गुरुग्राम के उल्लावास में स्वतंत्रता दिवस पर हुआ 26वां विशाल कुश्ती दंगल, 250 पहलवानों ने दिखाए दांव-पेंच

गुरुग्राम के उल्लावास में स्वतंत्रता दिवस पर हुआ 26वां विशाल कुश्ती दंगल, 250 पहलवानों ने दिखाए दांव-पेंच

गुरुग्राम में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में गांव उल्लावास में 26वां विशाल कुश्ती दंगल आयोजित किया गया। देशभक्ति और मिट्टी की खुशबू से सराबोर इस दंगल में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के नामी पहलवानों ने अपनी ताकत दिखाई। रेलवे, हरियाणा पुलिस और दिल्ली पुलिस के पहलवानों ने भी दम दिखाकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। दंगल के आयोजक पहलवान राजबीर ने रविवार को बताया कि शनिवार देर रात तक कुश्तियां चलीं।

उल्लावास दंगल की शुरुआत और परंपरा

इस दंगल की शुरुआत स्वर्गीय चौधरी धर्मबीर उल्लावास ने वर्ष 2000 में करवाई थी। उनका मकसद था कि हरियाणा के कुश्ती पहलवानों की प्रतिभा को निखारा जाए, ताकि वे देश और दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन कर सकें। आज तक यह परंपरा लगातार जारी है। राजबीर के मुताबिक वे स्वयं, सतबीर सरपंच और पूरे गांव के लोग हर 15 अगस्त को यह दंगल करवाते हैं। इस बार दंगल में करीब 250 छोटी-बड़ी कुश्तियां करवाई गईं। विजेता पहलवानों को लाखों रुपये के इनाम देकर सम्मानित किया गया।

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मुख्य इनामी कुश्तियां और मुकाबले

इस दंगल में तीन बड़ी इनामी कुश्तियां खास आकर्षण का केंद्र रहीं। पहली बड़ी कुश्ती एक लाख 21 हजार रुपये की थी। यह मुकाबला भोलू पहलवान और रोहित रोहतक के बीच 15 मिनट का था। भोलू पहलवान ने शुरुआती मिनटों में ही शानदार दांव लगाकर प्रतिद्वंद्वी को चारों खाने चित कर दिया। दूसरी कुश्ती 51 हजार रुपये की थी। ललित पहलवान और राहुल पहलवान के बीच हुए इस मुकाबले में भी 15 मिनट का समय तय था, लेकिन ललित ने कुछ ही सेकंडों में बेहतरीन दांव-पेंच दिखाकर जीत अपने नाम की। तीसरी कुश्ती 31 हजार रुपये की थी। उपकार पहलवान ने हर्ष पहलवान को मात देकर यह कुश्ती जीती।

गणमान्य लोगों की उपस्थिति और उल्लावास दंगल का महत्व

दंगल में सोहना विधायक तेजपाल तंवर, समाजसेवी सुशील भारद्वाज, वार्ड पार्षद नारायण भड़ाना, पार्षद मनीष हरसाना सहित कई स्थानीय नेता और गणमान्य लोग पहुंचे। उन्होंने पहलवानों की हौसला-अफजाई की और विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। भारी संख्या में आसपास के गांवों से लोग दंगल देखने आए। राजबीर पहलवान ने कहा कि उल्लावास का दंगल सिर्फ खेल नहीं, बल्कि हरियाणा की मिट्टी से जुड़ी परंपरा है। यहां से निकले पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है और आगे भी यह मंच नई प्रतिभाओं को मौका देता रहेगा।

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