राव इंद्रजीत सिंह ने किया 'गुड़गांव सस्टेनेबिलिटी हैंडबुक 2026' का विमोचन

Atal Hind Team Online14 August 20265 min read19 views
राव इंद्रजीत सिंह ने किया 'गुड़गांव सस्टेनेबिलिटी हैंडबुक 2026' का विमोचन

आर्थिक तरक्की और पर्यावरण की देखभाल एक-दूसरे के विरोधी नहीं -राव इंद्रजीत 

गुरुग्राम आज भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते और गतिशील शहरों में से एक

पिछले कुछ दशकों में इसकी ज़बरदस्त तरक्की ने कई नए और बड़े मौके पैदा किए

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विकास के लिए 'सस्टेनेबिलिटी' (स्थिरता) को मुख्य आधार बनाना ज़रूरी

राव ने शुक्रवार को गुड़गांव सस्टेनेबिलिटी हैंडबुक 2026 का विमोचन किया

गुरुग्राम /14 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स /फतह सिंह उजाला

देश के प्रमुख कॉर्पोरेट और औद्योगिक केंद्र के रूप में पहचान बना चुका गुरुग्राम (गुड़गांव) आज बुनियादी ढांचे और आर्थिक तरक्की के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन इस तेज रफ्तार विकास के साथ ही शहर के सामने पर्यावरण, पानी की कमी, कचरा प्रबंधन और ट्रैफिक जैसी कई गंभीर चुनौतियां भी आकर खड़ी हो गई हैं। इसी दिशा में शहर को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से एक संतुलित, साफ-सुथरा और रहने लायक बनाने के मकसद से शुक्रवार को एक अहम कदम उठाया गया। भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन, योजना तथा संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम में 'गुड़गांव सस्टेनेबिलिटी हैंडबुक 2026' का आधिकारिक विमोचन किया।

यह महत्वपूर्ण हैंडबुक 'गुड़गांव फर्स्ट' नामक सामाजिक व थिंक-टैंक संस्था द्वारा प्रकाशित की गई है, जो शहर के मुद्दों और उसके सतत विकास पर लंबे समय से काम कर रही है। संस्था की ओर से जारी सस्टेनेबिलिटी हैंडबुक श्रृंखला का यह पांचवां संस्करण है। गुरुग्राम के सेक्टर-44 स्थित सोयल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (SOIL Institute of Management) के सभागार में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में शहर के प्रशासनिक अधिकारियों, नीति-निर्माताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत की हस्तियों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शहर में हो रहे विकास को पर्यावरण के अनुकूल बनाना और आने वाली पीढ़ियों के जीवन स्तर को सुरक्षित करना था।

कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह और विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम आज केवल हरियाणा ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के सबसे तेजी से विकसित होने वाले और गतिशील शहरों में शामिल है। पिछले दो से तीन दशकों में इस शहर ने जिस तरह से तरक्की की नई ऊंचाइयों को छुआ है, उससे लाखों लोगों के लिए रोजगार और व्यवसाय के नए रास्ते खुले हैं। लेकिन इसके साथ ही इस अभूतपूर्व फैलाव ने कई बुनियादी और जटिल समस्याएं भी पैदा कर दी हैं। आज गुरुग्राम में पीने के पानी की सुरक्षा, गीले व सूखे कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, हरित ऊर्जा का इस्तेमाल और सामाजिक समावेश जैसे विषयों पर तुरंत ध्यान देने की सख्त जरूरत है।

केंद्रीय मंत्री ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि आर्थिक प्रगति और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा एक-दूसरे के विरोधी नहीं हो सकते। यह सोचना गलत है कि तरक्की के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना ही पड़ेगा। ये दोनों ऐसे पूरक लक्ष्य हैं जो शहर के दीर्घकालिक भविष्य और यहाँ रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य व जीवन की गुणवत्ता को तय करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुग्राम को एक मजबूत, सुरक्षित और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार शहर बनाने के लिए केवल सरकार अकेले सब कुछ नहीं कर सकती। इसके लिए केंद्र व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, कॉरपोरेट जगत, सिविल सोसाइटी, शैक्षणिक संस्थानों और हर आम नागरिक को एक साथ मिलकर प्रयास करने होंगे।

'गुड़गांव फर्स्ट' की संस्थापक और निदेशक शुभ्रा पुरी ने हैंडबुक की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 'गुड़गांव सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट 2026' केवल एक कागजी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह शहर की जमीनी हकीकत और उसमें सुधार के ठोस उपायों को दर्शाने वाला एक व्यावहारिक रोडमैप है। इस हैंडबुक को तैयार करने में शोधकर्ता आयुष दास गुप्ता और उनकी टीम ने कई महीनों तक गहन आंकड़े जुटाए और शहर के विभिन्न हिस्सों का अध्ययन किया। कार्यक्रम के दौरान आयुष दास गुप्ता ने प्रस्तुति के माध्यम से हैंडबुक के मुख्य निष्कर्षों, चुनौतियों और समाधानों को सबके सामने रखा, जिसमें मुख्य रूप से अरावली पहाड़ियों के संरक्षण और भूजल स्तर को गिरने से रोकने पर विशेष रणनीति सुझाई गई है।

समारोह में पर्यावरण और शहरी नियोजन क्षेत्र के जाने-माने विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए। क्षेत्र विशेषज्ञ चेतन अग्रवाल, राहुल खेरा, सारिका पांडा भट्ट और संगीता नैयर ने अलग-अलग सत्रों में अपनी बातें रखीं। विशेषज्ञों का कहना था कि गुरुग्राम में जिस तेजी से गगनचुंबी इमारतें और नई कॉलोनियां बन रही हैं, उसी अनुपात में रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों को सख्ती से लागू करना होगा। शहर में बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ई-व्हीकल्स (इलेक्ट्रिक वाहनों) और गैर-प्रदूषणकारी सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों को बढ़ावा देना समय की मांग है।

कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल हुईं मानेसर नगर निगम की मेयर डॉ. इंद्रजीत यादव ने भी शहर के उपनगरीय इलाकों में स्वच्छता और टिकाऊ विकास के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मानेसर और गुरुग्राम जैसे तेजी से बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों में औद्योगिक कचरे का सही तरीके से निपटारा करना बेहद जरूरी है, ताकि आसपास के गांवों और रिहायशी इलाकों का पर्यावरण सुरक्षित रह सके। इस अवसर पर विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों से आए छात्रों ने भी सस्टेनेबिलिटी को लेकर अपने विचार और प्रश्न विशेषज्ञों के समक्ष रखे, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि युवा पीढ़ी भी अपने शहर के हरित भविष्य को लेकर काफी जागरूक है।

अन्य शोध स्रोतों और राष्ट्रीय स्तर पर सामने आए आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम में दैनिक आधार पर 1000 टन से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जिसके उचित निस्तारण के लिए बंधवाड़ी वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और स्थानीय स्तर पर माइक्रो-कंपोस्टिंग केंद्रों को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। इसके अलावा, अरावली का विशाल वन क्षेत्र गुरुग्राम के लिए 'हरे फेफड़े' (Green Lungs) की तरह काम करता है, जिसे अतिक्रमण और अवैध निर्माण से बचाना सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट का मुख्य बिंदु रहा है। विशेषज्ञों ने माना कि यदि अरावली के जंगलों और प्राकृतिक जल निकायों को नहीं बचाया गया, तो आने वाले वर्षों में पानी का संकट और अधिक गहरा सकता है।

यह हैंडबुक मुख्य रूप से नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, प्राइवेट कंपनियों, शोधकर्ताओं और स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस (RWAs) के लिए एक संदर्भ बिंदु के रूप में कार्य करेगी। इसका उद्देश्य केवल कमियां बताना नहीं है, बल्कि ऐसे व्यावहारिक मॉडल पेश करना है जिन्हें अपनाकर बहुमंजिला सोसायटियों और वाणिज्यिक परिसरों में बिजली व पानी की खपत को कम किया जा सके। केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में उम्मीद जताई कि 'गुड़गांव सस्टेनेबिलिटी हैंडबुक 2026' में दिए गए सुझावों को सरकारी एजेंसियां और नागरिक समाज मिलकर अमलीजामा पहनाएंगे, जिससे गुरुग्राम आने वाले समय में देश के अन्य आधुनिक शहरों के लिए सतत विकास का एक आदर्श मॉडल बन सके।

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