धारूहेड़ा में हमारा परिवार-मातृशक्ति इकाई द्वारा हरियाली तीज समारोह का आयोजन, जरूरतमंद बेटी के कन्यादान का लिया संकल्प

धारूहेड़ा में हमारा परिवार-मातृशक्ति इकाई द्वारा हरियाली तीज समारोह का आयोजन, जरूरतमंद बेटी के कन्यादान का लिया संकल्प

जरूरतमंद बेटी के लिए कन्यादान करने का संकल्प लिया गया 

हरियाली तीज समारोह का आयोजन हर्षोल्लास एवं पारंपरिक तरीके से किया

तीज पर्व को भारतीय संस्कृति, संस्कार और सामाजिक सेवा से जोड़ना 

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इकाई प्रमुख मीनू रस्तोगी ने सेवा संकल्प प्रपत्र महिला सदस्यों को दिलवाया

फतह सिंह उजाला /गुरुग्राम /24 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

“हमारा परिवार के हरियाली तीज समारोह में दिखा उत्सव, संस्कार और सेवा का संगम” हमारा परिवार–मातृशक्ति इकाई, हैली मंडी-पटौदी द्वारा, धारूहेड़ा में हरियाली तीज समारोह का आयोजन हर्षोल्लास एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य तीज पर्व को भारतीय संस्कृति, संस्कार और सामाजिक सेवा से जोड़ना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ गौरी पूजन से हुआ, जिसे इकाई संरक्षिका पुष्पा जोशी द्वारा विधिवत संपन्न कराया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेते हुए गौरी माता का पूजन किया। पूजन में अर्पित की जाने वाली सामग्री को जरूरतमंद बेटी के कन्यादान में उपयोग करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम के दौरान इकाई प्रमुख मीनू रस्तोगी द्वारा सेवा संकल्प प्रपत्र दिलवाया गया। इसके माध्यम से सदस्यों को हमारा परिवार के चार वार्षिक सेवा प्रकल्पों—रक्तदान, पौधारोपण, वस्त्र वितरण एवं धर्म यात्रा—से जुड़कर समाजसेवा में योगदान देने का संकल्प दिलाया गया।

तीज समारोह में म्यूजिकल चेयर, तीज स्पेशल गेम्स, झूला, मेहंदी, डांस एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ सेल्फी पॉइंट और रील्स जैसी गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। महिलाओं ने पारंपरिक गीतों और नृत्य के साथ कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन किरण मेहरा एवं ममता यादव जी द्वारा किया गया। दोनों ने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों का सुचारू संचालन करते हुए सभी प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया।

कार्यक्रम में मीनू रस्तोगी (इकाई प्रमुख), पुष्पा जोशी (इकाई संरक्षिका) सहित मातृशक्ति की अनेक बहनों ने सक्रिय सहभागिता की और विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारियाँ निभाईं। इस अवसर पर सभी ने संकल्प लिया कि भारतीय त्योहारों को केवल उत्सव तक सीमित न रखते हुए उन्हें संस्कार, सेवा और समाज निर्माण से जोड़ा जाएगा। कार्यक्रम का संदेश रहा— “उत्सव भी, संस्कार भी और सेवा भी।”

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