हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी का शिकंजा, 190 अधिकारी-कर्मचारी रडार पर

हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी का शिकंजा, 190 अधिकारी-कर्मचारी रडार पर

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद-1 में देश को "राज्यों का संघ" (Union of States) कहा गया है। 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले इस संघीय ढांचे में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है, ताकि देश की एकता, अखंडता और प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत बनी रहे। देश के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल हरियाणा आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रगति और प्रशासनिक क्षमता के लिए जाना जाता है, लेकिन सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की शिकायतें लंबे समय से जनता के लिए बड़ी चिंता बनी हुई हैं। हरियाणा में आम नागरिक का सबसे ज्यादा सामना जिन विभागों से होता है, उन्हीं विभागों पर अक्सर रिश्वतखोरी और काम में देरी के आरोप लगते रहे हैं। इनमें राजस्व विभाग, पुलिस, बिजली विभाग, नगर निकाय, पंचायत विभाग, आबकारी एवं कराधान, परिवहन और अन्य जनसेवा से जुड़े विभाग शामिल हैं।

एसीबी की बड़ी कार्रवाई और सूची

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हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की शिकायतों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। ब्यूरो ने ऐसे 190 अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान की है, जिन पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। एसीबी के अनुसार यह सूची अचानक तैयार नहीं की गई, बल्कि पिछले करीब छह महीने से चल रही गोपनीय निगरानी, शिकायतों के विश्लेषण और विभागीय इनपुट के आधार पर तैयार की गई है। जांच के दौरान एसीबी ने दो चरणों में संदिग्ध कर्मचारियों की सूची तैयार की। पहले चरण में 20 जुलाई को 140 अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए, जबकि दूसरे चरण में 5 अगस्त को 50 और नाम जोड़े गए। एसीबी का कहना है कि ऐसे कर्मचारियों पर नजर रखी जा रही थी जिनके खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं या जिनके काम करने के तरीके को लेकर सवाल उठे थे। एसीबी की प्रारंभिक जांच में भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों में राजस्व विभाग सबसे ऊपर सामने आया है। विभागवार स्थिति के अनुसार राजस्व विभाग में 37, पुलिस विभाग में 22 और स्वास्थ्य विभाग में 14 अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा नगर निकाय, बिजली निगम, आबकारी एवं कराधान विभाग, परिवहन विभाग, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP), पंचायत राज, शिक्षा, वन और सिंचाई विभाग के कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं।

जनता की समस्याएं और एसीबी की अपील

सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की समस्या केवल बड़े घोटालों तक सीमित नहीं है। आम नागरिकों की शिकायत रहती है कि छोटे-छोटे कामों जैसे जमीन की रजिस्ट्री, प्रमाण पत्र बनवाना, बिजली कनेक्शन या बिल संबंधी कार्य, पुलिस शिकायत दर्ज करवाना और नगर निकाय से जुड़े कार्य में भी कई बार अनावश्यक देरी और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जनता का कहना है कि जब सामान्य प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है तो कई लोग मजबूरी में गलत रास्ते अपनाने को मजबूर हो जाते हैं। भ्रष्टाचार किसी एक विभाग या स्तर की समस्या नहीं है। यह प्रशासनिक व्यवस्था, जवाबदेही, पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। सरकारी विभागों में लाखों कर्मचारी ईमानदारी से भी काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों की गलत गतिविधियां पूरे सिस्टम की छवि को प्रभावित करती हैं। भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को मजबूत करने के लिए एसीबी ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने की योजना भी शुरू की है। इसके तहत 2 लाख रुपये या उससे अधिक की रिश्वत लेते हुए आरोपियों को पकड़ने वाले अधिकारियों को क्लास-1 सर्टिफिकेट दिया जाएगा और उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को स्वर्ण और रजत पदक से सम्मानित किया जाएगा। एंटी करप्शन ब्यूरो ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगी जाती है तो इसकी शिकायत तुरंत की जाए। एसीबी ने इसके लिए टोल फ्री नंबर 1800-180-2022 और हेल्पलाइन 1064 जारी किए हैं। हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की कार्रवाई को प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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