जाखल क्षेत्र में घग्गर नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी, गुहला-चीका और खनौरी में कमी से मिली राहत

जाखल क्षेत्र में  घग्गर नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी, गुहला-चीका और खनौरी में कमी से मिली राहत

घग्गर के जलस्तर में उतार-चढ़ाव: गुहला-चीका और खनौरी में कमी से राहत, चांदपुरा साइफन पर बहाव स्थिर

योगेश खनेजा/जाखल मंडी /22 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

जाखल क्षेत्र में घग्गर नदी के जलस्तर को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही निगरानी के बीच अब राहत की स्थिति सामने आई है। शिवालिक क्षेत्र और मैदानी इलाकों में हुई बारिश के बाद नदी में पानी का बहाव बढ़ा था, लेकिन प्रमुख हेडों पर अब पानी कम होने लगा है। खास तौर पर गुहला-चीका और खनौरी हेड पर बहाव में कमी दर्ज की गई है।

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फतेहाबाद जिले के जाखल क्षेत्र में स्थित चांदपुरा साइफन पर भी पानी के बहाव में मामूली बढ़ोतरी के बाद स्थिति स्थिर बताई जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार शनिवार सुबह यहां करीब 3,750 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया। सिंचाई विभाग और प्रशासन की ओर से नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।

पिछले दिनों पहाड़ी इलाकों में बारिश के कारण घग्गर नदी में पानी की आवक बढ़ी थी। इसका असर पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों में दिखाई दिया। घग्गर का जलस्तर मौसम और ऊपरी कैचमेंट क्षेत्र में होने वाली बारिश के हिसाब से तेजी से बदल सकता है। 19 अगस्त को कैचमेंट क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद घग्गर और टांगरी के जलस्तर में बढ़ोतरी की भी रिपोर्ट सामने आई थी।

चांदपुरा साइफन पर 3,750 क्यूसेक पानी

जाखल के चांदपुरा साइफन पर शुक्रवार सुबह पानी का बहाव करीब 3,150 क्यूसेक था। शाम तक इसमें बढ़ोतरी हुई और बहाव 3,550 क्यूसेक दर्ज किया गया। शनिवार सुबह पानी का बहाव बढ़कर लगभग 3,750 क्यूसेक तक पहुंच गया।

इसके बाद दिनभर स्थिति में कोई बड़ी बढ़ोतरी दर्ज नहीं हुई। इस कारण स्थानीय स्तर पर भी फिलहाल राहत की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन की प्राथमिकता यह है कि अगर ऊपरी क्षेत्रों में दोबारा तेज बारिश होती है तो पानी की आवक बढ़ने से पहले ही जरूरी इंतजाम किए जा सकें।

पिछले वर्षों के आंकड़े भी बताते हैं कि चांदपुरा साइफन पर पानी की मात्रा बारिश के साथ तेजी से बदल सकती है। अगस्त 2025 में यहां पानी 12,500 क्यूसेक तक पहुंचा था, जबकि उस समय प्रशासन ने साइफन और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी थी।

खनौरी हेड पर लगातार कमी

पंजाब के खनौरी हेड पर भी पानी का बहाव घटा है। शुक्रवार सुबह यहां करीब 5,788 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया था। शाम को यह बढ़कर 6,075 क्यूसेक हुआ, लेकिन शनिवार सुबह इसमें कमी आ गई।

शनिवार सुबह खनौरी हेड पर पानी का बहाव करीब 5,310 क्यूसेक दर्ज किया गया। शाम की रिपोर्ट में यह और घटकर लगभग 4,497 क्यूसेक रह गया। यह कमी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि खनौरी और गुहला-चीका क्षेत्र में पानी की स्थिति का असर आगे नदी के बहाव पर भी पड़ता है।

घग्गर नदी के जलस्तर की निगरानी में अलग-अलग गेज और हेड की रिपोर्ट को एक साथ देखा जाता है। केंद्रीय जल आयोग के जलस्तर निगरानी तंत्र में भी नदियों के जलस्तर और बहाव की नियमित निगरानी के लिए टेलीमेट्री आधारित आंकड़े उपलब्ध कराए जाते हैं।

गुहला-चीका में भी पानी कम हुआ

कैथल के गुहला-चीका हेड पर पानी की मात्रा में भी अच्छी कमी दर्ज की गई है। शुक्रवार सुबह यहां करीब 21,560 क्यूसेक पानी था। शाम तक यह घटकर 17,556 क्यूसेक रह गया।

शनिवार सुबह पानी का बहाव और कम होकर करीब 14,784 क्यूसेक दर्ज किया गया। शाम की रिपोर्ट में यह करीब 12,782 क्यूसेक रह गया। लगातार कमी का मतलब यह है कि फिलहाल ऊपरी हिस्से से पानी की आवक में दबाव पहले की तुलना में कम है।

गुहला-चीका का गेज घग्गर नदी की निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका कारण यह है कि टांगरी और मारकंडा जैसी नदियों का पानी आगे घग्गर में शामिल होता है। पुराने जलप्रवाह संबंधी रिकॉर्ड में भी गुहला-चीका के स्तर को नीचे के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।

प्रशासन की नजर हर गतिविधि पर

पानी का बहाव फिलहाल नियंत्रण में होने के बावजूद प्रशासन इसे सामान्य मानकर निगरानी में ढील नहीं दे रहा है। नदी के फाटकों और पानी की निकासी वाले स्थानों पर जलकुंभी, पहाड़ी कचरे और अन्य सामग्री जमा होने से बहाव प्रभावित होने की आशंका रहती है।

इसी वजह से सिंचाई विभाग के कर्मचारी सफाई और निरीक्षण का काम जारी रखे हुए हैं। अधिकारियों की कोशिश है कि पानी की निकासी में किसी तरह की रुकावट पैदा न हो। रात के समय भी संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

अगस्त की शुरुआत में भी जाखल के चांदपुरा साइफन पर जलप्रवाह बढ़ने के बाद प्रशासन ने निगरानी तेज की थी। उस समय विभाग ने स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की थी।

किसानों को बांधों पर नजर रखने की सलाह

घग्गर नदी के आसपास रहने वाले किसानों के लिए जलस्तर में होने वाला बदलाव सीधे तौर पर महत्वपूर्ण है। नदी के किनारे खेत होने के कारण अचानक पानी बढ़ने पर फसलों और खेतों तक पानी पहुंचने का खतरा पैदा हो सकता है।

इसी कारण तटीय गांवों के किसानों को अपने खेतों के बांधों और नदी के किनारों पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। किसानों से कहा गया है कि अगर कहीं पानी का रिसाव, कटाव या बांध कमजोर होने जैसी स्थिति दिखाई देती है तो तुरंत संबंधित विभाग को जानकारी दें।

हालांकि अभी चांदपुरा साइफन पर दर्ज 3,750 क्यूसेक का बहाव स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सुरक्षित वहन क्षमता के मुकाबले काफी कम बताया जा रहा है। इसलिए वर्तमान आंकड़ों के आधार पर तत्काल बाढ़ जैसी स्थिति नहीं दिखाई दे रही है।

बारिश पर निर्भर करेगी आगे की स्थिति

घग्गर नदी का जलस्तर स्थिर रहने के बावजूद आने वाले दिनों की स्थिति काफी हद तक पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगी। अगर शिवालिक और ऊपरी कैचमेंट में दोबारा तेज बारिश होती है तो नदी में पानी की आवक फिर बढ़ सकती है।

इसके उलट अगर बारिश में कमी रहती है तो गुहला-चीका, खनौरी और चांदपुरा जैसे प्रमुख स्थानों पर पानी का स्तर और नीचे आने की संभावना रहती है। इसलिए प्रशासन के लिए केवल मौजूदा जलस्तर देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऊपर के क्षेत्रों की बारिश और वहां से आने वाले पानी की भी लगातार निगरानी जरूरी है।

हालिया रिपोर्टों में भी कैचमेंट क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद घग्गर और टांगरी में पानी बढ़ने की जानकारी सामने आई थी। इससे यह साफ है कि नदी के जलस्तर में अचानक बदलाव स्थानीय बारिश के अलावा ऊपरी क्षेत्रों में होने वाली बारिश से भी हो सकता है।

फिलहाल राहत, लेकिन निगरानी जारी

मौजूदा आंकड़ों को देखें तो घग्गर नदी के प्रमुख स्थानों पर स्थिति पहले की तुलना में राहत वाली है। गुहला-चीका और खनौरी हेड पर पानी का बहाव घटा है, जबकि चांदपुरा साइफन पर मामूली बढ़ोतरी के बाद पानी का बहाव स्थिर बना हुआ है।

प्रशासन और सिंचाई विभाग की निगरानी इसलिए जारी है ताकि मौसम में बदलाव या पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश होने पर समय रहते कदम उठाए जा सकें। नदी के आसपास रहने वाले लोगों और किसानों को भी सतर्क रहने के साथ केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की सलाह दी गई है।

फिलहाल जाखल के चांदपुरा साइफन पर 3,750 क्यूसेक का बहाव नियंत्रण में बताया जा रहा है। आने वाले दिनों में घग्गर नदी की स्थिति मुख्य रूप से बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी पर निर्भर करेगी। इसलिए जलस्तर में कमी के बावजूद प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था जारी रखी है।

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