HARIYANA-कहने को तो हैं डीसी और कमिश्नर , लेकिन रहने को घर नहीं

कहने को तो हैं डीसी और कमिश्नर , लेकिन रहने को घर नहीं

 

योगेश गर्ग
Faridabad (अटल हिन्द ब्यूरो ) मंडल व जिले के प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर फरियादियों का दुख हरने वाले बड़े अधिकारी इन दिनों खुद ही परेशान हैं। हालत ऐसे हैं कि परेशान होने के बावजूद अपनी परेशानी को किसी से शेयर तक नहीं कर पा रहे हैं। इनकी परेशानी कोई और न होकर सरकारी मकान को लेकर है। दिसंबर महीने में तबादला होकर फरीदाबाद आने के बाद से ये सरकारी कोठी खाली करवाने के मामले में खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। इनकी कोठी पर पूर्व में तैनात रहे सीनियर अधिकारी ही काबिज हैं और ऐसे में जूनियर होने के नाते ये किसी तरह का दबाव तक उन पर नहीं बना पा रहे हैं। इसकी वजह से इन्होंने अपना डेरा रेस्ट हाउस में डाला हुआ है और 24*7 कैंप ऑफिस भी रेस्ट हाउस से चलाने को मजबूर हैं। तीनों बड़े अधिकारी कोई और न होकर मंडल आयुक्त संजय जून, डीसी यशपाल यादव व एचएसवीपी प्रशासक प्रदीप दहिया हैं। इनका तबादला प्रदेश सरकार ने 28 दिसंबर को फरीदाबाद के लिए किया था।

मंडलआयुक्त संजय जून पर फरीदाबाद, पलवल व नूंह जिले की जिम्मेदारी है। लेकिन, सरकारी आवास न होने की वजह से ये गुड़गांव से अप-डाउन करने को मजबूर हैं। इसलिए 24*7 कैंप ऑफिस भी नहीं चला पा रहे हैं। इसकी वजह इनसे पहले तैनात रही मंडलायुक्त डॉ जी अनुपमा द्वारा आवास खाली नहीं किया जाना है। 1991 बैच की डॉ अनुपमा चंडीगढ़ में राज्यपाल की सचिव लगाई गई हैं, लेकिन 2003 बैच के संजय जून इनसे कोठी खाली नहीं करवा पा रहे हैं।

2011 बैच के आईएएस डीसी यशपाल यादव सरकारी कोठी खाली न होने की वजह से रेस्ट हाउस में रहने को मजबूर हैं। डीसी का कैंप ऑफिस भी 24*7 चलता है, इसलिए इनका स्टाफ भी रेस्ट हाउस में ही कार्य कर रहा है। इनसे पहले 2007 बैच के आईएएस अतुल कुमार डीसी थे और सरकारी आवास में अभी वे ही डटे हैं। अतुल कुमार फिलहाल चंडीगढ़ में आयुष विभाग के निदेशक के तौर पर तैनात हैं।

2013 बैच के आईएएस प्रदीप दहिया एचएसवीपी प्रशासक हैं। इनका कार्यक्षेत्र फरीदाबाद, पलवल व नूंह जिला है। इनका कैंप ऑफिस भी 24*7 चलना होता है। सरकारी आवास खाली न होने की वजह से ये एचएसवीपी के गेस्ट हाउस में रहने को मजबूर हैं। इनके सरकारी आवास पर अभी भी 2008 बैच की त्रिपुरा काडर की आईएएस अधिकारी सोनल गोयल काबिज हैं। सोनल गोयल का एचएसवीपी प्रशासक के पद से सितंबर 2019 में तबादला हुआ था। उन्होंने 18 सितंबर को नगर निगम कमिश्नर के तौर पर ज्वाइन किया। नगर निगम कमिश्नर बनने के बाद भी वे एचएसवीपी प्रशासक के निवास में ही रही। अब 28 दिसंबर से गुड़गांव महानगर विकास प्राधिकरण में अडिशनल सीईओ के तौर पर सेवारत हैं और हर रोज फरीदाबाद से ही गुड़गांव अप-डाउन कर रही हैं।

क्या रही है परंपरा

आईएएस अधिकारियों में सीनियर का सम्मान करने की खासी परंपरा है। जब भी किसी अधिकारी का तबादला होता है तो जूनियर की ज्वाइनिंग के दौरान सीनियर उन्हें बड़े प्रोजेक्ट, मुख्य समस्या, सरकारी के प्राथमिकताओं के बारे में ब्रीफ करते हैं। साथ ही आपसी सहमति से 2-4 दिन का समय लेकर सरकारी आवास को खाली कर देते हैं, ताकि नई ज्वाइनिंग वाले अधिकारी को जिले में परिवार के साथ सैटल होने में कोई दिक्कत न हो।

क्या है नियम

नियम के अनुसार कोई भी अधिकारी तबादला होने के तीन माह तक सरकारी आवास को अपने पास रख सकता है। लेकिन, उसके बाद उससे हरियाणा सरकार के नियमों के अनुसार पैनल रेंट देना होता है। पैनल रेंट न देने पर भारी भरकम जुर्माने का भी प्रावधान है।

न बयान दे रहे, न फरियाद कर पा रहे

अपने सीनियर्स से आजिज तीनों बड़े अधिकारी न तो सरकारी आवास को लेकर कोई बात करने को तैयार हैं और न ही किसी और बड़े अधिकारी से फरियाद कर पा रहे हैं। मौजूदा तैनात तीनों अधिकारियों से पहले यहां उनसे सीनियर ही तैनात थे। ऐसे में ये कुछ कहने की बजाए चुप्पी साधे हुए हैं।

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