गुरुग्राम में एसआईआर ड्यूटी के बीच पीरियोडिक एसेसमेंट पर शिक्षक संघ का फूटा गुस्सा, शिक्षा विभाग पर लगाए गंभीर आरोप

गुरुग्राम में एसआईआर ड्यूटी के बीच पीरियोडिक एसेसमेंट पर शिक्षक संघ का फूटा गुस्सा, शिक्षा विभाग पर लगाए गंभीर आरोप

गुरुग्राम में मंगलवार से बाल वाटिका से लेकर कक्षा चौथी तक की पीरियोडिक एसेसमेंट शुरू हो चुकी है। इस परीक्षा के शुरू होने के साथ ही राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा ने शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ का साफ कहना है कि विभाग ने बिना जमीनी हकीकत जाने परीक्षा का आदेश जारी किया है। इससे स्कूलों और अभिभावकों दोनों के साथ मजाक किया गया है।

शिक्षक संघ के गंभीर आरोप और एसआईआर ड्यूटी

संघ के प्रदेश अध्यक्ष तरुण सुहाग ने कहा कि विभाग को यह अच्छी तरह पता है कि प्रदेश के ज्यादातर स्कूलों के अध्यापक इन दिनों एसआईआर चुनाव और जनगणना जैसे गैर शैक्षणिक कार्यों में लगे हुए हैं। इसके बावजूद आज से एसेसमेंट शुरू करने का पत्र जारी कर दिया गया है। उन्होंने यह बड़ा सवाल उठाया कि जब स्कूल में अध्यापक ही नहीं हैं तो बच्चों की परीक्षा कौन लेगा। पिछले चार महीने से शिक्षा का मजाक बना हुआ है। ना बच्चों की पढ़ाई हो रही है और ना ही उनको समय पर काम मिल रहा है। तरुण सुहाग ने कहा कि मई माह से ही अध्यापक गैर शैक्षणिक कार्यों में इतने उलझे हैं कि उन्हें सिर्फ इलेक्शन, जनगणना और एसआईआर का काम ही दिखाई दे रहा है। सरकार ने अध्यापकों को अध्यापक नहीं, बल्कि हर काम करने वाला कर्मचारी मान लिया है। सरकार की पहली प्राथमिकता अब बच्चों की शिक्षा नहीं, बल्कि गैर शैक्षणिक कार्य हो गई है।

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अभिभावकों की चिंता और स्कूलों के हालात

जिला प्रधान अशोक प्रजापति ने इस बात की जानकारी दी कि स्कूलों में अब अभिभावक भी रोज आकर पूछ रहे हैं कि क्या स्कूल के अध्यापक का ट्रांसफर हो गया है। अभिभावक यह भी पूछ रहे हैं कि अध्यापक स्कूल में क्यों नहीं आ रहे हैं और हमारे बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी। तरुण सुहाग के मुताबिक, स्कूलों में मौजूद इंचार्ज या मुख्य शिक्षक सरकार की कमियों को छुपाने के लिए अभिभावकों को तरह-तरह के बहाने देकर शांत कर रहे हैं। अब स्थिति पूरी तरह से अनियंत्रित होती जा रही है।

नामांकन पर असर और शिक्षक संघ की मुख्य मांगें

शिक्षक संघ के सदस्य अशोक प्रजापति ने यह चेतावनी दी कि यदि समय रहते शिक्षकों को स्कूलों में वापस नहीं भेजा गया तो इसका सीधा असर आने वाले सेशन 2027-28 के नामांकन पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों से बच्चों की संख्या घटेगी और इसके लिए मुख्य रूप से सरकार और विभाग जिम्मेदार होंगे। जो थोड़ा बहुत अभिभावकों का भरोसा बचा है वह भी टूट जाएगा और आने वाले समय में सरकारी स्कूल पूरी तरह बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे। शिक्षक संघ ने विभाग से यह प्रमुख मांग की है कि पीरियोडिक एसेसमेंट को तब तक स्थगित किया जाए जब तक स्कूलों में नियमित अध्यापक उपलब्ध नहीं हो जाते। इसके साथ ही अध्यापकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर सिर्फ शिक्षा पर फोकस करने दिया जाए। संघ के पदाधिकारियों ने अंत में कहा कि अगर बच्चों की नींव ही कमजोर होगी तो प्रदेश का भविष्य कैसे मजबूत होगा।

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