हांसी में स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का विरोध करने वाले 10 किसान नेता जेल भेजे गए

हांसी में स्वतंत्रता दिवस समारोह के विरोध और हंगामे के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के मामले में पुलिस द्वारा नामजद किए गए 10 किसान एवं खाप नेताओं को रविवार को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए हैं। इसके बाद पुलिस उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच भोंडसी जेल ले गई। आरोपियों की पेशी को लेकर न्यायिक परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और सीआईए की टीम भी मौके पर तैनात रही थी।
एफआईआर और पुलिस की दलील
पुलिस के अनुसार मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के विरोध के दौरान हुए हंगामे को लेकर करीब 200 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें से 10 किसान एवं खाप नेताओं को विशेष रूप से नामजद किया गया है। पुलिस ने आरोपियों पर हत्या के प्रयास समेत विभिन्न गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। अदालत में पुलिस ने अपनी दलील देते हुए कहा कि आरोपियों को हिसार जेल भेजने पर अन्य प्रदर्शनकारी उन्हें वहां पहुंचने से रोकने का प्रयास कर सकते हैं। इस पूरी स्थिति के आधार पर पुलिस ने आरोपियों को भोंडसी जेल भेजने की मांग की थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।
बचाव पक्ष ने गंभीर धाराओं पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकीलों ने एफआईआर में लगाई गई गंभीर धाराओं और पुलिस की कार्रवाई को कड़ी चुनौती दी है। अधिवक्ता विक्रम मित्तल ने अदालत में यह पक्ष रखा कि हत्या के प्रयास की धारा लगाने का कोई ठोस आधार नहीं बनता है। उन्होंने कहा कि इस घटना में किसी भी व्यक्ति को चोट लगने की बात सामने नहीं आई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की किसी भी व्यक्ति की हत्या करने की कोई मंशा नहीं थी। बचाव पक्ष ने यह बात भी सामने रखी कि आरोपियों की ओर से देश की संप्रभुता, एकता एवं अखंडता को खतरा पहुंचाने वाला कोई भी भाषण या बयान देने के ठोस वीडियो अथवा अन्य प्रमाण पुलिस के पास मौजूद नहीं हैं। अ अधिवक्ताओं के मुताबिक किसान मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी मांगें रखने के लिए पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे थे।
पुलिस पर लगाए गए गंभीर आरोप
बचाव पक्ष के वकीलों ने पुलिस प्रशासन के ऊपर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अधिवक्ताओं ने यह दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से नहीं, बल्कि पुलिस की ओर से सबसे पहले पत्थरबाजी शुरू की गई थी। उन्होंने हांसी के पुलिस अधीक्षक पर स्वयं आगे आकर पत्थरबाजी करने का गंभीर आरोप लगाया और इसके समर्थन में सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित वीडियो का हवाला दिया। इसके अलावा एक सीआईए प्रभारी द्वारा एके-47 तानकर प्रदर्शनकारियों को खुलेआम धमकाने का आरोप भी लगाया गया। हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि ये सभी आरोप बचाव पक्ष की ओर से अदालत में रखे गए दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना अभी बाकी है।
आरोपियों के नाम और वकीलों की पैरवी
अधिवक्ता धर्मवीर जांगड़ा ने अदालत में यह बात कही कि किसानों का मुख्यमंत्री से मिलने का कार्यक्रम पहले से पूरी तरह तय था और वे शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें रखने के लिए जा रहे थे। उन्होंने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार बताते हुए पुलिस की इस पूरी कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। न्यायिक हिरासत में भेजे गए कुल 10 आरोपियों में सुरेश कोथ, शमशेर नंबरदार, सुरेंद्र मान, सुमित दलाल, सुभाष ढिल्लो, रणबीर मलिक, वजीर (निवासी लाडवा), जगमेंद्र (निवासी बहु अकबरपुर), सुलेंद्र (निवासी किनाला) तथा सतपाल सिंह (निवासी लाडवा) शामिल हैं। इन सभी आरोपियों की तरफ से अदालत में अधिवक्ता विक्रम मित्तल, भगत सिंह रंगा, सोमदत्त सिवाच और धर्मवीर जांगड़ा ने पूरी पैरवी की है। बचाव पक्ष ने अदालत से सभी आरोपियों को राहत देने की मांग करते हुए पुलिस की कार्रवाई और गंभीर धाराओं को चुनौती दी है। अब इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पुलिस के द्वारा लगाए गए आरोपों और बचाव पक्ष की तमाम दलीलों पर नियमित रूप से सुनवाई की जाएगी।