फरीदाबाद में स्कूल फीस भरने की मन्नत लेकर कांवड़ यात्रा पर निकले चार मासूम भाई-बहन

Team Atal Hind11 August 20262 min read18 viewsफरीदाबाद
फरीदाबाद में स्कूल फीस भरने की मन्नत लेकर कांवड़ यात्रा पर निकले चार मासूम भाई-बहन

फरीदाबाद में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहाँ आर्थिक तंगी के चलते स्कूल फीस न भर पाने पर चार मासूम भाई-बहन कांवड़ यात्रा पर निकल पड़े हैं। कंधों पर कांवड़, पैरों में छाले और आंखों में पढ़ाई जारी रखने का सपना लिए ये बच्चे भगवान भोलेनाथ की शरण में हरिद्वार पहुंचे हैं। फरीदाबाद से गुजरते समय इन बच्चों ने अपनी व्यथा बताई कि आर्थिक तंगी के चलते स्कूल की फीस नहीं भर पाने पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। अब इन बच्चों को उम्मीद है कि भोलेनाथ उनकी पुकार सुनेंगे और उनकी पढ़ाई दोबारा शुरू हो सकेगी।

हरिद्वार से शुरू की पैदल कांवड़ यात्रा

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उत्तर प्रदेश के कोसी कलां क्षेत्र में बठैन गेट के पास रहने वाले इन चारों भाई-बहनों ने 30 जुलाई को हरिद्वार से गंगाजल लेकर पैदल कांवड़ यात्रा शुरू की। उनका कहना है कि वे भगवान शिव से सिर्फ एक ही प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी फीस भर जाए और उन्हें फिर से स्कूल में पढ़ने का मौका मिले। इन बच्चों की मां का नाम सुनीता और पिता का नाम भरत सिंह है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और माता-पिता दोनों दिव्यांग बताए गए हैं। इसी आर्थिक मजबूरी के कारण बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो सकी।

फीस न भरने के कारण स्कूल से निकाला

बच्चों के मुताबिक, फीस नहीं भरने के कारण उन्हें प्राइवेट स्कूल से निकाल दिया गया। चारों भाई-बहन अब अपनी पढ़ाई बचाने के लिए भगवान के दरबार में फरियाद लेकर निकले हैं। उनका विश्वास है कि भोलेनाथ उनकी मनोकामना पूरी करेंगे और उन्हें दोबारा किताबें-कॉपी लेकर स्कूल जाने का अवसर मिलेगा। इन चारों में सबसे छोटी सात वर्षीय प्रेरणा है, जो तीसरी कक्षा में पढ़ती है। इसके अलावा एक बच्चा शिवम सातवीं, एक नौवीं और बहन साधना 11वीं कक्षा में पढ़ती है

पढ़ाई के लिए भविष्य की बड़ी लड़ाई

जिस उम्र में बच्चों के हाथों में स्कूल बैग और किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में ये बच्चे कांवड़ उठाकर अपने घर की ओर पैदल बढ़ रहे हैं। इन मासूम कांवड़ियों के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि उनके भविष्य की लड़ाई भी है। उनके मन में एक ही उम्मीद है कि भगवान उनकी फीस भरवा दें, ताकि उनकी पढ़ाई बीच में न छूटे। बच्चों की मासूम आस्था देखकर लोगों की आंखें नम हो रही हैं, लेकिन उनकी कहानी एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है। जब शिक्षा को हर बच्चे का अधिकार माना जाता है और सरकार की ओर से बच्चों को पढ़ाने के लिए तमाम योजनाएं चलाई जाती हैं, तो आखिर ऐसे परिवारों के बच्चे फीस के लिए भगवान के दरबार में मन्नत मांगने को क्यों मजबूर हैं।

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