फरीदाबाद छात्रा आत्महत्या मामला: हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने अधिकारियों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

फरीदाबाद छात्रा आत्महत्या मामला: हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने अधिकारियों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

फरीदाबाद, 14 सितंबर: हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने फरीदाबाद के डबुआ-गाजीपुर रोड स्थित नवोदय विद्या निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल की कक्षा 11वीं की 16 वर्षीय छात्रा की दुखद मृत्यु के मामले में संज्ञान लिया है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत तथ्यात्मक एवं कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है। छात्रा ने एक सितंबर, 2026 को विद्यालय भवन की तीसरी मंजिल की छत से कथित रूप से छलांग लगा दी थी।

अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा तथा दोनों सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया को मिलाकर बनी पूर्ण पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि समाचार रिपोर्टों में लगाए गए आरोपों को इस स्तर पर स्थापित तथ्य नहीं माना जा रहा है। किसी भी व्यक्ति के दोषी अथवा निर्दोष होने के संबंध में पूर्व धारणा नहीं बनाई जानी चाहिए। हालांकि, आरोपों की गंभीर प्रकृति बच्चों की सुरक्षा, गरिमा, मानसिक स्वास्थ्य तथा शैक्षणिक संस्थानों में उनके मानव अधिकारों से संबंधित गंभीर प्रश्न उठाती है।

छात्रा पर लगाए गए थे गंभीर आरोप और दर्ज हुई एफआईआर

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समाचार रिपोर्टों के अनुसार, घटना से पहले छात्रा को एक अध्यापक द्वारा कथित रूप से दंडित किया गया था। छात्रा को कई घंटों तक धूप में खड़ा किए जाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, विद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों से पूरी तरह इनकार किया है। छात्रा के पिता की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य तथ्यों की जांच किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है.

कानून और नियमों के तहत शारीरिक दंड पर रोक

हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने कहा है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीडऩ का कोई स्थान नहीं है। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा बालकों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 में बच्चों को शारीरिक दंड एवं मानसिक उत्पीडऩ से संरक्षण प्रदान किया गया है। विशेष रूप से आरटीई अधिनियम की धारा 17 स्पष्ट रूप से किसी भी बालक को शारीरिक दंड अथवा मानसिक उत्पीडऩ दिए जाने पर रोक लगाती है।

यदि छात्रा को दंड के रूप में कई घंटों तक तेज धूप में खड़ा किए जाने का आरोप जांच में सत्य पाया जाता है, तो ऐसा आचरण वैध अनुशासन की श्रेणी में नहीं आएगा। इससे शारीरिक दंड, मानसिक उत्पीडऩ, अपमान तथा बच्चे की गरिमा और मनोवैज्ञानिक कल्याण के उल्लंघन से संबंधित गंभीर प्रश्न उत्पन्न होंगे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने हरियाणा सरकार के प्रधान सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग; निदेशक जनरल, माध्यमिक शिक्षा, हरियाणा; पुलिस आयुक्त, फरीदाबाद; उपायुक्त, फरीदाबाद; जिला शिक्षा अधिकारी, फरीदाबाद तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य/प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

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