गुरुग्राम में तोडफ़ोड़ से गुस्साए लोगों ने लघु सचिवालय के सामने की महापंचायत, प्रशासन के खिलाफ जताया कड़ा रोष

गुरुग्राम में डीएलएफ और पुराने गुरुग्राम में चल रही तोडफ़ोड़ की कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। बुधवार को सैकड़ों मकान मालिक और नागरिक लघु सचिवालय के बाहर एकत्र हुए। इसके बाद प्रशासन के खिलाफ महापंचायत का आयोजन किया गया।
महापंचायत में लोगों ने जिला नगर योजनाकार आरएस भाट और नगर निगम के रवैये का कड़ा विरोध किया। लोगों ने गंभीर आरोप लगाया कि प्रशासन की मिलीभगत से ही कॉलोनियां बसी थीं। अब नियमों का हवाला देकर आम लोगों के बने-बनाए मकानों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। लोगों ने यह भी कहा कि हरियाणा में आज तक दक्षिण हरियाणा से कोई मुख्यमंत्री नहीं बना है। इसी वजह से गुरुग्राम के लोगों का दर्द कोई नहीं समझ रहा है।
महापंचायत में रखी गई मुख्य मांगें
महापंचायत में मुख्य मांगें रखी गईं कि शहर में अब तक बने सभी मकानों और कॉलोनियों को तत्काल प्रभाव से नियमित किया जाए। कोई भी नागरिक अवैध निर्माण के पक्ष में बिल्कुल नहीं है। लेकिन लोगों ने साफ कर दिया कि उनके बने-बनाए घर किसी भी सूरत में टूटने नहीं दिए जाएंगे। सरकार ने खुद स्टिल्ट प्लस चार और पीजी संचालन जैसे नियम लागू किए हैं। अब अचानक इस तरह की कार्रवाई किया जाना केवल उत्पीड़न है।
जुर्माना भरने को तैयार हैं लोग
यदि निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो नगर निगम और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण कंपाउंडिंग फीस के तौर पर जुर्माना लगा दे। लोग नक्शा पास कराने की फीस और जुर्माना भरने को पूरी तरह तैयार हैं। उनकी केवल यही मांग है कि उनके घर सुरक्षित रहें।
डीसी को सौंपा जाएगा ज्ञापन
महापंचायत के अंत में सर्वसम्मति से एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। सभी मांगों को लेकर डीसी उत्तम कुमार को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि तोडफ़ोड़ की यह कार्रवाई नहीं रुकी तो आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।