फरीदाबाद: डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं, साइबर ठगों के झांसे में न आएं: हिमाद्री कौशिक

फरीदाबाद: डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं, साइबर ठगों के झांसे में न आएं: हिमाद्री कौशिक

साइबर ठग लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। ठग स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कस्टम, आयकर विभाग अथवा अन्य सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। इसके बाद वे लोगों को फोन या वीडियो कॉल करते हैं। पीडि़त को किसी अपराध में फंसाने, गिरफ्तारी होने या उसके नाम पर पार्सल मिलने व अन्य भय वाली बातें बोलकर भयभीत किया जाता है। पीडि़त व्यक्ति को वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी में रखकर डिजिटल अरेस्ट करने के बारे में कहा जाता है। साथ ही बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने का भी लगातार दबाव बनाया जाता है।

पुलिस उपायुक्त मुख्यालय का बयान

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पुलिस उपायुक्त मुख्यालय, हिमाद्री कौशिक ने गुरुवार को इस मामले में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भारत देश में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई भी कानूनी प्रक्रिया मौजूद नहीं है। कोई भी लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी किसी भी नागरिक को फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से कभी भी हिरासत में नहीं लेती है। न ही कोई एजेंसी किसी जांच या केस से बचाने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहती है। फरीदाबाद के साइबर ठगी के सामने आए मामलों से यह बात स्पष्ट हुई है। साइबर अपराधी सबसे पहले लोगों में अपना विश्वास बनाते हैं। उसके बाद डर, धमकी एवं मानसिक दबाव बनाकर उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं। साइबर अपराधियों का मुख्य उद्देश्य पीडि़त को इतना अधिक भयभीत करना होता है। इससे पीडि़त बिना सोचे-समझे उनकी बात मानने लगता है और अपनी मेहनत की कमाई हमेशा के लिए गंवा बैठता है।

बचाव और सावधानी के उपाय

यदि कोई भी व्यक्ति स्वयं को सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर बात करने के लिए कहे तो सावधान हो जाएं। मोबाइल की स्क्रीन शेयर करने, कोई भी ऐप डाउनलोड करने अथवा पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहने पर बिल्कुल भी घबराएं नहीं। तुरंत वह कॉल काट दें और अपने परिवार के किसी सदस्य या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी दें। इसके बाद तुरंत पुलिस से संपर्क करें। लोगों को जागरूक करते हुए उन्होंने कहा कि हमेशा याद रखें कि भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। पुलिस या किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम पर धमकी मिलने पर बिल्कुल भी घबराएं नहीं। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर वीडियो कॉल पर लगातार जुड़े न रहें। किसी के भी कहने पर स्क्रीन शेयरिंग अथवा रिमोट एक्सेस ऐप बिल्कुल डाउनलोड न करें। ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी, नेट बैंकिंग पासवर्ड अथवा अन्य किसी भी प्रकार की बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। गिरफ्तारी से बचाने, जांच बंद करने या खाता सुरक्षित करने के नाम पर किसी को भी पैसे ट्रांसफर न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल की स्थिति में हमेशा अपने स्तर पर संबंधित विभाग से आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करें। यदि ऐसी कोई भी कॉल आती है तो तुरंत कॉल काटकर इस घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को दें और अपने परिवार के सदस्यों को तुरंत अवगत कराएं।

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