गुरु रविदास समिति पर हरियाणा में सियासी घमासान: क्या बोले सांसद?

संत शिरोमणि गुरु रविदास के 650वें प्रकाशोत्सव पर हरियाणा में सियासत तेज, समरसता समिति के गठन को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
समरसता का शब्द कितना प्यारा लगता है। बराबरी, भाईचारा और सबको साथ लेकर चलने का भाव। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की पूरी शिक्षा इसी भाव पर टिकी है। वे कहते थे कि इंसानियत सबसे ऊपर है। जाति-पाति के भेदभाव से ऊपर उठो। हरियाणा सरकार ने उनके 650वें प्रकाशोत्सव को मनाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। नाम रखा गया श्री गुरु रविदास जी समरसता संकल्प अभियान। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी खुद इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। कागजों पर सब कुछ सही लगता है। वाराणसी से पवित्र मिट्टी लाई गई। कलश यात्रा निकाली गई। गांव-गांव पहुंचाने का वादा किया गया। उमरी में भव्य धाम बनाने की घोषणा हुई। फरवरी 2027 तक कार्यक्रम चलेंगे। लेकिन जब समिति की सूची सामने आई तो सवाल अपने आप खड़े हो गए।
चंडीगढ़ /02 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाशोत्सव को भव्य रूप से मनाने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा गठित 'समरसता संकल्प समिति' को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी और विपक्षी नेताओं ने इस सरकारी समिति के स्वरूप पर सवाल उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तीखे हमले बोले हैं। अंबाला से कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी ने मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी को पत्र लिखकर समिति की मंशा और उसके गठन की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।
सांसद वरुण चौधरी का कहना है कि जिस संत ने जीवन भर समाज को एकता, समानता और भेदभाव मुक्त समाज का संदेश दिया, उनके नाम पर बनाई गई समिति में ही समरसता का अभाव दिख रहा है। सरकार द्वारा जारी 88 सदस्यीय इस राज्य स्तरीय समिति में केवल भाजपा के मंत्रियों, वर्तमान एवं पूर्व सांसदों, विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों को ही स्थान दिया गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकारी खजाने के खर्च पर संत रविदास जी के पवित्र नाम के आड़ में सत्तारूढ़ दल का राजनीतिक प्रचार किया जा रहा है।
क्या है पूरा विवाद और समिति का ढांचा?
हरियाणा सरकार के सूचना, लोक संपर्क एवं भाषा विभाग द्वारा 5 अगस्त 2026 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया था। इस आदेश के तहत "श्री गुरु रविदास जी समरसता संकल्प अभियान" के क्रियान्वयन और देखरेख के लिए मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी की अध्यक्षता में 88 सदस्यीय राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया। समिति में पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद मनोहर लाल खट्टर को उपाध्यक्ष तथा कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार व कृष्ण कुमार बेदी को संयोजक बनाया गया है।


इसके अलावा समिति में विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, कैबिनेट मंत्री अनिल विज, राव नरबीर सिंह, महिपाल ढांडा, विपुल गोयल, डॉ. अरविंद कुमार शर्मा, श्याम सिंह राणा, रणबीर गंगवा, श्रुति चौधरी, आरती सिंह राव और राज्य मंत्री राजेश नागर व गौरव गौतम सहित पूरी राज्य सरकार को शामिल किया गया है। सांसदों में कृष्ण पाल गुर्जर, राव इंद्रजीत सिंह, धर्मबीर सिंह, नवीन जिंदल, सुभाष बराला, संजय भाटिया, कार्तिकेय शर्मा और रेखा शर्मा जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
समिति के बाकी सदस्यों में भाजपा के दर्जनों विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, नगर निगमों व जिला परिषदों के अध्यक्ष और भाजपा के जिलाध्यक्षों को शामिल किया गया है। इसी सूची को आधार बनाते हुए विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
सांसद वरुण चौधरी ने पत्र में क्या कहा?


अंबाला लोकसभा क्षेत्र से सांसद वरुण चौधरी ने मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी को भेजे अपने पत्र में लिखा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती का आयोजन उनके महान विचारों और शिक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए। गुरु रविदास जी ने हमेशा एक सुखी, स्वस्थ और समरस समाज की कल्पना की थी, जहां किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।
सांसद ने पत्र में आरोप लगाया कि 5 अगस्त को गठित यह समिति एकतरफा और विभाजनकारी सोच को दर्शाती है। इसमें केवल एक राजनीतिक दल (भाजपा) के लोगों को जगह देना गुरु जी के "समानता" और "समरसता" के मूल सिद्धांतों के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे (सरकारी खर्च) से किसी एक राजनीतिक पार्टी का हित साधना पूरी तरह से गैर-संवैधानिक और अनुचित है।
वरुण चौधरी ने मुख्यमंत्री से पुरजोर आग्रह किया है कि इस पावन और पवित्र आयोजन का राजनीतिकरण न किया जाए। उन्होंने मांग की कि इस समिति का पुनर्गठन करते हुए इसमें हरियाणा के सभी राजनीतिक दलों के सांसदों और विधायकों, समाज के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए, ताकि यह सही मायनों में "समरसता" का प्रतीक बन सके।
विधानसभा में मुख्यमंत्री का पक्ष और विपक्ष की भागीदारी का आश्वासन
विपक्ष के लगातार हमलों और जारी पत्र के बाद, हरियाणा विधानसभा के सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी ने इस मुद्दे पर सरकार का रुख साफ करने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में गठित समिति में विपक्ष के नेताओं और विधायकों को भी शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी ने विधानसभा में 'समरसता संकल्प अभियान' से जुड़ा एक प्रस्ताव भी रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों और महापुरुषों की शिक्षाएं किसी एक दल या वर्ग के लिए नहीं होतीं, बल्कि वे पूरे मानव समाज का मार्गदर्शन करती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य गुरु रविदास जी के समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय के अमर संदेश को हरियाणा के हर घर तक पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले जब श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी पर्व को लेकर समितियां बनाई गई थीं, तब भी विपक्षी सदस्यों को न्योता दिया गया था। हालांकि, उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि कई कार्यक्रमों में निमंत्रण मिलने के बावजूद विपक्षी नेता शामिल नहीं हुए थे, लेकिन फिर भी सरकार इस बार सभी दलों को साथ लेकर चलने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
देशभर में और पड़ोसी राज्यों में 650वें प्रकाशोत्सव की तैयारियां
संत रविदास जी का 650वां प्रकाश पर्व वर्ष 2027 में है, लेकिन इसकी भव्य तैयारियों और आयोजनों की शुरुआत 2026 से ही शुरू कर दी गई है। देश के विभिन्न हिस्सों में इसे बड़े पैमाने पर मनाया जा रहा है:
राष्ट्रव्यापी अभियान और पवित्र कलश यात्रा:
भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में 29 जुलाई 2026 से ही राष्ट्रव्यापी 'समरसता संकल्प अभियान' की शुरुआत हो चुकी है, जो 20 फरवरी 2027 तक चलेगा। इसकी शुरुआत संत रविदास जी की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर (वाराणसी) से हुई। वाराणसी से पवित्र मिट्टी के 131 कलश लेकर 'कलश यात्रा' पूरे देश के राज्यों और जिलों में भेजी जा रही है। हरियाणा में यह पवित्र कलश अगस्त की शुरुआत में पहुंचा था और अब इसे राज्य के विभिन्न गांवों और शहरों तक ले जाया जा रहा है।
पंजाब सरकार की योजनाएं:
पड़ोसी राज्य पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने भी 650वें प्रकाश पर्व को पूरे एक साल तक सरकारी स्तर पर धूमधाम से मनाने का ऐलान किया है। पंजाब में फरवरी 2026 से ही खुरलगढ़ साहिब में अखंड पाठ के साथ इन आयोजनों की शुरुआत कर दी गई थी। वहां विशेष डॉक्यूमेंट्री वैन के जरिए लगभग 13,000 गांवों में गुरु जी की शिक्षाओं का प्रसार किया जा रहा है। साथ ही वाराणसी से खुरलगढ़ साहिब तक चार बड़ी शोभा यात्राएं और यादगार सिक्के जारी करने की भी योजना है।
समरसता बनाम सियासत: मुख्य सवाल
हरियाणा में जिस तरह से संत रविदास जी के नाम पर बनी समिति को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा में दलित और वंचित वर्ग के मतदाता एक बड़ा निर्णायक कारक हैं। यही वजह है कि सत्तारूढ़ दल और विपक्ष, दोनों ही संत रविदास जी के विचारों और संदेशों के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते।
विपक्ष जहां इसे सरकारी संसाधनों के दम पर किया जा रहा एकतरफा पार्टी प्रचार बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि उसका ध्यान आयोजन की भव्यता और गुरु जी के विचारों को हर नागरिक तक पहुंचाने पर है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद समिति के पुनर्गठन में विपक्ष के किन-किन दिग्गजों को जगह मिलती है और यह विवाद किस मुकाम तक पहुंचता है।