फरीदाबाद के धौज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के गेट पर महिला की डिलीवरी का मामला, स्वास्थ्य विभाग ने बनाई जांच कमेटी

फरीदाबाद के धौज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के गेट पर महिला की डिलीवरी का मामला, स्वास्थ्य विभाग ने बनाई जांच कमेटी

फरीदाबाद में गांव धौज स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यानी पीएचसी के मुख्य गेट पर एक महिला की डिलीवरी होने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए एक जांच कमेटी का गठन कर दिया है। डिप्टी सिविल सर्जन के नेतृत्व में इस पूरे मामले से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जाएगी। इस जांच के दौरान मुख्य रूप से यह पता लगाया जाएगा कि आखिर महिला को स्वास्थ्य केंद्र के बाहर प्रसव कराने की स्थिति क्यों बनी। इसके अलावा यह भी जांचा जाएगा कि उस समय पीएचसी का मुख्य गेट बंद क्यों था और मौके पर डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ की क्या स्थिति थी।

मुख्य सिविल सर्जन ने जारी किया था कारण बताओ नोटिस

यह पूरा मामला सामने आने के बाद मुख्य सिविल सर्जन डॉक्टर जयंत आहूजा ने धौज पीएचसी के एएसएमओ डॉक्टर राजेश को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के जरिए घटना के संबंध में पूरी जानकारी मांगी गई थी। नोटिस में मुख्य रूप से यह सवाल पूछे गए थे कि स्वास्थ्य केंद्र का मुख्य गेट बंद क्यों था और घटना के समय डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ मौके पर मौजूद क्यों नहीं थे। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया था कि महिला को स्वास्थ्य केंद्र के बाहर ही डिलीवरी कराने की विवशता कैसे पैदा हुई थी।

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मुख्य गेट पर ताला और नहीं मिला कोई स्वास्थ्यकर्मी

प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव धौज के रहने वाले मोसिम खान अपनी गर्भवती पत्नी नूरजहां खान को डिलीवरी के लिए 30 अगस्त को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। मोसिम के बताए अनुसार, उस समय पीएचसी के मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ था। उन्होंने आसपास डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को काफी तलाश किया, लेकिन वहां पर कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। इस दौरान महिला की प्रसव पीड़ा लगातार बढ़ती चली गई और काफी देर तक किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिलने के कारण महिला ने स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट के बाहर ही एक बच्चे को जन्म दे दिया।

चपरासी के आने के बाद खुला गेट और वार्ड में हुई भर्ती

परिजनों के अनुसार इतनी बड़ी घटना के बाद किसी तरह एक चपरासी को मौके पर बुलाया गया। उसी चपरासी के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्र का मुख्य गेट खुलवाया गया और फिर जच्चा-बच्चा को अंदर वार्ड में ले जाकर भर्ती कराया गया। मोसिम का यह भी बड़ा आरोप है कि अस्पताल में भर्ती कराने के बाद भी करीब एक घंटे तक नर्सिंग स्टाफ मौके पर नहीं पहुंचा था। काफी समय बीत जाने के बाद जब स्टाफ वहां पहुंचा, तब जाकर जच्चा और बच्चे की जांच और देखभाल का काम शुरू किया गया।

सेक्टर-3 प्रजनन केंद्र का पुराना मामला भी आया सामने

आपको बता दें कि कुछ महीने पहले सेक्टर-3 स्थित प्रजनन एवं स्वास्थ्य केंद्र में भी ठीक इसी प्रकार का मामला सामने आया था। उस समय भी परिजन गर्भवती महिला को डिलीवरी के लिए स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे, लेकिन उस केंद्र का गेट भी अंदर से बंद था और पूरे परिसर में अंधेरा छाया हुआ था। परिजन काफी देर तक लगातार दरवाजा खटखटाते रहे, लेकिन अंदर से किसी ने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद मजबूर होकर परिजनों ने टॉर्च की रोशनी में ही महिला की डिलीवरी कराई थी। इस घटना की शिकायत परिजनों द्वारा सीएमओ कार्यालय में की गई थी और जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अनुबंध पर सेवा दे रहे एक कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। हालांकि बाद में कर्मचारी यूनियन के दबाव और संबंधित कर्मचारी द्वारा माफी मांगने पर उसकी सेवाएं वापस बहाल कर दी गई थीं। अब धौज पीएचसी के इस ताज़ा मामले में जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा कि इस घटना के लिए असल जिम्मेदारी किसकी बनती है।

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