गुरुग्राम पुलिस ने रोहित गोदारा-लिपिन नेहरा गैंग के छह शूटर किए गिरफ्तार, हत्या और रंगदारी की साजिश नाकाम

गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच सोहना ने संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस ने कुख्यात रोहित गोदारा और लिपिन नेहरा गिरोह के छह सक्रिय बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से करीब 40 लाख रुपये कीमत के चार विदेशी पिस्टल समेत कुल सात हथियार, 33 कारतूस और एक स्कॉर्पियो गाड़ी बरामद की है। यह पूरी कार्रवाई थाना भोंडसी में 18 अगस्त को दर्ज मामले के तहत की गई है।
हत्या और रंगदारी की बड़ी साजिश का खुलासा
पुलिस के अनुसार ये सभी आरोपी गुरुग्राम सहित हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली-एनसीआर में रंगदारी और दो हत्या की बड़ी वारदातों को अंजाम देने की तैयारी में थे। समय रहते कार्रवाई कर पुलिस ने दो संभावित हत्याओं को रोक दिया है और इस तरह एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। आरोपियों से पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि वे पुरानी रंजिश के चलते विरोधी पक्ष के दो व्यक्तियों की हत्या करने की फिराक में थे। वे अवैध हथियारों से लैस होकर वारदात की तैयारी कर रहे थे, लेकिन क्राइम ब्रांच की त्वरित कार्रवाई से उनकी योजना विफल हो गई।
ऐसे पकड़े गए गैंग के आरोपी
क्राइम ब्रांच सोहना को गुप्त सूचना मिली थी कि गैंग के सक्रिय सदस्य किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी कर रहे हैं। इस पुख्ता सूचना पर पुलिस टीम ने तुरंत जाल बिछाया। 19 अगस्त को अलीपुर मोड़ और भोंडसी क्षेत्र से पुलिस ने चार आरोपियों को काबू किया जिनके नाम सलीम, मोहित, नरेंद्र उर्फ सोनू और ललित हैं। इसके बाद उनसे पूछताछ के आधार पर उसी दिन दयाराम को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 24 अगस्त को हरियाहेड़ा मोड़ भोंडसी से छठे आरोपी आर्यन उर्फ रितेश को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और आपराधिक रिकॉर्ड
गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों की पहचान इस प्रकार है: सलीम जो कि सोहना का रहने वाला है, मोहित जो अलीगढ़ का रहने वाला है, नरेंद्र उर्फ सोनू जो अलीपुर सोहना का रहने वाला है, ललित जो रानियावास कोटकासिम अलवर का रहने वाला है, दयाराम जो बिलासपुर गुरुग्राम का निवासी है और आर्यन जो जटवाड़ा जिला झज्जर का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इन सभी शातिर बदमाशों पर पहले से ही कई संगीन मामले दर्ज हैं। आरोपी नरेंद्र पर 21 केस, सलीम पर 10 केस, दयाराम पर पांच केस, आर्यन पर चार केस और मोहित पर दो केस दर्ज हैं।
विदेशों से संचालित होता था गैंग का नेटवर्क
पूछताछ के दौरान इस खतरनाक गैंग के आपराधिक कामकाज करने के तरीकों का भी बड़ा खुलासा हुआ है। यह गिरोह विदेश में बैठे अपने आकाओं और भारत में मौजूद सदस्यों के बीच सोशल मीडिया के जरिए लगातार संपर्क में रहता था। नए और पुराने अपराधियों को गैंग से जोड़कर रंगदारी वसूलना, हथियारों की व्यवस्था करना और शूटर्स के जरिए बड़ी वारदातों को अंजाम दिलवाना इनका मुख्य काम था। रंगदारी से आए अवैध पैसे का इस्तेमाल नए हथियार खरीदने और पुलिस से फरार चल रहे आरोपियों को पनाह देने में किया जाता था। पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने सोमवार को मीडिया को जानकारी दी कि पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों, हथियार सप्लायरों और रंगदारी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।