ज्ञान भारतम् मिशन: ग्रामीण-शहरी नागरिक अब जमा कर सकेंगे पांडुलिपियां, एडीसी अजय चोपड़ा ने दिए निर्देश

www.atalhind.com30 April 20264 min read0 viewsसोनीपत
ज्ञान भारतम् मिशन: ग्रामीण-शहरी नागरिक अब जमा कर सकेंगे पांडुलिपियां, एडीसी अजय चोपड़ा ने दिए निर्देश

ग्रामीण ग्राम सचिव तथा शहरवासी नगर निगम व नगर पालिका के माध्यम से जमा सक सकते हैं पांडुलिपि

ज्ञान भारतम मिशन को लेकर अतिरिक्त उपायुक्त अजय चोपड़ा की अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक

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अतिरिक्त उपायुक्त अजय चोपड़ा ने कहा कि भारत की समृद्ध परम्परा, सांस्कृतिक धरोहर एवं बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्राचीन पाण्डुलिपियां, ताड़पत्र एवं दुर्लभ अभिलेखों के संरक्षण एवं भावी पीढिय़ों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया है।

 

 

उन्होंने बताया कि इस मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसमें जनभागीदारी के माध्यम से देशभर के परिवारों, मंदिरों एवं संस्थाओं में उपलब्ध पांडुलिपियों को ‘ज्ञान भारतम् ऐप’ के जरिए जियो-टैग कर सूचीबद्ध एवं डिजिटल रूप से संरक्षित किया जा रहा है। ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अतिरिक्त उपायुक्त अजय चोपड़ा ने अपने कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें दिशा-निर्देश दिए।

 

 

उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख पहल के रूप में ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन शुरू किया है, जिसके तहत देश में मौजूद दुर्लभ पांडुलिपियों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इस मिशन का उद्देश्य भारत भर में शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों तथा निजी संग्रहों में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, प्रलेखन, संरक्षण, डिजिटलीकरण कर उन्हें सुलभ बनाना है। उन्होंने कहा कि इन पांडुलिपियों को समय के प्रभाव से बचाने के लिए उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना आवश्यक है।

 

अतिरिक्त उपायुक्त ने बैठक के दौरान जिले में प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत जिला में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों के वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटलीकरण को लेकर विस्तार से चर्चा की।

 

 

उन्होंने निर्देश दिए कि जिले में जहां भी वर्षों पुरानी पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, जिनमें धार्मिक ग्रंथ, ऐतिहासिक दस्तावेज और पारंपरिक ज्ञान का अनमोल भंडार मौजूद है, कि पहचान की जाए ताकि उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। उन्होंने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ का व्यापर स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए ताकि इस मिशन में सभी की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

 

 

 

पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए आधुनिक तकनीकों का किया जाए उपयोग

अतिरिक्त उपायुक्त ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग समन्वय बनाकर सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ करें और ऐसे स्थानों की सूची तैयार करें जहां दुर्लभ पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मठों, मंदिरों और निजी पुस्तकालयों के प्रबंधकों से संवाद स्थापित कर पांडुलिपियों के संरक्षण में उनका सहयोग लिया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि संरक्षण कार्य के दौरान मूल दस्तावेजों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। उन्होंने बताया कि पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए ताकि उच्च गुणवत्ता में उनका संग्रहण संभव हो सके।

 

 

 

75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को दी जाएगी प्राथमिकता
उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम् अभियान के तहत लगभग 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार की ओर से सर्वे कार्य को तीन माह के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो 16 मार्च से शुरू हो चुका है और 15 जून तक जारी रहेगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से डिजिटलीकरण और संरक्षण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से जिले की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

अभियान में पांडुलिपि धारकों का स्वामित्व रहेगा पूर्णत: सुरक्षित
अतिरिक्त उपायुक्त अजय चोपड़ा ने जिलावासियों का आह्वान किया कि ज्ञान भारतम् मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ग्राम सचिव तथा शहरवासी नगर निगम व नगर पालिकाओं के माध्यम से आम अपनी पांडुलिपियों की जानकारी साझा कर सकते हैं। चिन्हित पांडुलिपियों को राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी में सुरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान में पांडुलिपि धारकों का स्वामित्व पूर्णत: सुरक्षित रहेगा। उन्होंने सर्वेक्षण के तहत सरकारी पुस्तकालयों, विश्वविद्यालयों, संस्कृत पाठशालाओं तथा मंदिरों, गुरुद्वारों और मठों जैसे धार्मिक स्थलों में उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान और दस्तावेजीकरण करने के साथ-साथ पांडुलिपियों की भौतिक स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए।

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