गुरुग्राम में बाबा बालकनाथ मंदिर पर बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में हुई महापंचायत, ग्रामीणों की तीन प्रमुख मांगें

गुरुग्राम के सेक्टर-50 स्थित आदमपुर झाड़सा गांव में बाबा बालकनाथ मंदिर, गोशाला और समाधि स्थल को तोड़े जाने को लेकर लोगों ने रविवार को खुलकर विरोध किया। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, नगर निगम और डीटीसीपी की इस संयुक्त कार्रवाई के खिलाफ मंदिर परिसर में महापंचायत की गई। पंचायती बोले कि मंदिर का पुनर्निर्माण हो, गौधन वापस लाया जाए और ग्रामीणों की शिकायत वापस हो। इस बारे में ग्रामीणों और तिजारा के विधायक महंत बालकनाथ का दावा है कि यह स्थल 100-150 साल पुराना है और पंचायत ने पूजा-पाठ के लिए यह जमीन दान में दी थी।
तोड़फोड़ के विरोध में 11 सदस्यीय समिति का गठन
तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद 11 सदस्यीय समिति गठित की गई है। इस समिति में 360 गांवों के महेंद्र सिंह ठाकरान, वजीराबाद के पूर्व सरपंच सूबे सिंह बोहरा, प्रदीप जेलदार, संदीप ठाकरान, सुरेंद्र ठाकरान, भगत ठाकरान, सोनू ठाकरान और नवीन समेत अन्य लोग शामिल हैं। समिति सदस्यों ने मंदिर स्थल का दौरा किया और वहां पर की गई तोड़फोड़ की कड़े शब्दों में निंदा की। तोडफ़ोड़ के विरोध में तिजारा के विधायक महंत बाबा बालक नाथ भी मौके पर पहुंचे और रविवार को महापंचायत आहुत की गई।
महापंचायत में उठी मंदिर के पुनर्निर्माण और गायों को वापस लाने की मांग
इस महापंचायत की अध्यक्षता 360 खाप के प्रधान महेंद्र सिंह ठाकरान ने की। इस दौरान काफी संख्या में ग्रामीणों, मौजिज व्यक्तियों के अलावा संत और जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण भारद्वाज समेत अनेक लोग महापंचायत में मौजूद रहे। सभी ने एकमत से कहा कि यह बाबा बालक नाथ का प्राचीन मंदिर है और मंदिर को तोड़ा जाना एक तरह से सनातन पर प्रहार है, जो बर्दाश्त नहीं होगा। ग्रामीणों का आरोप है कि भारी पुलिस बल के साथ 16 घंटे चली कार्रवाई में शिव मंदिर को छोडक़र पांच अन्य मंदिर, गोशाला और समाधि तोड़ दी गई।
मूर्तियां रातों-रात हटा दी गईं और 35 गायों को कार्टरपुरी गोशाला शिफ्ट कर दिया गया। महापंचायत में प्रशासन से तीन मुख्य मांगें की गईं, जिनमें पहली मांग मंदिर स्ट्रक्चर का पुनर्निर्माण करने की है। दूसरी मांग ग्रामीणों के खिलाफ दी गई शिकायत वापस लेने की है और तीसरी मांग गोशाला की 35 गायों और बछड़ों को वापस लाने की है। इन मांगों को लेकर कल एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से भी मिलेगा और मांग नहीं माने जाने पर मुख्यमंत्री नायब सैनी से शिकायत की जाएगी। इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि वहां चार एकड़ जमीन सरकारी है और दो महीने से नोटिस दिए जा रहे थे, तथा नोटिस की अवधि खत्म होने पर यह कार्रवाई की गई है।