गुरुग्राम में जगद्गुरु शंकराचार्य के सानिध्य में संपन्न हुआ हरतालिका तीज का विशेष पूजन और महायज्ञ

शिव और शक्ति एक-दूसरे के पूरक : जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद
हरतालिका तीज पर्व सनातन में शिव के साथ शक्ति की आराधना का पर्व
यह पर्व श्रद्धा, तप, निष्ठा, समर्पण और अखंड सौभाग्य की कामना का प्रतीक
जगद्गुरु नरेंद्रानंद सरस्वती के सानिध्य में शिव और शक्ति का विशेष पूजन-अर्चन
अनुष्ठान का शुभारंभ गौरी-गणेश पूजन तथा चतुर्वेद स्वस्ति उद्घोष के साथ हुआ
फतह सिंह उजाला/गुरुग्राम /15 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
गुरुग्राम के पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में हरतालिका तीज के पावन अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में भगवान शिव एवं माता शक्ति का विशेष पूजन-अर्चन, वैदिक पाठ एवं हवन संपन्न हुआ। सहस्त्र चंडी महायज्ञ के अंतर्गत आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में वैदिक मंत्रोच्चार और चतुर्वेद स्वस्ति उद्घोष के बीच विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया गया। इस अवसर पर आरएसएस के प्रांत प्रचारक रमेश जी एवं काशी विद्वत परिषद के महामंत्री राम नारायण द्विवेदी जी भी महायज्ञ में सम्मिलित हुए। दोनों ने विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन में सहभागिता की तथा भगवान शिव एवं माता शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके उपरांत उन्होंने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह जानकारी आयोजक मंडल के प्रवक्ता के द्वारा दी गई।
शिव और शक्ति की आराधना का पर्व हरतालिका तीज
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि शिव और शक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं। हरतालिका तीज शिव के साथ शक्ति की आराधना का पर्व है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसलिए यह पर्व श्रद्धा, तप, निष्ठा, समर्पण और अखंड सौभाग्य की कामना का प्रतीक है। शिव-शक्ति की उपासना से लोककल्याण, परिवार में सुख-शांत और समाज में मंगल की भावना को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि हरतालिका तीज पर मंडप पूजन, स्तंभ पूजन, वेदियों का पूजन, वैदिक पाठ एवं हवन का विशेष महत्व है। अनुष्ठान का शुभारंभ गौरी-गणेश पूजन तथा चतुर्वेद स्वस्ति उद्घोष के साथ हुआ। इसके बाद मंडप, स्तंभ एवं विभिन्न वेदियों का विधिवत पूजन किया गया। विद्वान आचार्यों एवं वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया। पाठ के समापन के बाद लोककल्याण, राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति एवं सभी के मंगल की कामना से हवन में आहुतियां अर्पित की गईं।
अतिथियों और विद्वानों ने साझा किए अपने अनुभव
महायज्ञ में शामिल होने के बाद आरएसएस प्रांत प्रचारक रमेश ने कहा कि आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में चल रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ में आकर उन्हें अत्यंत आध्यात्मिक एवं सकारात्मक अनुभूति हुई। वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक वातावरण और शास्त्रीय परंपराओं के बीच पूजन में शामिल होना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। जगद्गुरु शंकराचार्य का सानिध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त करना भी उनके लिए सौभाग्य का विषय है। काशी विद्वत परिषद महामंत्री राम नारायण द्विवेदी जी ने कहा कि काशी की धरती पर वैदिक परंपरा के अनुरूप इतने व्यापक स्तर पर हो रहा यह अनुष्ठान अत्यंत महत्वपूर्ण है। सहस्त्र चंडी महायज्ञ में सम्मिलित होकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति हुई। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज का सानिध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त करना उनके लिए अत्यंत सुखद और प्रेरणादायी अनुभव रहा।
वैदिक मंत्रोच्चार और हवन के साथ हुआ समापन
अनुष्ठान का संचालन यज्ञाचार्य तेजमणि त्रिपाठी के आचार्यत्व में हुआ। उनके निर्देशन में 36 विद्वान पंडितों एवं वेदपाठी ब्राह्मणों ने पूजन, पाठ एवं हवन संपन्न कराया। सायंकाल भगवान शिव एवं माता शक्ति की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर अखंड सौभाग्य, सुख-शांति और परिवार के मंगल की कामना की।