नरवाना के दाता सिंह वाला-खनोरी बॉर्डर पर किसानों का अर्धनग्न मार्च स्थगित, 4 सितंबर को होगी उच्च स्तरीय बैठक

पंजाब की सीमा के साथ लगते हरियाणा के नरवाना में दाता सिंहवाला-खनौरी बॉर्डर पर किसानों का अर्धनग्न मार्च स्थगित
किसानों और स्थानीय प्रशासन के बीच हुई वार्ता के बाद लिया गया निर्णय ।
प्रशासन ने किसानों को 4 सितंबर को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ उच्चस्तरीय बैठक कराने का दिया लिखित आश्वासन।
51 किसानों के जत्थे द्वारा प्रस्तावित पैदल मार्च और अर्धनग्न प्रदर्शन तत्काल प्रभाव से स्थगित-डल्लेवाल ।
नरवाना /19 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स /नरेंद्र जेठी
हरियाणा के जींद जिले के नरवाना इलाके में पंजाब की सीमा से सटे दाता सिंहवाला-खनौरी बॉर्डर पर किसानों का प्रस्तावित अर्धनग्न पैदल मार्च स्थगित कर दिया गया है। यह फैसला बुधवार को किसानों और स्थानीय प्रशासन के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया। प्रशासन ने किसानों को लिखित आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को लेकर 4 सितंबर को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ उच्चस्तरीय बैठक कराई जाएगी।
बुधवार सुबह नरवाना के एसडीएम जगदीश चंद्र और डीएसपी कमलदीप राणा के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारी किसान प्रतिनिधियों से मिले। बैठक में किसानों की लंबित मांगों और प्रस्तावित आंदोलन के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारीयों ने किसान नेताओं को भरोसा दिलाया कि उनकी बात केंद्र तक पहुंचाने के लिए 4 सितंबर की बैठक तय हो गई है।सहमति बनने के बाद एसडीएम और डीएसपी खुद बॉर्डर पर पंजाब की तरफ धरने पर बैठे किसानों के पास पहुंचे।
उन्होंने किसानों को बैठक के फैसले की जानकारी दी। इसके बाद किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने ऐलान किया कि 51 किसानों के जत्थे द्वारा प्रस्तावित पैदल मार्च और अर्धनग्न प्रदर्शन तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाता है।डल्लेवाल ने साफ कहा कि 4 सितंबर की बैठक के नतीजों के आधार पर ही आगे की रणनीति तय होगी। किसान नेताओं को उम्मीद है कि ऊर्जा मंत्री के साथ बातचीत के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री से भी जल्द मुलाकात हो सकती है। एसडीएम जगदीश चंद्र ने बताया कि वार्ता सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। उन्होंने कहा कि जैसे ही किसान बॉर्डर से वापस लौटना शुरू करेंगे, हरियाणा की तरफ लगाई गई बैरिकेडिंग हटा दी जाएगी। इससे आम लोगों और यातायात को राहत मिलेगी।इस मार्च की तैयारी कुछ दिन पहले शुरू हुई थी।
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में 16 अगस्त से ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ शुरू करने का ऐलान किया गया था। इसमें 51 मुख्य किसान पैदल चलने वाले थे और उनके साथ करीब 200 अन्य किसान सहयोग के लिए शामिल होने वाले थे। योजना थी कि यह पदयात्रा दाता सिंहवाला से शुरू होकर करीब 228 किलोमीटर तय करेगी और 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचेगी।

वहां किसान पंचायत भी रखने की योजना थी।किसानों की मुख्य मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी शामिल है। वे स्वामीनाथन आयोग के सी2 प्लस 50 प्रतिशत फॉर्मूले के आधार पर सभी फसलों की खरीद सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को बाहर रखने की मांग भी है। किसान कर्ज माफी, गन्ने के उचित मूल्य बढ़ाने और पिछले आंदोलनों में दर्ज मामलों को वापस लेने की बात भी कर रहे हैं।16 अगस्त को जब किसान खनौरी के गुरुद्वारे से बॉर्डर की तरफ रवाना हुए तो हरियाणा प्रशासन ने रास्ता बंद कर दिया। जींद पुलिस ने दाता सिंहवाला-खनौरी बॉर्डर पर कई लेयर की बैरिकेडिंग लगा दी। कंक्रीट के ब्लॉक, लोहे के बैरियर और कंटीले तार लगाए गए।
नरवाना नहर पुल के पास वाटर कैनन और दंगा नियंत्रण वाहन तैनात किए गए। भारी पुलिस बल लगा दिया गया। प्रशासन का कहना था कि किसानों के पास मार्च की अनुमति नहीं है।किसानों को हरियाणा में प्रवेश नहीं करने दिया गया। इसके बाद वे पंजाब की तरफ बॉर्डर पर ही धरना देने लगे। उन्होंने तंबू लगा लिए और सड़क के किनारे बैठ गए। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग-52 पर आवागमन प्रभावित हो गया। दिल्ली-पटियाला हाईवे पर जाम की स्थिति बन गई थी। वैकल्पिक रास्तों से गाड़ियां गुजर रही थीं।इससे पहले भी इस इलाके में किसान आंदोलन चला था। करीब 13 महीने तक शंभू और खनौरी बॉर्डर पर धरना चला था जो मार्च 2025 में पंजाब पुलिस द्वारा खाली करवाया गया था।
उस दौरान एक युवा किसान शुभकरण सिंह की मौत हो गई थी। इस बार के मार्च में किसान उनके शहीदी स्थल से मिट्टी लेकर दिल्ली ले जाने की योजना बना रहे थे। यह बात आंदोलन से जुड़े किसानों के लिए भावनात्मक महत्व रखती है।वार्ता के बाद स्थिति सामान्य होने लगी। प्रशासन ने बैरिकेडिंग हटानी शुरू कर दी। दिल्ली-पटियाला हाईवे पर आवागमन फिर से बहाल हो गया। एसडीएम ने कहा कि जैसे ही किसान लौटेंगे, सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सामान्य कर दी जाएगी। किसान नेता अभिमन्यु कोहांड ने भी बताया कि केंद्र से संदेश आया है और बैठक का न्योता मिला है इसलिए धरना स्थगित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर 4 सितंबर की बैठक में सकारात्मक नतीजा नहीं निकला तो फिर दिल्ली कूच की तैयारी की जाएगी।किसान संगठन लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार से बातचीत चाहते हैं। पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कई मुद्दे अभी भी लंबित हैं। इस बार स्थानीय प्रशासन की मध्यस्थता से केंद्रीय मंत्री से मुलाकात का रास्ता खुला है। मनोहर लाल खट्टर पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री हैं।
किसान नेताओं को उम्मीद है कि उनकी बात केंद्र तक सही तरीके से पहुंचेगी।बॉर्डर पर पिछले कुछ दिनों में सुरक्षा व्यवस्था बहुत कड़ी रही। पुलिस की टीमें लगातार निगरानी रख रही थीं। ड्रोन भी इस्तेमाल किए गए। प्रशासन का मकसद किसी भी अप्रिय घटना को रोकना था। वार्ता सफल होने से दोनों तरफ राहत की सांस ली गई है। आम लोगों को सड़क जाम से मुक्ति मिल गई है और किसानों को अपनी बात रखने का एक और मौका मिला है।
4 सितंबर की बैठक का नतीजा महत्वपूर्ण होगा। किसान नेता डल्लेवाल ने साफ कर दिया है कि बैठक के परिणाम देखकर ही आगे का फैसला लिया जाएगा। अगर मांगें पूरी होती दिखीं तो आंदोलन आगे नहीं बढ़ेगा। अगर बात नहीं बनी तो फिर नई रणनीति बनाई जाएगी। किसान संगठन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने पर जोर दे रहे हैं।इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण रही। एसडीएम और डीएसपी ने खुद बॉर्डर पर जाकर किसानों से बात की। लिखित आश्वासन देने से किसानों को भरोसा हुआ। इससे तनाव कम हुआ और मार्च स्थगित हो सका।
बैरिकेडिंग हटने के बाद इलाके में सामान्य स्थिति लौटने लगी है।किसान आंदोलन के इस नए अध्याय में नरवाना और खनौरी बॉर्डर फिर चर्चा में आ गए। पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों के किसान इस मुद्दे पर एकजुट दिखे। उनकी मांगें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एमएसपी की कानूनी गारंटी और व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दे लंबे समय से किसानों के एजेंडे में हैं।अभी के लिए आंदोलन स्थगित है लेकिन किसान सतर्क हैं। 4 सितंबर की बैठक का इंतजार है।
उस बैठक के बाद ही साफ होगा कि आगे क्या रास्ता अपनाया जाएगा। फिलहाल बॉर्डर पर शांति है और हाईवे खुला है। प्रशासन और किसान दोनों तरफ से संयम बनाए रखने की कोशिश जारी है।यह घटना दिखाती है कि बातचीत से कई मुद्दे सुलझ सकते हैं। स्थानीय अधिकारियों की सक्रियता और किसानों की सहमति से तनाव कम हुआ। अब सबकी नजर 4 सितंबर की उच्चस्तरीय बैठक पर टिकी हुई है।
उस बैठक में किसानों की मांगों पर चर्चा होने की उम्मीद है और संभव है कि आगे और बैठकें भी तय हों।नरवाना के इस फैसले से क्षेत्रीय स्तर पर राहत मिली है। आम नागरिकों को यातायात की सुविधा वापस मिली है। किसान नेता अपनी मांगों को लेकर केंद्र के साथ संवाद का रास्ता खुला देख रहे हैं। पूरी स्थिति पर नजर बनाए रखने की जरूरत है क्योंकि बैठक के नतीजे आंदोलन की दिशा तय करेंगे।