फरीदाबाद में 20 साल से पानी की किल्लत पर मानवाधिकार आयोग सख्त, अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट

फरीदाबाद की अचीवर्स सोसाइटी (कालिंदी हिल), सेक्टर-49 के निवासियों को पिछले दो दशकों से पीने का पानी नहीं मिल रहा है। यह गंभीर मामला अब हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग के निशाने पर आ गया है। आयोग ने 500 परिवारों को 20 साल से सार्वजनिक जलापूर्ति न मिलने की शिकायत पर कड़ा संज्ञान लिया है।
निवासियों को मिले मुफ्त पानी के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने अंतरिम राहत के तौर पर निवासियों को सरकारी टैंकरों के जरिए नि:शुल्क और निर्बाध पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने फरीदाबाद नगर निगम आयुक्त और फरीदाबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एफएमडीए) के सीईओ को तलब किया है। इसके साथ ही अधिकारियों से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर, 2026 को तय की गई है।
पेयजल को बताया मानवाधिकार
सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने एक अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल केवल एक नागरिक सुविधा नहीं है। यह मानव जीवन, स्वास्थ्य और गरिमा का मूल आधार है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) के प्रस्ताव 64/292 का हवाला दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि 20 साल तक पानी से वंचित रखना संविधान के अनुच्छेद 21 यानी जीवन का अधिकार का सीधा उल्लंघन है।
सोसाइटी के निर्माण से लेकर अब तक की स्थिति
निवासियों ने आयोग को पूरी जानकारी दी है। सोसाइटी का निर्माण वर्ष 2004-05 में टीपी-3 योजना के तहत हुआ था। शुरुआत में बोरवेल से पानी मिला था। लेकिन समय के साथ बोरवेल पूरी तरह सूख गए। पिछले दो दशकों से सार्वजनिक नेटवर्क नहीं है। इस कारण 500 परिवार निजी टैंकरों से महंगा पानी खरीदने को मजबूर हैं। इससे इन परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल
आयोग ने इस बात पर भी कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने कहा कि 20 साल तक नेटवर्क न देना जांच का विषय है। यह जांच की जाएगी कि अधिकारियों ने अपनी कानूनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई। मानवाधिकार आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने स्पष्ट आदेश दिया है। जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक स्टॉप-गैप यानी अस्थायी व्यवस्था लागू रहेगी। इस अस्थायी व्यवस्था के तहत सोसाइटी में सरकारी टैंकरों से मुफ्त और निर्बाध पानी पहुंचाया जाएगा।