फर्जी ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी का बढ़ता खतरा, 32.80 लाख शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये बचाए गए

नई दिल्ली /12 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
साइबर धोखाधड़ी करने वाले फर्जी ई-चालान भेजकर बैंक खाते खाली कर रहे हैं
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) अपराधों से संबंधित सांख्यिकीय आंकड़ों को अपने प्रकाशन "क्राइम इन इंडिया" में संकलित और प्रकाशित करता है। नवीनतम प्रकाशित रिपोर्ट वर्ष 2024 की है। फर्जी ई-चालानों के संबंध में दर्ज मामलों, सुलझाए गए मामलों और धोखाधड़ी की गई राशि से संबंधित आंकड़े एनसीआरबी द्वारा नहीं रखे जाते हैं।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के तहत 'नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली' (सीएफसीएफआरएमएस) को वर्ष 2021 में शुरू किया गया, ताकि वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्ट की जा सके और धोखाधड़ी करने वालों को पैसे निकालने से रोका जा सके। आई4सी द्वारा संचालित सीएफसीएफआरएमएस के अनुसार, 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को बचाया गया है।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 की उप-धारा (3) के खंड (बी) के तहत उपयुक्त सरकार या उसकी एजेंसी द्वारा आईटी मध्यस्थों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए 'सहयोग' पोर्टल शुरू किया गया ताकि गैरकानूनी कार्य करने के लिए उपयोग की जा रही किसी भी जानकारी, डेटा या कम्युनिकेशन लिंक को हटाने या उसके एक्सेस को बंद करने की सुविधा प्रदान की जा सके। आई4सी ने सहयोग पोर्टल के माध्यम से विभिन्न प्लेटफार्मों पर 2,77,053 से अधिक अवैध और धोखाधड़ी वाले ऐप्स/सामग्री/वेबसाइटों/ई-मेल खातों/यूआरएल/लिंक को ब्लॉक कर दिया है और संबंधित आईटी मध्यस्थों को सूचित करके सक्रिय कार्रवाई की है।
भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत 'पुलिस' और 'लोक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। इसलिए, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) साइबर अपराध की रोकथाम, उनका पता लगाने, जांच और अभियोजन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय (एमएचए) के माध्यम से, साइबर अपराध प्रबंधन और प्रवर्तन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए नीतिगत मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता, क्षमता-निर्माण में मदद और वित्तीय संसाधन प्रदान करके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों में सहयोग करती है।
साइबर अपराध की जांच, फोरेंसिक और अभियोजन आदि के महत्वपूर्ण पहलुओं पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम के माध्यम से पुलिस अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों के क्षमता निर्माण के लिए आई4सी के तहत 'साइट्रेन' पोर्टल नामक एक मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स (एमओओसी) प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। 30 जून 2026 तक, इस पोर्टल के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,63,344 से अधिक पुलिस अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों का पंजीकरण किया गया और 1,61,957 से अधिक प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं।
देश में साइबर सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण से लैस साइबर कमांडो की एक विशेष शाखा स्थापित करने के लिए माननीय गृह मंत्री ने 10 सितम्बर 2024 को साइबर कमांडो कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य एक ऐसी समर्पित और कुशल टीम तैयार करना है जो महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना को सुरक्षित रखने और राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा प्रयासों में मदद करने में सक्षम हो। 281 साइबर कमांडो ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा कर लिया है।
गृह मंत्रालय के आई4सी द्वारा सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने और क्षमता निर्माण को बढ़ाने आदि के लिए नियमित रूप से 'स्टेट कनेक्ट', 'थाना कनेक्ट', 'बैंक कनेक्ट' और पीयर लर्निंग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस के जांच अधिकारियों (आईओ) को प्रारंभिक स्तर पर साइबर फोरेंसिक में सहायता प्रदान करने के लिए, आई4सी के एक भाग के रूप में नई दिल्ली (18 फरवरी 2019 को) और असम (29 अगस्त 2025 को) में अत्याधुनिक राष्ट्रीय डिजिटल जांच सहायता केंद्र (जिसे पहले राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला (जांच) {एनसीएफएल (आई)} के नाम से जाना जाता था) की स्थापना की गई है। दिनांक 30 जून 2026 तक, राष्ट्रीय-डिजिटल जांच सहायता केंद्र, नई दिल्ली ने साइबर अपराधों से संबंधित 14,064 से अधिक मामलों में राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) को अपनी सेवाएं प्रदान की हैं।
साइबर अपराध की शिकायतों से निपटने में परिचालन दक्षता को और अधिक बढ़ाने तथा एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए, मंत्रालय ने एनसीआरपी-सीएफसीएफआरएमएस के लिए एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। यह एसओपी, एनसीआरपी के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के आधार पर शिकायत पर कार्रवाई, बैंक के साथ समन्वय, शिकायत निवारण, लियन मार्किंग को हटाने और धोखाधड़ी से गंवाए गए पैसे को सही दावेदारों को लौटाने के लिए एक मानकीकृत ढांचा निर्धारित करती है। पीड़ितों को धोखाधड़ी का पैसा जल्दी लौटाने के लिए मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल और बैंक खातों को फ्रीज़ करने व राशि पर लियन मार्किंग लगाने से संबंधित शिकायतों के समय पर समाधान के लिए शिकायत निवारण मॉड्यूल अप्रैल 2026 से काम करने लगे हैं।
यह जानकारी गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।