तरावड़ी के नरसिंह दास पब्लिक स्कूल में धूमधाम से मनाया गया गणेश उत्सव, शिक्षिका सविता जांगड़ा ने हिंदी के महत्व पर दिए विचार

तरावड़ी के नरसिंह दास पब्लिक स्कूल में गणेश उत्सव का पर्व बहुत श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय में भगवान गणेश की प्रतिमा का विधि-विधान से स्नान करवाकर एवं फूलों से आकर्षक श्रृंगार करने के साथ हुई। इस उपरांत शिक्षक एवं गैर-शिक्षक वर्ग ने सामूहिक रूप से विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती की। इस दौरान अध्यापक अमित शर्मा ने भगवान गणेश की महिमा से जुड़े सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों की मधुर धुनों से पूरा विद्यालय परिसर भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।
विद्यालय में गूंजे गणपति बप्पा के जयकारे
विद्यालय संरक्षक मधु गुप्ता ने सभी को गणेश उत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान गणेश से विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य, सुख-समृद्धि एवं सफलता की कामना की। विद्यालय निदेशक धर्मेंद्र खेड़ा ने कहा कि भगवान गणेश बुद्धि, ज्ञान और विवेक के प्रतीक हैं। उन्हें विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। हमें भगवान गणेश के आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए। हमें अपने जीवन में ज्ञान, अनुशासन, सकारात्मक सोच और अच्छे संस्कारों को अपनाना चाहिए। उन्होंने सभी के सुख-समृद्धि के साथ विद्यालय की निरंतर उन्नति की कामना की। कार्यक्रम के समापन पर भगवान गणपति को मोदक एवं पेड़े का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद उपस्थित सभी लोगों में प्रसाद वितरित किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना रहा। इस अवसर पर अध्यापिका पूजा, मीनू, शिखा, रीटा, शैलजा, हिमांशी, तनु तथा दिनेश राणा सहित विद्यालय का शिक्षक एवं गैर-शिक्षक स्टाफ मुख्य रूप से उपस्थित रहा।
हिंदी हमारी संस्कृति और संस्कारों की पहचान है
तरावड़ी में हिंदी दिवस के अवसर पर शिक्षिका सविता जांगड़ा ने हिंदी के महत्व और वर्तमान समय में इसकी बढ़ती उपयोगिता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति, संस्कारों और भावनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। यह केवल संवाद की भाषा नहीं है। यह देश की विविधता को एक सूत्र में पिरोने वाली भाषा है। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस मनाकर हम हिंदी भाषा के महत्व, गौरव और समृद्ध विरासत को याद करते हैं। हिंदी ने सदियों से देश के अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डिजिटल युग में तेजी से बढ़ रहा है हिंदी का प्रभाव
सविता जांगड़ा ने कहा कि आज के डिजिटल युग में हिंदी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इंटरनेट, सोशल मीडिया, मोबाइल एप्लीकेशन और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी का प्रयोग लगातार बढ़ रहा है। हिंदी अब केवल किताबों, पत्र-पत्रिकाओं और अखबारों तक सीमित नहीं रही है। यह आधुनिक तकनीक और डिजिटल संचार का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि जरूरत इस बात की है कि हिंदी को केवल हिंदी दिवस तक सीमित न रखा जाए। दैनिक जीवन, शिक्षा, प्रशासन और कार्यक्षेत्र में भी हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। देश की अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान करते हुए हिंदी को आपसी संवाद और एकता को मजबूत करने वाली भाषा के रूप में आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी का सम्मान तभी सार्थक होगा, जब हिंदी हमारे व्यवहार और विचारों का हिस्सा बने। नई पीढ़ी को हिंदी की समृद्ध विरासत से जोड़ने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के माध्यम से हिंदी को और अधिक सशक्त एवं लोकप्रिय बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे हिंदी भाषा के प्रति गर्व की भावना रखें। उन्हें इसका अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए और तकनीक के इस दौर में हिंदी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।