हिसार जीजेयू में एआई और डिजिटल तकनीक पर यूजीसी पाठ्यक्रम शुरू, 17 राज्यों के 90 शिक्षक ले रहे भाग

हिसार जीजेयू में एआई और डिजिटल तकनीक पर यूजीसी पाठ्यक्रम शुरू, 17 राज्यों के 90 शिक्षक ले रहे भाग

हिसार में जीजेयू विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की ओर से दो-सप्ताह के ऑनलाइन अंतरविषयी पुनश्चर्या पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम इमर्जिंग एजुकेशनल टेक्नोलॉजीज, ई-कंटेंट डवलपमेंट एंड एआई-इनेबल्ड टीचिंग एंड रिसर्च विषय पर आयोजित किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम में देश के 17 राज्यों के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों से कुल 90 शिक्षक भाग ले रहे हैं। यह ऑनलाइन पाठ्यक्रम आगामी 23 सितंबर तक चलेगा।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों का विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार इस्तेमाल उच्च शिक्षा में शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा दे सकता है। बदलती तकनीक के दौर में शिक्षकों का अपडेट रहना बहुत जरूरी है। केवल एक अपडेट शिक्षक ही विद्यार्थियों को भविष्य की सभी चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार कर सकता है। यह बात गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजय कुमार ने शुक्रवार को इस पाठ्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर कही।

कुलपति प्रो. विजय कुमार का बयान

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कुलपति प्रो. विजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि नई तकनीकों के साथ-साथ कई नई चुनौतियां भी लगातार सामने आ रही हैं। इसलिए शिक्षकों की यह मुख्य जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को तकनीक के सही और जिम्मेदार इस्तेमाल के बारे में जागरूक करें। उन्होंने सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे नई तकनीक अपनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों में नैतिक एवं मानवीय मूल्यों, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन और अकादमिक नैतिकता को भी बढ़ावा दें।

कुलसचिव और एमएमटीटीसी निदेशक के विचार

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने कहा कि इस बदलते शैक्षणिक परिदृश्य में शिक्षकों का निरंतर व्यावसायिक विकास होना बहुत जरूरी है। उन्होंने एमएमटीटीसी की इस पहल की पूरी तरह सराहना की और सभी प्रतिभागियों से इसका अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। वहीं दूसरी और एमएमटीटीसी के निदेशक डॉ. जय भगवान यादव ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती शैक्षणिक तकनीकें उच्च शिक्षा का स्वरूप बहुत तेजी से बदल रही हैं। इनका इस्तेमाल केवल तकनीकी दक्षता बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए। इनका इस्तेमाल शिक्षण को अधिक प्रभावी, रचनात्मक, समावेशी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए किया जाना चाहिए।

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