4PM की महिला पत्रकार से मारपीट मामला: दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप

Atal Hind Team Online3 September 20266 min read28 viewsदिल्ली
4PM की महिला पत्रकार से मारपीट मामला: दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप

दिल्ली में महिला पत्रकार से दुर्व्यवहार और पुलिस पर गंभीर आरोप

दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश के दौरान दो महिला पत्रकारों के साथ कथित तौर पर पुलिस द्वारा मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। दोनों पत्रकार 4PM न्यूज नेटवर्क से जुड़ी बताई जा रही हैं। पत्रकार शाहीन खान और उनकी सहयोगी नफीसा ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

नई दिल्ली //03 सितंबर  2026  /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

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दिल्ली में एक घटना की खबर आ रही है जो कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है। 4PM न्यूज नेटवर्क की पत्रकार शाहीन खान का आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश की तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और मारपीट की।

शाहीन का कहना है कि घटना साकेत मैक्स हॉस्पिटल में नए भवन के उद्घाटन के दौरान हुई। वहां वे रिपोर्टिंग के लिए गई थीं। मुख्यमंत्री भी वहां मौजूद थीं। जब उन्होंने सवाल पूछने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया।उनका आरोप है कि पुलिस ने उन्हें थाने ले जाते समय पीटा। थाने में भी दुर्व्यवहार जारी रहा। जब पुलिसकर्मियों ने नाम पूछा और ‘खान’ सुना तो मारपीट और बढ़ गई।

शाहीन ने वीडियो में चोट के निशान भी दिखाए हैं। उनकी सहयोगी पत्रकार नफीसा खान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ बताया जा रहा है।4PM न्यूज नेटवर्क ने सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट डालकर इस घटना का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछना क्या अब इतना बड़ा अपराध हो गया है कि पत्रकार को पीटा जाए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक पत्रकार का मामला नहीं बल्कि पूरी पत्रकारिता की आजादी का सवाल है।न्यूजलॉन्ड्री जैसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साकेत पुलिस स्टेशन के एसएचओ ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

दिल्ली पुलिस की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। आरोप अभी सिर्फ पत्रकारों और उनके चैनल की तरफ से हैं।घटना के बाद आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महिला मुख्यमंत्री के सामने दो महिला पत्रकारों को सिर्फ सवाल पूछने पर पीटना शर्मनाक है। कांग्रेस ने भी इस घटना की निंदा की और कहा कि पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार गलत है। कुछ नेताओं ने एलजी से हस्तक्षेप की मांग की है।शाहीन का आरोप है कि पिछले दिनों 4PM ने दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री से जुड़े कुछ मुद्दों पर खबरें निकाली थीं। वे मानती हैं कि शायद उन खबरों का भी इस घटना से कोई संबंध हो। हालांकि यह उनका अपना अनुमान है। इसकी पुष्टि अभी किसी स्वतंत्र जांच से नहीं हुई है।पत्रकारिता में सवाल पूछना मूल काम माना जाता है।

मुख्यमंत्री या कोई भी जनप्रतिनिधि जनता के सवालों का जवाब देने के लिए होते हैं। अगर सवाल पूछने पर ही हिरासत और मारपीट के आरोप लग रहे हैं तो यह चिंता की बात है। कई संगठनों और पत्रकारों का कहना है कि प्रेस की आजादी पर असर पड़ सकता है।शाहीन ने वीडियो में बताया कि उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ी। उन्होंने सहयोगी के शरीर पर चोट के निशान भी दिखाए। कैमरे वाले के साथ भी कुछ गलत व्यवहार हुआ बताया जा रहा है।

ये सब आरोप हैं। पुलिस की तरफ से अभी कोई खंडन या स्पष्टीकरण नहीं आया है।दिल्ली में पत्रकारों के साथ पहले भी कुछ घटनाएं चर्चा में आई हैं। कभी-कभी रिपोर्टिंग के दौरान टकराव की खबरें आती रहती हैं। लेकिन इस बार आरोप मुख्यमंत्री से सीधे सवाल पूछने से जुड़ा है। इसलिए यह ज्यादा ध्यान खींच रहा है।मामले में निष्पक्ष जांच की मांग हो रही है। घटनास्थल और थाने के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की बात कही जा रही है। अगर किसी पुलिसकर्मी ने नाम या धार्मिक पहचान के आधार पर दुर्व्यवहार किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

ये मांगें 4PM और कुछ राजनीतिक दलों की तरफ से आई हैं।अभी स्थिति यह है कि आरोप एक तरफ हैं और पुलिस की चुप्पी दूसरी तरफ। जब तक जांच पूरी नहीं होती या आधिकारिक बयान नहीं आता, पूरा सच सामने नहीं आ सकता। दोनों पक्षों की बात सुनना जरूरी है।शाहीन जैसी महिला पत्रकार अगर सार्वजनिक जगह पर मुख्यमंत्री से सवाल पूछ रही हैं तो सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रखना चाहिए। लेकिन ताकत का गलत इस्तेमाल भी नहीं होना चाहिए।

यह संतुलन बनाए रखना दोनों तरफ की जिम्मेदारी है।दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को इस मामले में जल्द स्पष्टीकरण देना चाहिए। अगर आरोप गलत हैं तो उन्हें खारिज किया जाए। अगर कुछ सच्चाई है तो दोषियों पर कार्रवाई हो। पारदर्शिता से ही भरोसा बना रहता है।पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाती है। सवाल पूछना उसका हक है। सत्ता को जवाबदेह बनाना उसका काम है।

अगर इस काम में बाधा आती है तो लोकतंत्र कमजोर पड़ता है। इसलिए इस घटना पर ध्यान दिया जा रहा है।अभी सोशल मीडिया पर इस वीडियो और पोस्ट की चर्चा हो रही है। कुछ लोग पत्रकारों के साथ खड़े हो रहे हैं। कुछ पुलिस की तरफ से सुरक्षा का तर्क दे रहे हैं। दोनों नजरिए मौजूद हैं। लेकिन आरोप गंभीर हैं इसलिए जांच जरूरी है।शाहीन खान और नफीसा खान दोनों महिला पत्रकार हैं।

उनके साथ अगर मारपीट हुई है तो यह और भी चिंताजनक है। महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार के आरोप हमेशा गंभीर माने जाते हैं।घटना साकेत इलाके में हुई। मैक्स हॉस्पिटल के नए भवन के उद्घाटन पर मुख्यमंत्री पहुंची थीं। पत्रकार वहां रिपोर्टिंग के लिए गए थे। सामान्य तौर पर ऐसे कार्यक्रमों में मीडिया की एंट्री होती है। लेकिन यहां टकराव हो गया।4PM न्यूज नेटवर्क ने पूरे घटनाक्रम को अपनी पोस्ट में विस्तार से लिखा।

उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछना कब से अपराध बन गया। पत्रकार का नाम ‘खान’ होने पर मारपीट बढ़ना क्या सही है। ये सवाल उन्होंने उठाए हैं।राजनीतिक दलों ने भी अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी दल इसे सत्ता के रवैये से जोड़ रहे हैं। सत्ता पक्ष की तरफ से अभी कोई बड़ा बयान नहीं आया है। दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है।

इसलिए कुछ लोग अमित शाह और केंद्र सरकार का भी नाम ले रहे हैं। लेकिन सीधे सबूत अभी उपलब्ध नहीं हैं।मामले की जांच अगर निष्पक्ष हो तो सच्चाई सामने आएगी। सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट से बहुत कुछ साफ हो सकता है। शाहीन ने चोट के निशान दिखाए हैं। उनकी मेडिकल जांच भी होनी चाहिए।पत्रकारों के संगठन भी ऐसे मामलों में अक्सर आवाज उठाते हैं। प्रेस क्लब या अन्य पत्रकार यूनियन अगर बयान देते हैं तो दबाव बढ़ता है।

अभी शुरुआती प्रतिक्रियाएं आई हैं। आगे और आवाजें उठ सकती हैं।यह घटना याद दिलाती है कि लोकतंत्र में सवाल पूछने की आजादी कितनी जरूरी है। अगर पत्रकार डरने लगें तो जनता तक सही जानकारी नहीं पहुंचेगी। इसलिए ऐसे आरोपों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।दिल्ली की जनता भी इस खबर पर नजर रखे हुए है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार अभी अपेक्षाकृत नई है। ऐसे में पत्रकारों के साथ व्यवहार पर ध्यान दिया जा रहा है।

अंत में यही कहा जा सकता है कि आरोप गंभीर हैं। पुलिस को जवाब देना चाहिए। जांच होनी चाहिए। अगर गलती हुई है तो सुधार होना चाहिए। अगर आरोप गलत हैं तो सच्चाई सामने आनी चाहिए। दोनों तरफ से पारदर्शिता ही सही रास्ता है।शाहीन और उनकी सहयोगी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उनकी शिकायत दर्ज हो। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। यही मांगें अभी सामने आ रही हैं। आगे की खबरों का इंतजार है।

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