गुरुग्राम के डीएलएफ फेज 3 में 2000 से ज्यादा मकान मालिक डीटीसीपी की कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में

गुरुग्राम के डीएलएफ फेज 3 में 2000 से ज्यादा मकान मालिक डीटीसीपी की कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में

गुरुग्राम के यू ब्लॉक, डीएलएफ फेज 3 में दो हजार से अधिक मकान मालिक डिपार्टमेंट ऑफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग यानी डीटीसीपी की एनफोर्समेंट ड्राइव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। ये सभी लोग कथित बिल्डिंग उल्लंघनों पर अपनाई जा रही एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट में चुनौती देने जा रहे हैं।

डीटीसीपी की डिमोलिशन और सीलिंग कार्रवाई

डिपार्टमेंट ऑफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग यानी डीटीसीपी ने इलाके में डिमोलिशन और सीलिंग ऑपरेशन तेज कर दिए हैं। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद यह कार्रवाई की जा रही है। इस दौरान कुल 1,362 दर्ज उल्लंघनों को निशाना बनाया जा रहा है। इन उल्लंघनों में स्टिल्ट कंस्ट्रक्शन, ज़ोनिंग उल्लंघन और अनाधिकृत पेइंग गेस्ट यानी पीजी सुविधाओं का संचालन शामिल है। इसके अलावा चार अगस्त 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह भी निर्देश दिया गया था कि जहां आवश्यक हो, वहां अथॉरिटीज एक्टिव एनफोर्समेंट जैसे सीलिंग या डिमोलिशन का प्रदर्शन करें।

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निवासियों की मांग और कानूनी परामर्श

रेजिडेंट्स का तर्क है कि प्रॉपर्टी के बीच उल्लंघनों की प्रकृति काफी अलग-अलग होती है। वे हरियाणा सरकार से अनुरोध कर रहे हैं कि ठीक किए जा सकने वाले स्ट्रक्चर्स को नियमित यानी रेगुलर करने के लिए एक प्रैक्टिकल पॉलिसी लागू की जाए। कई मकान मालिक 16.5 मीटर की ऊंचाई सीमा का पालन करने के लिए अपनी बिल्डिंग में बदलाव करने को तैयार हैं। रेजिडेंट्स कुलदीप यादव और ईश्वर यादव इस समय साइट-स्पेशल असेसमेंट की वकालत करने के लिए कानूनी परामर्श की सुविधा दे रहे हैं। वहीं, पेटिशनर समीर पुरी इससे पहले डीएलएफ फेज 3 में बड़े पैमाने पर अनाधिकृत निर्माण के मुद्दे को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के सामने ला चुके हैं।

डीटीसीपी का आधिकारिक बयान

रेजिडेंट्स की चिंताओं का जवाब देते हुए, एक सीनियर डीटीसीपी अधिकारी ने कहा है कि एनफोर्समेंट एक्शन किसी जनरलाइज्ड फ्लोर-काउंट पॉलिसी के बजाय स्वीकृत बिल्डिंग प्लान और स्थापित मानदंडों से किए गए विचलन पर आधारित हैं। विभाग का कहना है कि वह उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहा है। इसके साथ ही प्रॉपर्टी मालिकों के पास अपनी व्यक्तिगत आपत्तियां दर्ज कराने के लिए सक्षम अधिकारियों या अदालतों का दरवाजा खटखटाने का अधिकार सुरक्षित है।

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