किसानों का दो टूक संदेश: मुख्यमंत्री के साथ बैठक का प्रस्ताव ठुकराया,

किसानों का दो टूक संदेश: CM नहीं, केंद्र से होगी बात----जगजीत सिंह डल्लेवाल
हरियाणा सरकार की ओर से मुख्यमंत्री के साथ बैठक के प्रस्ताव को संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने ठुकरा दिया।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ सीधी बातचीत होनी चाहिए।
हांसी में किसानों पर लाठीचार्ज और किसान नेता सुरेश कोथ की गिरफ्तारी को लेकर भी डल्लेवाल ने सरकार पर निशाना साधा।
नरेंद्र जेठी /नरवाना /16 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने हरियाणा सरकार की ओर से मुख्यमंत्री के साथ बैठक के प्रस्ताव को सिरे से ठुकरा दिया है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसानों के मुख्य मुद्दे केंद्र सरकार से जुड़े हुए हैं। इसलिए केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ सीधी बातचीत होनी चाहिए। उन्होंने हांसी में किसानों पर हुए लाठीचार्ज और किसान नेता सुरेश कोथ की गिरफ्तारी को लेकर भी हरियाणा सरकार पर तीखा निशाना साधा है।
खनौरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर पर किसानों को रोका
पंजाब के किसानों द्वारा दिल्ली कूच का ऐलान किए जाने के बाद रविवार को हरियाणा पुलिस ने खनौरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर पर किसानों को रोक दिया। रास्ते को पूरी तरह से बंद करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और साथ ही बैरिकेडिंग, कंटीली तार, कंक्रीट ब्लॉक और कंटेनर लगाए गए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में रविवार को बॉर्डर से दिल्ली के जंतर-मंतर तक ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ निकालने का बड़ा ऐलान किया था। इस तयशुदा जत्थे में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में कुल 55 पदयात्री शामिल हैं। इसके साथ ही संगठन ने आगामी 29 अगस्त को दिल्ली में एक बड़ी पंचायत आयोजित करने का भी ऐलान किया है।
जींद प्रशासन के साथ बैठक रही बेनतीजा
रविवार दोपहर को किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने 2024 के किसान आंदोलन के दौरान शुभकरण सिंह की मौत वाले स्थान से पवित्र मिट्टी उठाई। इसके बाद किसानों की जींद की डीसी वैशाली शर्मा के साथ दो दौर की महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। हालांकि इन बैठकों में कोई भी ठोस हल नहीं निकल पाया, जिसके बाद किसानों ने पंजाब की सीमा की तरफ ही धरना शुरू करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया। इससे पहले डल्लेवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि रास्ता खुद किसानों ने नहीं बल्कि हरियाणा पुलिस ने रोका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों को आगे नहीं जाने दिया गया तो वे रातभर इसी स्थान पर डटे रहेंगे। इस बीच पुलिस ने जींद, कैथल और फतेहाबाद में खनौरी बॉर्डर की तरफ जा रहे कई किसानों को हिरासत में भी ले लिया।
प्रशासन के साथ वार्ता के लिए पहुंचे प्रतिनिधि
किसानों की ओर से जींद प्रशासन के साथ गुप्त वार्ता शुरू की गई जिसमें बीकेयू एकता सिद्धपुर के राज्य सचिव काका सिंह कोटड़ा की अध्यक्षता में 5 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल डीसी जींद और एसपी जींद से मिलने पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल में पंजाब इंडियन फार्मर संगठन से गुरमेल सिंह, बीकेयू एकता सिद्धपुर राजस्थान के राज्य अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह पनी वाला, बलदेव सिंह सिरसा, किसान जवान भलाई यूनियन पंजाब के राज्य अध्यक्ष सुखदेव सिंह भोजराज और बीकेयू भैरो गुट के राज्य सचिव गुरमेल सिंह शामिल रहे। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि खनौरी बॉर्डर पर पुलिस लगातार अपनी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा रही है। किसान किसी भी प्रकार के टकराव के बिल्कुल पक्ष में नहीं हैं और पूरा जत्था पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाना चाहता है। अब यह पूरी तरह से सरकार पर निर्भर करता है कि वह वहां किस तरह का माहौल बनाती है।
सीमित संख्या में हैं जत्थे के किसान
डल्लेवाल ने कहा कि सरकार ने किसानों को रोककर यह साफ कर दिया है कि उसे किसानों की ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से नहीं बल्कि उनके बुनियादी मुद्दों से परेशानी है। इस जत्थे में बहुत ही सीमित संख्या में किसान शामिल हैं और न तो यहां कोई बहुत बड़ी भीड़ है और न ही बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मौजूद हैं। किसान लगातार सरकार के हर एक रवैये पर नजर बनाए हुए हैं और कभी अंबाला तो कभी चंडीगढ़ में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज किया जा रहा है। डल्लेवाल ने कहा कि सरकार ने शांतिपूर्वक पैदल यात्रा कर रहे किसानों को भी रोककर अपना असली चेहरा सबके सामने ला दिया है। उन्होंने कहा कि जब किसान धरने लगाते हैं तो सरकार उन्हें बदनाम करती है, लेकिन अब शांतिपूर्ण तरीके से जा रहे किसानों को रोकना भी पूरी तरह से गलत है।
शुभकरण सिंह का प्रसंग और बॉर्डर की स्थिति
शुभकरण सिंह पंजाब के बठिंडा जिले के बल्लो गांव के रहने वाले युवा किसान थे जो 2020-21 के मुख्य किसान आंदोलन में भी पूरी सक्रियता से शामिल रहे थे। फरवरी 2024 में एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत अन्य तमाम मांगों को लेकर किसानों के दिल्ली कूच के दौरान वह 13 फरवरी को खनौरी बॉर्डर पर पहुंचे थे। इसके बाद 21 फरवरी को किसानों और सुरक्षा बलों के बीच हुए टकराव के दौरान शुभकरण गंभीर रूप से घायल हो गए थे और पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। उनके पोस्टमॉर्टम के दौरान सिर में धातु के छर्रे पाए गए थे और उनकी मौत के बाद किसान संगठनों ने इसे आंदोलन के दौरान हुई हत्या बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई थी। इसके बाद 28 फरवरी को पंजाब पुलिस ने उनके पिता की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और 29 फरवरी को उनके पैतृक गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया। शुभकरण की मौत के बाद सभी किसान संगठनों ने उन्हें इस आंदोलन का शहीद माना और खनौरी बॉर्डर पर उनकी याद में एक विशेष शहीदी स्थल का निर्माण किया।