फरीदाबाद में प्री-पेड टेलीग्राम टास्क और पार्ट-टाइम नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी, छह आरोपी गिरफ्तार

फरीदाबाद में पार्ट-टाइम नौकरी और ऑनलाइन कमाई का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ साइबर थाना सेंट्रल टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए सभी आरोपी ग्वालियर, मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं। आरोपियों की पहचान पृथ्वी (24), ओम सोनी (25), अंशुमन सैनी (21), कृष्णा पाण्डेय (22), विनय सिंह (20) और आशु (20) के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी पृथ्वी के बैंक खाते में ठगी की रकम की पहली लेयर के रूप में 50 हजार रुपये पहुंचे थे।
व्हाट्सऐप लिंक और गूगल मैप्स रेटिंग से हुई शुरुआत
पुलिस प्रवक्ता ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि सेक्टर-77 निवासी एक व्यक्ति ने पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता को उसके व्हाट्सऐप पर एक अंजान नंबर से लिंक भेजा गया था। इस लिंक के माध्यम से उसे पार्ट-टाइम काम करने का झांसा दिया गया था। पीड़ित को बताया गया कि वह गूगल मैप्स पर विभिन्न स्थानों की रेटिंग और कमेंट करके घर बैठे कमाई कर सकता है। ऑनलाइन काम और कमाई के लालच में आकर पीड़ित ने उस लिंक पर क्लिक कर दिया था। इसके बाद साइबर ठगों ने उसे एक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ लिया था।
प्री-पेड टास्क और निवेश के नाम पर ठगे 9 लाख 34 हजार रुपये
टेलीग्राम ग्रुप में साइबर ठगों ने पीड़ित को प्री-पेड टास्क पूरा करने के नाम पर अलग-अलग रकम जमा करने के लिए कहा था। शुरुआत में छोटे टास्क और निवेश के जरिए ठगों ने पीड़ित का विश्वास जीतने का प्रयास किया था। इसके बाद अधिक लाभ का लालच देकर पीड़ित से अलग-अलग ट्रांजेक्शन करवाए गए। पीड़ित ने आरोपियों के बताए बैंक खातों में विभिन्न ट्रांजेक्शन के माध्यम से जून व जुलाई 2025 में कुल 9 लाख 34 हजार रुपये निवेश कर दिए थे। रकम जमा कराने के बाद जब पीड़ित ने अपना पैसा वापस लेने का प्रयास किया तो उसे कोई रकम वापस नहीं मिली। इसके बाद उसे अपने साथ हुई साइबर ठगी का पता चला जिसकी शिकायत पर साइबर थाना सेंट्रल में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
चैन के जरिए आगे भेजे गए बैंक खाते और बरामदगी
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि बैंक खाता को चैन के माध्यम से आगे ठगों के पास भेजा गया था। आरोपी पृथ्वी मुख्य खाताधारक है जिसने अपना बैंक खाता ओम सोनी को उपलब्ध कराया था। इसके बाद ओम सोनी ने यह खाता अंशुमन सैनी को दिया, अंशुमन ने इसे कृष्णा पाण्डेय को उपलब्ध कराया, कृष्णा पाण्डेय ने आगे विनय सिंह को और विनय सिंह ने आशु को बैंक खाता उपलब्ध कराया। अंत में आशु ने उस बैंक खाते को आगे साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था। आरोपी पृथ्वी के बैंक खाते में ठगी की रकम की पहली लेयर के रूप में 50 हजार रुपये आए थे जिसके बाद रकम को आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर किया गया। सभी छह आरोपी 12वीं पास हैं और ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं जिन्होंने कथित तौर पर बैंक खाता को साइबर ठगों तक पहुंचाने का काम किया है। पुलिस द्वारा उनके कब्जे से बरामद तीन मोबाइल फोन की जांच की जा रही है।