गुरुग्राम में इन्वेस्टमेंट के नाम पर 13 करोड़ 80 लाख की साइबर ठगी, गिरोह के 5 बैंक खाता उपलब्ध कराने वाले आरोपी गिरफ्तार

गुरुग्राम में इन्वेस्टमेंट के नाम पर 13 करोड़ 80 लाख की साइबर ठगी, गिरोह के 5 बैंक खाता उपलब्ध कराने वाले आरोपी गिरफ्तार

गुरुग्राम में इन्वेस्टमेंट के नाम पर 13 करोड़ 80 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। इस ठगी की राशि में से करीब 05 लाख रुपये संबंधित बैंक खाते में ट्रांसफर हुए थे। पुलिस ने ठगी करने वाले गिरोह को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले 05 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में अभी तक साइबर ठगी गिरोह के कुल 40 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

4 नवंबर 2024 को शिकायतकर्ता ने पुलिस थाना साइबर अपराध पूर्व, गुरुग्राम में शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसके साथ इन्वेस्टमेंट के नाम पर करीब 13 करोड़ 80 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई है। प्राप्त शिकायत पर पुलिस थाना साइबर अपराध पूर्व, गुरुग्राम में संबंधित धाराओं के तहत अभियोग अंकित किया गया। इस अभियोग का आगामी अनुसंधान स्पेशल साइबर क्राइम यूनिट, सेक्टर-56, गुरुग्राम द्वारा किया जा रहा है।

गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी और रिमांड

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स्पेशल साइबर क्राइम यूनिट, सेक्टर-56, गुरुग्राम की पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों एवं बैंकिंग ट्रेल के आधार पर कार्रवाई की। पुलिस टीम ने 21 अगस्त 2026 को आरोपी नीरज को दिल्ली से गिरफ्तार किया। 22 अगस्त को आरोपी सूरज सरोज को देहरादून से गिरफ्तार किया गया। आरोपी सुरजीत कुमार उर्फ मानस को शिमला से गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा आरोपी प्रशांत शर्मा व तेज प्रताप सिंह शेखावत को देहरादून और शिमला क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।

आरोपियों की पहचान इस प्रकार है। आरोपी नीरज पुत्र सूबेदार निवासी खसरा नं. 1336/1337, स्वरूप विहार एक्सटेंशन, कादीपुर, उत्तर-पश्चिम दिल्ली है। आरोपी सूरज सरोज पुत्र मनीराम निवासी गांव गोमाडीह, लालगंज, जिला आजमगढ़, उत्तर प्रदेश है। आरोपी सुरजीत कुमार उर्फ मानस पुत्र बंटी चक्रवती निवासी जयपुर, राजस्थान है। आरोपी प्रशांत शर्मा पुत्र गोपाल शर्मा निवासी जयपुर, राजस्थान तथा तेज प्रताप सिंह शेखावत पुत्र कृपाल सिंह शेखावत निवासी जयपुर, राजस्थान के रूप में हुई है। आरोपी नीरज को 21 अगस्त को अदालत में पेश करके 03 दिन का पुलिस हिरासत रिमांड प्राप्त किया गया था।

बैंकिंग ट्रेल और पूछताछ में हुआ खुलासा

पुलिस पूछताछ के दौरान सामने आए बैंकिंग ट्रेल के अनुसार, उपरोक्त अभियोग में ठगी गई राशि में से करीब 05 लाख रुपये गुप्ता इंडस्ट्रीज के करेंट बैंक खाते में ट्रांसफर हुए थे। आरोपी निखिल गुप्ता ने पूछताछ में बताया कि उसने उक्त बैंक खाता आरोपी मनजीत ददयान को 50 हजार रुपये में बेचा था। आरोपी मनजीत ददयान ने बताया कि उसने उक्त बैंक खाता आगे आरोपी नीरज को 60 हजार रुपये में बेचा था। आरोपी नीरज ने पूछताछ में बताया कि उसने उक्त बैंक खाता आरोपी सूरज के माध्यम से आरोपी सुरजीत को 90 हजार रुपये में बेचा था।

पूछताछ में यह भी ज्ञात हुआ कि आरोपी सुरजीत कुमार उर्फ मानस टेलीग्राम के माध्यम से चाइनीज साइबर फ्रॉड करने वाले व्यक्तियों से जुड़ा हुआ था। सुरजीत अपने अन्य साथियों सूरज सरोज, प्रशांत शर्मा व तेज प्रताप सिंह शेखावत के साथ मिलकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह को बैंक खाते उपलब्ध करवाता था। उक्त नेटवर्क से जुड़कर साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देने में सहयोग करता था। आरोपियों द्वारा उपलब्ध करवाए गए बैंक खातों का प्रयोग साइबर ठगी की राशि प्राप्त करने एवं आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।

चाइनीज साइबर फ्रॉड नेटवर्क और टेलीग्राम का इस्तेमाल

पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी सुरजीत उर्फ मानस को टेलीग्राम के माध्यम से जय जोय नामक व्यक्ति ने अलग-अलग टेलीग्राम ग्रुपों में जोड़ा था। सुरजीत इन ग्रुपों में बैंक खातों की जानकारी शेयर करता था। इसके बदले क्रिप्टोकरेंसी और बाइनेंस के माध्यम से भुगतान प्राप्त करता था। आरोपी सुरजीत अपने अन्य साथी के माध्यम से उक्त राशि को अलग-अलग स्थानों से नकद प्राप्त करता था।

पुलिस टीम द्वारा आरोपियों के कब्जे से कुल 06 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। इनमें आरोपी नीरज से 01 मोबाइल फोन बरामद हुआ है। सूरज सरोज से 01 मोबाइल फोन बरामद हुआ है। सुरजीत कुमार उर्फ मानस से 02 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। प्रशांत शर्मा से 01 मोबाइल फोन और तेज प्रताप सिंह शेखावत से 01 मोबाइल फोन बरामद हुआ है। बरामद मोबाइल फोन का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है।

अदालत में पेशी और आगे की कार्रवाई

पुलिस टीम द्वारा आरोपियों को माननीय अदालत में पेश किया गया। सूरज सरोज व सुरजीत कुमार उर्फ मानस को 01 दिन के पुलिस हिरासत रिमांड पर लिया गया है। नीरज, प्रशांत शर्मा व तेज प्रताप सिंह शेखावत को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इस अभियोग में अब तक कुल 40 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

अभियोग में बैंक खातों के माध्यम से हुए वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है। ठगी की राशि, अन्य सह-आरोपियों एवं साइबर ठगी नेटवर्क के संबंध में गहनता से पूछताछ जारी है। तकनीकी जांच अभी भी लगातार जारी है।

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