गुरुग्राम में सफाई कर्मियों का मुंडन प्रदर्शन, 31वें दिन भी जारी रही हड़ताल

गुरुग्राम में सफाई कर्मियों का मुंडन प्रदर्शन, 31वें दिन भी जारी रही हड़ताल

गुरुग्राम में 05 सितंबर को नगर निगम के हड़ताली सफाई कर्मचारियों ने भारी बरसात के बीच पुराने नगर निगम कार्यालय में इकट्ठा होकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। गुरुग्राम, मानेसर, सोहना, हेलीमंडी, पटौदी और फरुखनगर के 26 कर्मचारियों ने सामूहिक मुंडन करवाया। इसके बाद कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और बादशाहपुर विधायक व कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के सिविल लाइन स्थित आवास पर पहुंचकर जमकर नारेबाजी की।

हड़ताल का 31वां दिन और मुख्य मांगें

कर्मचारी नेताओं ने जानकारी दी कि शनिवार को हड़ताल का 31वां दिन रहा। धरने पर मांग की गई कि सरकार सफाई कर्मियों की नाजायज गिरफ्तारी, सस्पेंशन और टर्मिनेशन को तुरंत रद्द करे। नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य उप प्रधान व इकाई प्रधान बसंत कुमार ने बताया कि हड़ताल की अध्यक्षता वरिष्ठ उप प्रधान सम्मी बोहत और फायर के जिला प्रधान जोगिंदर ने संयुक्त रूप से की। इस दौरान संचालन सचिव धर्मेंद्र जिंघाला और कोषाध्यक्ष भारत कांगड़ा ने किया।

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सरकार पर लगाया गुमराह करने का आरोप

कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार और स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल व सामाजिक न्याय मंत्री कृष्ण बेदी कर्मचारियों और आम जनता को लगातार गुमराह कर रहे हैं। मंत्री सोशल मीडिया पर 12, 13 और 14 मांगें मानने का दावा कर रहे हैं, जबकि धरातल पर कोई भी लिखित नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। सरकार बड़ी संख्या में फायर, सफाई और सीवरमैन कर्मियों को शो कॉज और सस्पेंशन ऑर्डर देकर इस आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है।

आगे की चेतावनी और फर्जी बिलों की जांच की मांग

बसंत कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर छह सितंबर तक समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो हड़ताल को और आगे बढ़ाया जाएगा। धरने को सीटू जिला प्रधान सुरेश नोहरा, नोट राजेंद्र सरोहा, फायरमैन मुकेश कुमार, कुलदीप, तेजपाल और सुनीता देवी सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। सभी कर्मचारी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि कूड़ा उठाने के सरकारी प्रयास पूरी तरह से फेल साबित हो चुके हैं।

ठेकेदारों पर सरकारी धन लूटने का आरोप

हड़ताल के दौरान कूड़ा उठान के नाम पर फर्जी बिल बनाकर ठेकेदारों और अधिकारियों द्वारा सरकारी धन की लूट की जा रही है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पुलिस के सहारे कूड़ा उठवाकर व्यवस्था को सामान्य दिखाने की कोशिश की जा रही है, जबकि महिला और बुजुर्ग कर्मचारियों को हिरासत में लेकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।

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