सिरसा: सूखे की चपेट में आए धान उत्पादक किसानों को मुआवजा दे सरकार, दुष्यंत चौटाला की मांग

हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने सिरसा और फतेहाबाद के किसानों को लेकर बड़ी मांग उठाई है। उन्होंने कहा है कि सिरसा व फतेहाबाद में पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा कम बारिश के चलते धान उत्पादकों की स्थिति काफी दयनीय हो गई है। ऐसे में सरकार को किसानों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। सरकार को सूखे की चपेट में आए किसानों को पर्याप्त मात्रा में मुआवजा देना चाहिए। दुष्यंत चौटाला यह बात रविवार को सिरसा जिले के ऐलनाबाद हलके में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कह रहे थे। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि एक ओर जहां भाखड़ा ओवरफ्लो हो रहा है, वहीं दूसरी ओर सिरसा व फतेहाबाद में नहरी पानी की खासी कमी महसूस की जा रही है।
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और अन्य विभागों का रोष
दुष्यंत चौटाला ने हरियाणा में चल रही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का विशेष रूप से हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को सफाई कर्मचारियों से बातचीत करनी चाहिए और उनकी जायज मांगों को पूरा करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा शासन की गलत नीतियों के चलते आज पूरे हरियाणा में हालात खराब हैं। आज हरियाणा में जहां एक तरफ सफाई कर्मी हड़ताल पर बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ पटवारी, बिजली निगम कर्मी और रोडवेज कर्मियों का रोष प्रदर्शन भी लगातार जारी है। सरकार इन सभी मुद्दों पर ध्यान देने से बच रही है।
महंगाई और युवाओं की समस्याओं पर सरकार को घेरा
महंगाई के मुद्दे पर बोलते हुए दुष्यंत चौटाला ने कहा कि आज देश और प्रदेश में हालात बहुत मुश्किल हो गए हैं। हर सामान्य परिवार के लिए दो वक्त की रोटी कमाना भी बहुत मुश्किल हो गया है। महंगाई की वजह से प्रत्येक गृहिणी की रसोई का बजट पूरी तरह से बिगड़ चुका है। इसके साथ ही युवाओं को उचित रोजगार नहीं मिल रहा है। रोजगार न मिलने की वजह से आज के युवा अपराध और नशे की गर्त में तेजी से आ रहे हैं।
लोकतांत्रिक प्रणाली और सदन में चर्चा से भागने का आरोप
पूर्व डिप्टी सीएम ने मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक प्रणाली में हर नागरिक और जनप्रतिनिधि को अपनी बात रखने तथा प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। मगर मुख्यमंत्री और उनका पूरा मंत्रिमंडल सदन में चर्चा से पूरी तरह भाग रहा है। उन्होंने कहा कि केवल पिछले शासनकाल पर दोष मढ़ना ही मुख्यमंत्री की सफलता नहीं है, बल्कि यह उनकी साफ विफलता है जिसे प्रदेश का एक-एक वासी बिल्कुल भी स्वीकार नहीं कर रहा है।