गुरुग्राम में 4 साल से वेतन न मिलने पर ग्रामीण ट्यूबवेल पंप ऑपरेटरों ने खोला मोर्चा, डीएमसी से मिला प्रतिनिधिमंडल

गुरुग्राम में 4 साल से वेतन न मिलने पर ग्रामीण ट्यूबवेल पंप ऑपरेटरों ने खोला मोर्चा, डीएमसी से मिला प्रतिनिधिमंडल

गुरुग्राम जिले से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। हरियाणा सरकार के खजाने में सबसे अधिक राजस्व गुरुग्राम से ही जाता है। यह गर्व के साथ ऑन रिकॉर्ड बात है। लेकिन इसका दूसरा पहलू बेहद हैरान करने वाला और चौंकाने वाला सामने आ रहा है। नवगठित पटौदी जाटोली मंडी परिषद के कथित नियोक्ता होने के बाद परिषद सीमा में शामिल ग्रामीण ट्यूबवेल पंप ऑपरेटर को 4 साल से वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। कर्मचारीयों ने अपना दुखड़ा और पीड़ा व्यक्त करते हुए सवाल किया कि क्या सरकार ने उन्हें सरकारी बंधुआ मजदूर बनाकर छोड़ दिया है?

वेतन भुगतान की मांग को लेकर खोला मोर्चा

कर्मचारी पिछले 4 साल से अपनी मेहनत के वेतन के भुगतान के लिए विभिन्न सरकारी और संबंधित विभागों सहित अधिकारियों की चौखट पर चक्कर लगा लगा कर थक गए हैं। लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। संबंधित विभाग और अधिकारी एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराते हुए अपना पल्ला झाड़ कर दिखा देते हैं। पटौदी जाटोली मंडी परिषद जोन 2 हेली मंडी परिषद कार्यालय के सामने ग्रामीण जलकर्मी संघ हरियाणा के बैनर तले ग्रामीण ट्यूबवेल पंप ऑपरेटर अनिश्चितकालीन धरना का मोर्चा खोल बैठने के लिए मजबूर हो गए हैं।

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डीएमसी से मिला कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल

इसी कड़ी में ग्रामीण जलकर्मी संघ हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष मुनेश कुमार बेनीवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल डीएमसी से अपनी मांगों को लेकर मिला। प्रतिनिधिमंडल के द्वारा डीएमसी को विस्तार से अपनी समस्या और जानकारी देते हुए जल्द से जल्द लंबित वेतन भुगतान किए जाने की मांग सहित अनुरोध किया गया। डीएमसी के द्वारा मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए जल्द से जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया है।

कर्मचारियों ने की नारेबाजी और जताई नाराजगी

बुधवार को पटौदी जाटोली मंडी परिषद जोन दो हेली मंडी कार्यालय के सामने मोर्चा खोल धरने पर बैठे ग्रामीण ट्यूबवेल पंप ऑपरेटर राज्य उप प्रधान धर्मदत्त, जय किशन, तेजू, सुभाष, सुरेंद्र, देवेंद्र, श्री भगवान सहित अन्य के द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में और सरकार तथा सिस्टम की कथित लापरवाही के विरोध में नारेबाजी की गई। इसी मौके पर प्रतिनिधि मंडल में शामिल कर्मचारी नेताओं ने जानकारी देते हुए बताया कि परिषद सीमा में गांव के शामिल होने अथवा पटौदी जाटोली मंडी परिषद के कर्मचारियों का नियोक्ता होने के बाद वेतन का भुगतान नहीं हो रहा है।

पोर्टल पर उपलब्ध है आज भी रिकॉर्ड

इससे पहले सभी पंप ऑपरेटर का वेतन का भुगतान पटौदी खंड विकास एवं पंचायत विभाग के द्वारा आरईएमएस पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा था। यह रिकॉर्ड आज भी संबंधित पोर्टल पर उपलब्ध है। ग्रामीण जल व्यवस्था में तकरीबन 6000 कर्मचारी पंचायत एवं विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत हैं। जबकि शेष ठेकेदारी के तहत लगे थे और ठेकेदारी के तहत लगे कर्मचारी एचकेआरएल विभाग में चले गए हैं।

जन स्वास्थ्य विभाग और पंचायत विभाग की जिम्मेदारी

लेकिन पटौदी जाटोली मंडी परिषद सीमा क्षेत्र के 10 गांव के 12 पंप ऑपरेटर कांट्रेक्चुअल नहीं थे। इनके ट्यूबवेल की मरम्मत का काम जन स्वास्थ्य विभाग कर रहा था तथा ऑपरेटर का वेतन खंड विकास एवं पंचायत विभाग के द्वारा दिया जाता रहा है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि परिसीमन के बाद भी वेतन उनके द्वारा ही दिया जाना न्याय संगत तथा उचित रहेगा। अब देखना यही है कि सरकार के सरकारी बंधुआ जैसे काम कर रहे इन कर्मचारियों को वेतन का भुगतान कब तक उपलब्ध करवाया जा सकेगा।

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