योगी आदित्यनाथ एआई वीडियो विवाद में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ एफआईआर की मांग

योगी आदित्यनाथ एआई वीडियो विवाद में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ एफआईआर की मांग

लखनऊ के सामाजिक कार्यकर्ता संजय शर्मा ने पुलिस आयुक्त, लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट को एक शिकायत पत्र भेजा है। इस शिकायत में उन्होंने प्रथम सूचना रिपोर्ट यानी एफआईआर दर्ज करने और एक विस्तृत जांच कराने की मांग की है। यह पूरा मामला उस एआई निर्मित वीडियो से जुड़ा हुआ है जिसे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 31 अगस्त को लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सार्वजनिक रूप से दिखाया था।

शिकायत का मुख्य केंद्र वह विवादित वीडियो है जिसमें डिजिटल तकनीक यानी एआई की मदद से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जैसे दिखने वाले एक व्यक्ति को चिलम पीते हुए दिखाया गया है। इस वीडियो में व्यंग्यात्मक और कथित तौर पर आपत्तिजनक दृश्य तथा गीत शामिल हैं। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस वीडियो को प्रदर्शित करते हुए कहा था कि यह वीडियो उन्हें किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भेजा या दिया गया था।

डिजिटल ट्रेल और फॉरेंसिक जांच की मांग

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संजय शर्मा की इस शिकायत में जांच एजेंसियों से यह पता लगाने की विशेष मांग की गई है कि आखिर यह वीडियो किसने तैयार किया था। इसके साथ ही यह भी जांच करने को कहा गया है कि इसे अखिलेश यादव तक किसने पहुंचाया, किस माध्यम से इसका प्रसारण किया गया तथा इसके सार्वजनिक प्रदर्शन और बाद में इसके प्रसार की अनुमति किसने दी थी।

शिकायत का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की मांग करना है। शर्मा ने पुलिस से वीडियो बनाने में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर या प्लेटफॉर्म की पहचान करने का अनुरोध किया है। उन्होंने मूल वीडियो फाइल और उससे जुड़े मेटाडाटा को सुरक्षित रखने, संबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच करने तथा वीडियो के निर्माता से लेकर उसके सार्वजनिक प्रदर्शन तक की पूरी डिजिटल कड़ी का पता लगाने की अपील की है।

धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और कानूनी धाराएं

संजय शर्मा भारत में एक प्रमुख कानूनी अधिकार, मानवाधिकार, आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। सामाजिक कार्यों के बीच उन्हें उनके उपनाम बंटी के नाम से भी जाना जाता है और वह समाज में अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रसिद्ध हैं।

अपनी शिकायत में संजय शर्मा ने कहा है कि इस तरह के चित्रण से उनकी धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उनका तर्क है कि यह मामला केवल राजनीतिक व्यंग्य तक सीमित नहीं है क्योंकि योगी आदित्यनाथ सार्वजनिक रूप से गोरखनाथ मठ और हिंदू मठ परंपरा से भी जुड़े हुए हैं।

यह शिकायत मुख्य रूप से भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 299 का हवाला देती है, जो शब्दों, दृश्य प्रस्तुतियों या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के जानबूझकर किए गए दुर्भावनापूर्ण कृत्यों को अपराध मानती है। इसके अलावा शर्मा ने धाराओं 196, 353 और 356 के तहत भी जांच का अनुरोध किया है जिसमें धारा 356 मानहानि से संबंधित है।

पुलिस से सबूत सुरक्षित रखने की अपील

शर्मा ने पुलिस से यह भी अनुरोध किया है कि वे अखिलेश कॉन्फ्रेंस में शामिल अन्य लोगों के बयान दर्ज करें। उन्होंने यह भी मांग की है कि सीसीटीवी और ऑडियो-विजुअल रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए ताकि वीडियो के निर्माता और वितरकों की पहचान की जा सके और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट होने या बदलने से बचाया जा सके। संजय शर्मा के लिए यह पूरा मुद्दा जवाबदेही तय करने का है।

उनकी यह शिकायत इस विवाद को केवल राजनीतिक बयानों से हटाकर एक साक्ष्य-आधारित कानूनी जांच की ओर ले जाने का प्रयास करती है। इसमें जांचकर्ताओं से यह निर्धारित करने को कहा गया है कि न केवल किसने वीडियो दिखाया, बल्कि किसने इसे बनाया, किसने इसकी आपूर्ति की, किसने इसका प्रसारण किया और किसने इसके प्रसार को अधिकृत किया। इस शिकायत पर पुलिस की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह मामला औपचारिक आपराधिक जांच की तरफ बढ़ता है या नहीं।

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