धीरज बोम्मदेवरा ने मैक्सिको में जीता आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल का गोल्ड मेडल

धीरज बोम्मदेवरा ने मैक्सिको में जीता आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल का गोल्ड मेडल

धीरज बोम्मदेवरा ने 13 सितंबर 2026 को साल्टिलो में हुंडई आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल में पुरुषों की रिकर्व स्पर्धा का खिताब जीत लिया है। यह जीत इस बात का पहला मौका है जब किसी भारतीय पुरुष तीरंदाज ने इस आमंत्रण प्रतियोगिता में रिकर्व वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया है। इस 25 वर्षीय खिलाड़ी ने जापान के प्रतियोगी नाकानिशि जुन्या को 6 के मुकाबले 5 से हराकर यह शानदार जीत हासिल की है। वर्ल्ड आर्चरी और ओलंपिक्स डॉट कॉम की मैच रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती हैं कि यह परिणाम एक तनावपूर्ण पांच सेटों की श्रृंखला और अंतिम एकल तीर शूट-ऑफ के बाद आया जो 10 के मुकाबले 9 पर समाप्त हुआ। द हिंदू, पीटीआई, आईएएनएस, डेक्कन हेराल्ड और इंडिया टुडे सहित विभिन्न समाचार आउटलेट्स द्वारा स्वतंत्र रूप से सत्यापित डेटा के अनुसार सेट का स्कोर 28 से 28, 28 से 29, 29 से 28, 28 से 30 और 28 से 27 रहा है।

फाइनल मुकाबले में पहुंचने से पहले भारतीय तीरंदाज ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण दौर का सामना किया था। उन्होंने क्वार्टर फाइनल दौर में तुर्की के ओलंपिक पदक विजेता बेर्किम ट्यूमर को 7 के मुकाबले 1 से करारी मात दी। वर्ल्ड आर्चरी द्वारा प्रकाशित रिकॉर्ड के अनुसार उस सफलता के बाद उन्होंने सेमीफाइनल मुकाबले में ठीक वैसे ही 7 के मुकाबले 1 के अंतर से फ्रांस के ओलंपिक पदक विजेता जीन चार्ल्स वालाडोंट को भी हरा दिया। इस टूर्नामेंट के प्रारूप के तहत प्रत्येक ड्रा में केवल आठ तीरंदजों की भागीदारी ही प्रतिबंधित होती है। मैक्सिको में आयोजित इस प्रतियोगिता में धीरज बोम्मदेवरा इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाले इकलौते भारतीय प्रतिनिधि थे। हालांकि यह जीत उनके करियर का एक बड़ा शिखर है लेकिन यह कोई ओलंपिक पदक नहीं है और न ही इसके जरिए एशियाई खेलों के लिए स्वतः कोटा या योग्यता मिलती है।

पिछले भारतीय रिकॉर्ड यह बताते हैं कि डोला बनर्जी ने साल 2007 में महिलाओं की रिकर्व स्पर्धा का खिताब अपने नाम किया था जबकि जयंत तालुकदार ने साल 2010 में कांस्य पदक जीता था। आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार इस प्रतियोगिता के इतिहास में इस सप्ताह के अंत से पहले किसी भी भारतीय पुरुष खिलाड़ी ने इस पोडियम के शीर्ष स्थान को हासिल नहीं किया था। वर्ल्ड कप फाइनल सीजन के अंत में होने वाली एक आमंत्रण प्रतियोगिता के रूप में मौजूद है जो व्यापक वर्ल्ड आर्चरी सर्किट से ही बनती है। विशेषज्ञों का यह नोट करना है कि इस जीत को किसी ओलंपिक खिताब के बराबर मानना पूरी तरह से गलत होगा हालांकि यह भारतीय पुरुष तीरंदाजी के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि बनी हुई है। दीपिका कुमारी इस विशिष्ट प्रतियोगिता में छह पदकों के साथ अब तक की सबसे अधिक पदक जीतने वाली भारतीय तीरंदाज बनी हुई हैं।

यह जीत अंतरराष्ट्रीय आउटडोर सीजन के एक बेहद महत्वपूर्ण चरण के दौरान सामने आई है जब सभी एथलीट आगामी एशियाई खेलों के चक्रों के लिए अपनी तैयारियों में जुटे हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक हालांकि यह कोई योग्यता प्रमाण पत्र नहीं है लेकिन यह परिणाम व्यापक भारतीय टीम की तैयारियों को एक सार्थक बढ़ावा देता है। भारतीय सेना का खेल कार्यक्रम धीरज को रोजगार प्रदान करता है जिन्होंने दुनिया में लगभग 10वीं रैंकिंग के साथ इस प्रतियोगिता में प्रवेश किया था। उनके प्रतिद्वंद्वी नाकानिशि को दुनिया में लगभग 20वीं रैंकिंग के आसपास सूचीबद्ध किया गया था। भविष्य की अंतरराष्ट्रीय परीक्षाएं इस प्रदर्शन के प्रभाव को पूरी तरह से स्पष्ट करेंगी क्योंकि जापान और दक्षिण कोरिया के प्रतियोगियों के पास अब फाइनल मैच के दबाव में उनके फॉर्म का ताजा डेटा उपलब्ध है। साल्टिलो से लौटने के बाद अब ध्यान पूरी तरह से शेष अंतरराष्ट्रीय आउटडोर सीजन कैलेंडर पर केंद्रित हो गया है। तीरंदाजी संघ ऑफ इंडिया और खेल प्राधिकरण ऑफ इंडिया यह मूल्यांकन करेंगे कि आगामी महाद्वीपीय आयोजनों के लिए यह परिणाम टीम के चयन को किस प्रकार प्रभावित करता है।

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