 2024 में भी चीन की आबादी करीब 13.9 लाख घटी थी।

इसका मतलब है कि चीन की कुल आबादी में गिरावट अब एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया बनती दिखाई दे रही है।

2025 में 79.2 लाख बच्चों का जन्म हुआ, लेकिन 1.131 करोड़ लोगों की मौत हुई। यानी केवल जन्म और मृत्यु के अंतर को देखें तो मरने वालों की संख्या पैदा होने वाले बच्चों से करीब 33.9 लाख ज्यादा थी। इसी वजह से प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि दर -2.41 प्रति 1,000 रही।

यह स्थिति किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए लंबे समय में गंभीर चुनौती पैदा कर सकती है।

क्योंकि आज पैदा होने वाले बच्चे ही भविष्य में कर्मचारी, उपभोक्ता, करदाता और परिवार चलाने वाली नई पीढ़ी बनते हैं। अगर बच्चों की संख्या लगातार कम होती है तो आने वाले दशकों में काम करने वाली आबादी का आकार भी प्रभावित हो सकता है।

चीन में मौतें ज्यादा, जन्म कम

2025 में चीन में 11.31 मिलियन यानी करीब 1.13 करोड़ मौतें दर्ज हुईं।

मृत्यु दर 8.04 प्रति 1,000 रही। इसके मुकाबले जन्मदर केवल 5.63 प्रति 1,000 थी।

सरल भाषा में कहें तो चीन में हर 1,000 लोगों पर जितने बच्चे पैदा हुए, उससे कहीं ज्यादा लोगों की मौत हुई। यही अंतर देश की प्राकृतिक आबादी को नीचे ले जा रहा है।

यह समस्या केवल बच्चों की संख्या कम होने की नहीं है। चीन में बुजुर्ग आबादी का हिस्सा भी तेजी से बढ़ रहा है।

2025 के अंत तक चीन में 60 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या 32.338 करोड़ थी। यह कुल आबादी का करीब 23 प्रतिशत है। 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की संख्या 22.365 करोड़ थी, जो कुल आबादी का 15.9 प्रतिशत है।

यानी एक तरफ बच्चों की संख्या कम हो रही है और दूसरी तरफ बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है।

चीन के लिए यह समस्या इतनी बड़ी क्यों है?

किसी देश की अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए पर्याप्त कामकाजी आबादी जरूरी होती है।

युवा लोग नौकरी करते हैं, कारोबार करते हैं, टैक्स देते हैं और परिवारों की आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाते हैं। यही लोग बुजुर्गों के लिए पेंशन और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को भी अप्रत्यक्ष रूप से मजबूत करते हैं।

लेकिन अगर युवा आबादी का आकार लगातार कम होता है तो सरकार पर सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च बढ़ सकता है।

चीन में 2025 के अंत तक 16 से 59 वर्ष की आबादी करीब 85.136 करोड़ थी, जो कुल आबादी का 60.6 प्रतिशत थी। इसके मुकाबले 60 वर्ष से ज्यादा उम्र की आबादी 23 प्रतिशत हो चुकी थी।

आने वाले वर्षों में यह अनुपात और बदल सकता है।

इसलिए चीन की सरकार जन्मदर को सिर्फ सामाजिक मुद्दा नहीं मान रही। इसे आर्थिक विकास और देश की भविष्य की ताकत से भी जोड़ा जा रहा है।

आखिर चीन में लोग कम बच्चे क्यों चाहते हैं?

यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है।

सरकार बच्चे पैदा करने के लिए आर्थिक सहायता दे सकती है, लेकिन बच्चे पैदा करने का फैसला परिवार कई दूसरे कारणों को देखकर करता है।

शहरों में घर महंगे हैं। बच्चों की शिक्षा पर खर्च अधिक है। नौकरी का दबाव है। महिलाओं के करियर पर मातृत्व का असर पड़ सकता है। शादी की उम्र बढ़ रही है और युवाओं में शादी करने की इच्छा भी पहले की तुलना में कम हुई है।

इसके अलावा छोटे परिवारों की आदत कई वर्षों में समाज का हिस्सा बन चुकी है।

चीन ने लंबे समय तक एक-बच्चा नीति लागू रखी थी। बाद में इसे पहले दो बच्चों और फिर तीन बच्चों की अनुमति वाली नीति में बदला गया। लेकिन सिर्फ कानूनी सीमा हटाने से परिवारों की सोच और आर्थिक स्थिति तुरंत नहीं बदलती।

चीन के सरकारी शोध में भी कम होती प्रजनन इच्छा, प्रजनन उम्र की महिलाओं की संख्या में कमी और देर से शादी जैसे कारणों को महत्वपूर्ण माना गया है।

एक बच्चे के लिए खर्च भी बड़ी वजह

आज चीन के कई शहरी परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चा पैदा होने के बाद उसकी देखभाल और शिक्षा का खर्च कैसे उठाया जाए।

बच्चे का जन्म केवल अस्पताल का खर्च नहीं है।

इसके बाद डे-केयर, स्कूल, स्वास्थ्य, कपड़े, भोजन, घर और शिक्षा जैसी जरूरतें जुड़ जाती हैं। प्रतिस्पर्धी शिक्षा व्यवस्था के कारण कई परिवार बच्चों की पढ़ाई को लेकर काफी पैसा खर्च करते हैं।

युवाओं में नौकरी की अनिश्चितता भी एक वजह मानी जाती है।

अगर किसी दंपती को यह लगता है कि एक बच्चे के बाद घर का खर्च संभालना मुश्किल होगा तो वह दूसरा बच्चा पैदा करने का फैसला टाल सकता है।

इसी वजह से सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता के बावजूद जन्मदर में तुरंत बड़ा बदलाव नहीं दिखाई देता।

चीन ने क्या-क्या कदम उठाए हैं?

चीन सरकार पिछले कुछ वर्षों से लगातार जन्मदर बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक राष्ट्रीय स्तर की चाइल्डकेयर सब्सिडी योजना है। 2025 में चीन ने तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों वाले परिवारों के लिए हर बच्चे पर सालाना 3,600 युआन की राष्ट्रीय सब्सिडी शुरू की।

यह योजना 1 जनवरी 2025 से प्रभावी की गई। इसके तहत पात्र परिवारों को बच्चे के तीन वर्ष की उम्र तक सालाना सहायता मिल सकती है।

सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य बच्चों की परवरिश का आर्थिक बोझ कम करना और परिवारों को बच्चे पैदा करने के लिए अधिक अनुकूल माहौल देना है।

यह चीन की जन्म समर्थन नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना गया क्योंकि इससे पहली, दूसरी और तीसरी संतान वाले पात्र परिवारों को समान आधार पर सहायता मिलती है।

सिर्फ पैसा देने से समस्या हल होगी?

यही चीन की सबसे बड़ी चुनौती है।

आर्थिक मदद निश्चित रूप से परिवारों का खर्च कम कर सकती है, लेकिन जन्मदर बढ़ाने के लिए केवल एक सब्सिडी पर्याप्त नहीं हो सकती।

सरकार ने खुद जन्म समर्थन नीति को कई क्षेत्रों से जोड़ने की बात कही है।

इनमें मातृत्व स्वास्थ्य, चाइल्डकेयर, शिक्षा, टैक्स, रोजगार और आवास जैसे क्षेत्र शामिल हैं। चीन में तीन साल से कम उम्र के बच्चों की देखभाल से जुड़े खर्च पर व्यक्तिगत आयकर में अतिरिक्त कटौती की व्यवस्था भी की गई है।

कई प्रांतों में मातृत्व अवकाश, पितृत्व अवकाश और बच्चों की देखभाल के लिए अतिरिक्त छुट्टी जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ाया गया है।

सरकार का लक्ष्य ऐसा माहौल बनाना है जिसमें बच्चे पैदा करना परिवार के लिए बहुत बड़ा आर्थिक या सामाजिक जोखिम न बने।

2024 में जन्म बढ़ने की वजह क्या थी?

2024 में जन्मदर बढ़ने के पीछे कई अस्थायी कारण भी बताए गए थे।

2024 चीनी कैलेंडर में ड्रैगन का वर्ष था। चीन की सांस्कृतिक परंपरा में ड्रैगन को शुभ और भाग्यशाली माना जाता है। ऐसे वर्षों में कुछ परिवार बच्चों के जन्म को प्राथमिकता देते हैं।

इसके अलावा कोविड महामारी के बाद शादी के आंकड़ों में भी बदलाव आया था।

विशेषज्ञों ने 2024 में जन्म बढ़ने के पीछे पिछले वर्षों में टली हुई शादियों और बढ़ती शादी पंजीकरण संख्या को भी एक कारण माना था।

लेकिन 2025 में इन अस्थायी कारणों का असर कम हो गया।

इसीलिए जन्मों की संख्या फिर नीचे चली गई।

चीन की जन्मदर अब कितनी है?

2025 में चीन की जन्मदर 5.63 प्रति 1,000 लोगों पर आ गई।

यह 2024 के 6.77 प्रति 1,000 से काफी कम है।

इससे पता चलता है कि 2024 की 0.38 प्रति 1,000 की सुधार के बाद 2025 में जन्मदर ने उस सुधार को पूरी तरह खो दिया।

जन्मदर में गिरावट को केवल एक साल का आंकड़ा मानकर नजरअंदाज करना भी सही नहीं होगा, क्योंकि चीन में कई वर्षों से कुल जन्मों का दीर्घकालिक रुझान नीचे की ओर रहा है।

2021 में 1.062 करोड़ से 2025 में 79.2 लाख तक पहुंचना इसी लंबे बदलाव का संकेत है।

चीन में जन्म के समय लड़के ज्यादा

2025 के आंकड़ों में एक और बात सामने आई है।

जन्म के समय चीन का लिंग अनुपात 111.5 बताया गया है। इसका अर्थ है कि हर 100 लड़कियों के मुकाबले करीब 111.5 लड़कों का जन्म हुआ।

यह अनुपात 2024 की तुलना में थोड़ा बेहतर हुआ है, लेकिन फिर भी सामान्य जैविक संतुलन से ऊपर है। चीन डेली की रिपोर्ट के अनुसार 2025 का आंकड़ा 2024 के मुकाबले 0.2 अंक सुधरा।

चीन में लंबे समय तक लड़कों को प्राथमिकता देने की सामाजिक सोच के कारण जन्म के समय लिंग अनुपात एक बड़ा जनसांख्यिकीय मुद्दा रहा है।

हालांकि समय के साथ इसमें सुधार आया है, लेकिन अनुपात अभी भी पूरी तरह संतुलित स्तर पर नहीं पहुंचा है।

चीन की महिलाओं की संख्या और भविष्य

जन्मदर का सीधा संबंध प्रजनन उम्र की महिलाओं की संख्या से भी है।

अगर किसी देश में पिछले कई दशकों में कम बच्चे पैदा होते हैं तो भविष्य में बच्चे पैदा करने वाली उम्र की महिलाओं की संख्या भी कम हो जाती है।

यही कारण है कि जन्मदर बढ़ाने की कोशिश करने के बावजूद सरकार के सामने एक कठिन समस्या है।

आज अगर किसी परिवार को आर्थिक सहायता देकर एक अतिरिक्त बच्चा पैदा करने के लिए तैयार किया भी जाए, तब भी देश में प्रजनन उम्र की महिलाओं की कुल संख्या पहले की तुलना में कम हो सकती है।

इसका मतलब है कि जनसंख्या में बदलाव को पलटना आसान नहीं है।

यह केवल आज की नीति का सवाल नहीं है, बल्कि पिछले कई दशकों की जनसंख्या नीति का भी परिणाम है।

एक-बच्चा नीति की विरासत

चीन की मौजूदा जनसंख्या समस्या को समझने के लिए उसकी पुरानी एक-बच्चा नीति को भी समझना जरूरी है।

कई दशकों तक परिवारों के लिए बच्चों की संख्या सीमित रखने की नीति लागू रही। इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ती आबादी को नियंत्रित करना था।

उस नीति ने जनसंख्या वृद्धि को रोकने में भूमिका निभाई, लेकिन इसके लंबे समय के सामाजिक परिणाम भी सामने आए।

बाद में चीन ने नीति में बदलाव किया।

2016 में अधिकांश दंपतियों को दो बच्चे पैदा करने की अनुमति दी गई और 2021 में तीन बच्चों की नीति लाई गई। साथ ही सरकार ने परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सहायता देने की दिशा में कई कदम उठाए।

लेकिन कई युवाओं के लिए समस्या अब यह नहीं है कि उन्हें कितने बच्चे पैदा करने की अनुमति है।

समस्या यह है कि वे कितने बच्चे पालने का खर्च उठा सकते हैं।

चीन की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

कम जन्मदर का असर तुरंत दिखाई नहीं देता।

आज कम बच्चे पैदा होते हैं तो अगले कुछ वर्षों में इसका सबसे बड़ा असर स्कूलों और बच्चों से जुड़ी सेवाओं पर दिखाई देता है।

इसके बाद 15 से 20 साल में असर कॉलेज और रोजगार बाजार पर आता है।

करीब 20 से 30 साल बाद इसका प्रभाव कामकाजी आबादी पर ज्यादा दिखाई देता है।

इसलिए चीन के लिए मौजूदा जन्मदर की गिरावट भविष्य की अर्थव्यवस्था का सवाल है।

अगर काम करने वाले लोगों की संख्या घटती है और बुजुर्गों की संख्या बढ़ती है तो पेंशन, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है।

साथ ही कंपनियों को भविष्य में श्रमिकों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

क्या चीन की अर्थव्यवस्था तुरंत कमजोर हो जाएगी?

ऐसा कहना सही नहीं होगा।

चीन के पास विशाल औद्योगिक आधार, बड़ी अर्थव्यवस्था, तकनीकी क्षमता और बड़ी मौजूदा कामकाजी आबादी है।

इसके अलावा चीन रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकों पर भी तेजी से काम कर रहा है।

लेकिन लंबी अवधि में जनसंख्या का आकार और उसकी उम्र की संरचना अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है।

कम युवा आबादी का अर्थ है कि भविष्य में कंपनियों को कर्मचारियों की भर्ती, उपभोक्ता बाजार और घरेलू मांग के स्तर पर बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।

यही कारण है कि चीन सरकार जनसंख्या नीति को आर्थिक नीति से जोड़कर देख रही है।

बुजुर्ग आबादी बढ़ना दूसरी बड़ी चुनौती

चीन में 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या 2025 में 32.338 करोड़ हो गई।

यह कुल आबादी का करीब 23 प्रतिशत है।

65 वर्ष से ज्यादा उम्र की आबादी भी 22.365 करोड़ तक पहुंच गई। यह कुल आबादी का 15.9 प्रतिशत है।

जब बुजुर्ग आबादी बढ़ती है तो स्वास्थ्य सेवाओं की मांग बढ़ती है।

लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों, देखभाल, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की जरूरत भी बढ़ सकती है।

अगर उसी समय कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या घटती है तो सरकार और परिवार दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

यही चीन की जनसंख्या समस्या का दूसरा हिस्सा है।

क्या चीन की आबादी फिर बढ़ सकती है?

सैद्धांतिक रूप से ऐसा संभव है, लेकिन इसे आसान नहीं माना जा सकता।

अगर जन्मदर लगातार बढ़ती है, शादी की उम्र कम होती है, परिवारों को आर्थिक सहायता मिलती है और बच्चों की देखभाल का खर्च कम होता है तो जन्मों में सुधार आ सकता है।

लेकिन इसके लिए केवल एक साल के आंकड़ों में सुधार काफी नहीं होगा।

चीन को कई वर्षों तक लगातार जन्मदर को स्थिर या ऊपर रखने की जरूरत होगी।

2024 में जन्म बढ़े थे लेकिन 2025 में फिर गिरावट आ गई। इससे यही संकेत मिलता है कि अस्थायी प्रोत्साहन और सांस्कृतिक कारण स्थायी बदलाव की गारंटी नहीं देते।

चीन के सामने असली चुनौती क्या है?

चीन के सामने असली चुनौती सिर्फ यह नहीं है कि लोग बच्चे कम पैदा कर रहे हैं।

असली चुनौती यह है कि युवा परिवारों को बच्चे पैदा करने के लिए आर्थिक, सामाजिक और कामकाजी परिस्थितियां कितनी अनुकूल लगती हैं।

अगर किसी महिला को बच्चे के बाद नौकरी और करियर को लेकर चिंता रहती है तो केवल नकद सहायता पर्याप्त नहीं हो सकती।

अगर परिवार को घर खरीदना मुश्किल लगता है तो बच्चे की योजना टल सकती है।

अगर डे-केयर महंगा है या आसानी से उपलब्ध नहीं है तो दूसरा बच्चा पैदा करना कठिन लग सकता है।

और अगर शिक्षा का खर्च बहुत अधिक महसूस होता है तो परिवार एक बच्चे तक सीमित रह सकता है।

इसीलिए चीन ने अपनी नीतियों को धीरे-धीरे सिर्फ “ज्यादा बच्चे पैदा करो” के संदेश से आगे बढ़ाकर परिवार को व्यापक सहायता देने की दिशा में बढ़ाया है।

क्या चाइल्डकेयर सब्सिडी से जन्मदर बढ़ेगी?

इसका जवाब अभी देना जल्दबाजी होगा।

चीन की राष्ट्रीय चाइल्डकेयर सब्सिडी योजना 2025 में शुरू हुई है। सरकार हर पात्र बच्चे के लिए तीन वर्ष की उम्र तक सालाना 3,600 युआन की मूल सहायता दे रही है।

यह परिवारों के खर्च को कुछ कम कर सकती है।

लेकिन चीन के बड़े शहरों में आवास, शिक्षा और बच्चों की देखभाल की कुल लागत के सामने यह राशि कितनी बड़ी राहत देती है, यह अलग-अलग परिवारों पर निर्भर करेगा।

सरकार के लिए असली परीक्षा यह होगी कि क्या आने वाले वर्षों में जन्मदर लगातार ऊपर जाती है या नहीं।

अगर 2026 और उसके बाद जन्मदर में स्थायी सुधार आता है तो माना जा सकता है कि नीतियों का कुछ असर हुआ।

अगर जन्मदर लगातार नीचे जाती रहती है तो सरकार को और बड़े सुधार करने पड़ सकते हैं।

चीन की आबादी और दुनिया पर असर

चीन की आबादी में बदलाव केवल चीन की घरेलू समस्या नहीं है।

चीन दुनिया की प्रमुख विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। वहां कामगारों की संख्या, उपभोक्ताओं की संख्या और घरेलू मांग में बदलाव का असर वैश्विक कंपनियों पर भी पड़ सकता है।

अगर चीन में युवा आबादी का अनुपात घटता है तो कंपनियां उत्पादन के लिए ऑटोमेशन पर और अधिक निर्भर हो सकती हैं।

कुछ उद्योगों में उत्पादन दूसरे देशों में भी स्थानांतरित हो सकता है।

दूसरी तरफ बुजुर्ग आबादी बढ़ने से स्वास्थ्य, मेडिकल उपकरण, वृद्ध देखभाल और संबंधित सेवाओं की मांग बढ़ सकती है।

यानी जनसंख्या में बदलाव चीन की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के साथ-साथ उसकी आर्थिक प्राथमिकताओं को भी बदल सकता है।

भारत के लिए भी बड़ा सबक

चीन की घटती जन्मदर को भारत के संदर्भ में भी देखा जा सकता है, हालांकि दोनों देशों की परिस्थितियां अलग हैं।

भारत अभी चीन की तुलना में युवा आबादी वाला देश है।

इसका अर्थ है कि भारत के पास कामकाजी उम्र की बड़ी आबादी का लाभ उठाने का अवसर है।

लेकिन केवल युवा आबादी होना पर्याप्त नहीं है।

युवाओं को शिक्षा, कौशल, रोजगार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलना भी जरूरी है।

चीन का अनुभव यह बताता है कि जनसंख्या का लाभ अपने आप आर्थिक लाभ में नहीं बदलता। इसके लिए सही नीतियां और लंबे समय की तैयारी जरूरी होती है।

अब चीन के सामने आगे क्या रास्ता है?

चीन को आने वाले वर्षों में तीन स्तरों पर काम करना पड़ सकता है।

पहला, परिवारों के लिए बच्चे पैदा करने और पालने का खर्च कम करना।

दूसरा, महिलाओं को मातृत्व के बाद रोजगार और करियर जारी रखने के लिए बेहतर व्यवस्था देना।

तीसरा, बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के लिए स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना।

इसके साथ सरकार को आवास, शिक्षा और डे-केयर जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान देना होगा।

सिर्फ जन्म के समय आर्थिक सहायता देने से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी।

परिवारों को लंबे समय तक सहायता की जरूरत होती है।

2025 के आंकड़ों का सबसे बड़ा संदेश

चीन के 2025 के आंकड़े एक बात बहुत साफ बताते हैं।

2024 में जन्मदर में आया सुधार अभी स्थायी बदलाव नहीं बना है।

2025 में जन्मों की संख्या 79.2 लाख रह गई, जबकि मौतों की संख्या 1.13 करोड़ से ज्यादा रही। कुल आबादी 33.9 लाख घट गई और प्राकृतिक वृद्धि दर -2.41 प्रति 1,000 हो गई।

साथ ही 60 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी कुल आबादी का करीब 23 प्रतिशत हो चुकी है।

यानी चीन एक साथ दो समस्याओं का सामना कर रहा है—कम बच्चे और ज्यादा बुजुर्ग।

सरकार ने चाइल्डकेयर सब्सिडी, टैक्स राहत, मातृत्व और पितृत्व सुविधाओं तथा डे-केयर जैसी नीतियों के जरिए इसका जवाब देने की कोशिश शुरू कर दी है।

लेकिन 2025 का आंकड़ा बताता है कि चुनौती बहुत बड़ी है।

चीन की जन्मदर में 2025 की गिरावट केवल एक साल के आंकड़े की कहानी नहीं है।

यह पिछले कई वर्षों से चल रहे जनसांख्यिकीय बदलाव का हिस्सा है। 2024 में जन्मों की संख्या बढ़ने से कुछ उम्मीद बनी थी, लेकिन 2025 में 79.2 लाख जन्मों के साथ वह उम्मीद कमजोर पड़ गई।

चीन के लिए चिंता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि जन्मदर घटने के साथ-साथ बुजुर्ग आबादी बढ़ रही है। 2025 के अंत तक 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या 32 करोड़ से ऊपर पहुंच चुकी थी।

सरकार अब परिवारों को आर्थिक मदद देने से लेकर चाइल्डकेयर, टैक्स, मातृत्व अवकाश, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं तक कई मोर्चों पर नीतियां बना रही है।

लेकिन जनसंख्या का फैसला केवल सरकारी आदेश से नहीं होता।

जब युवा परिवार अपने भविष्य को सुरक्षित महसूस करेंगे, घर और नौकरी को लेकर उनका भरोसा बढ़ेगा, बच्चों की शिक्षा और देखभाल का खर्च कम होगा और महिलाओं के लिए परिवार तथा करियर के बीच संतुलन आसान होगा, तभी जन्मदर में स्थायी सुधार की संभावना बढ़ेगी।

इसलिए चीन की मौजूदा जनसंख्या कहानी को केवल “लोग बच्चे पैदा नहीं कर रहे” के रूप में देखना सही नहीं होगा।

यह अर्थव्यवस्था, रोजगार, आवास, शिक्षा, महिलाओं की भूमिका, सामाजिक सुरक्षा और परिवार की बदलती सोच से जुड़ा हुआ बड़ा बदलाव है।

2025 के 79.2 लाख जन्म चीन के लिए एक चेतावनी जरूर हैं। अब आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चीन की नई जन्म समर्थन नीतियां इस गिरावट को रोक पाती हैं या नहीं।

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