दुनिया भर में अनाथ बच्चों की तादाद लगभग 14 करोड़ से अधिक हो गई है। इन यतीम बच्चों में से युद्ध, सशस्त्र संघर्ष और प्राकृतिक आपदाओं की वजह से प्रभावित हुए बच्चे शामिल हैं। दुनिया भर के लगभग 14 करोड़ से अधिक यह अनाथ बच्चे वह हैं जिनके माता या पिता दोनों में से किसी एक या दोनों का साया किसी भी कारण से सिर पर नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया के संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में करोड़ों बच्चे रहते हैं। अकेले युद्ध या आपदाओं के कारण संकट झेलने वाले और माता-पिता को खोने वाले बच्चों का आंकड़ा 14 करोड़ के आसपास है। एशिया में लगभग 6.1 करोड़, अफ़्रीका में लगभग 5.2 करोड़, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में लगभग 1 करोड़, पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में लगभग 73 लाख है। भारत में भी अनाथ बच्चों का संकट भयावह है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के अनुसार, भारत में 29.6 मिलियन से अधिक बच्चे सड़कों पर जीवन यापन कर रहे हैं।
अनाथालय परित्यक्त बच्चों से भरे पड़े हैं और लाखों बच्चे सड़कों पर भटकते हुए किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहे हैं। भारत में अनुमानित रूप से लगभग 2.5 से 3 करोड़ अनाथ और बेसहारा बच्चे हैं। इन बच्चों के अनाथ होने और परिवारों से बिछड़ने के मुख्य कारणों में अत्यधिक गरीबी, माता-पिता की असामयिक मृत्यु, गंभीर बीमारियां या महामारी, घरेलू कलह, माता-पिता का अलगाव, तलाक और बच्चों को लावारिस छोड़ देना शामिल है। संसाधनों की कमी और आर्थिक तंगी के कारण कई परिवार बच्चों का पालन-पोषण करने में असमर्थ हो जाते हैं। एचआईवी/एड्स, कोविड-19 जैसी महामारियों और अन्य घातक बीमारियों के कारण कम उम्र में माता-पिता का निधन हो जाता है। सामाजिक दबाव, अनचाही संतान या गरीबी के चलते कई नवजात शिशुओं को सड़कों या कचरे के डिप्पों में छोड़ दिया जाता है। घरेलू हिंसा, माता-पिता का तलाक या आपसी विवाद के कारण भी बच्चे अनाथ जीवन भोगने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
यूनिसेफ के मुताबिक, दुनिया के लगभग एक चौथाई बच्चे संघर्ष या आपदाग्रस्त देशों में रहते हैं। वर्तमान में 46 करोड़ से अधिक बच्चे सूडान, यूक्रेन, म्यांमार, फिलिस्तीन जैसे देशों में संघर्ष क्षेत्रों में रह रहे हैं या वहां से भाग रहे हैं। हर साल छह जनवरी को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व युद्ध अनाथ दिवस पर उनके जीवन को फिर से बनाने में मदद करने और यह सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक समर्थन का आह्वान किया जाता है कि उन्हें वह देखभाल और अधिकार मिलें जिसके वे हकदार हैं। 95 प्रतिशत मामलों में सभी अनाथ बच्चे पांच साल से अधिक उम्र के होते हैं। युद्ध, प्राकृतिक आपदा, गरीबी, बीमारी, सामाजिक कलंक और चिकित्सा संबंधी जरूरतों के कारण प्रतिदिन लगभग 5700 बच्चे अनाथ हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2017 में 5 वर्ष से कम आयु के 15,000 बच्चों की प्रतिदिन मृत्यु हुई। हर साल 250,000 बच्चों को गोद लिया जाता है, लेकिन 14,050,000 अनाथ बच्चे बिना किसी प्यार भरे परिवार का हिस्सा बने ही अनाथालय से बाहर हो जाते हैं।