यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने तैयार किया एक्शन प्लान, दिए कड़े निर्देश

यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने तैयार किया एक्शन प्लान, दिए कड़े निर्देश

हरियाणा सरकार ने यमुना और उससे जुड़े जल स्रोतों के प्रदूषण को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। सरकार ने सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, ठोस कचरे और जल निकायों के पुनरुद्धार का काम तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में मंगलवार को यमुना कार्य योजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और उनकी समयसीमा की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित अधिकारियों को लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं।

विभिन्न जिलों में प्रदूषण नियंत्रण कार्यों की समीक्षा

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बैठक के दौरान सोनीपत, पानीपत, करनाल, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और यमुनानगर सहित विभिन्न शहरी क्षेत्रों में चल रहे प्रदूषण नियंत्रण कार्यों की गहन समीक्षा की गई। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह ने बैठक में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुरुग्राम में चार प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) विभिन्न चरणों में काम कर रहे हैं। इन परियोजनाओं की वित्तीय और तकनीकी निविदाएं अगस्त और सितंबर के महीने में खोली जानी प्रस्तावित हैं।

गुरुग्राम और फरीदाबाद में एसटीपी परियोजनाओं की स्थिति

गुरुग्राम में जिन संयंत्रों पर काम चल रहा है उनमें धनवापुर में 100 एमएलडी, बहरामपुर में 100 एमएलडी, नौरंगपुर में 40 एमएलडी और सेक्टर-107 में 100 एमएलडी क्षमता के संयंत्र शामिल हैं। फरीदाबाद में 20 एमएलडी क्षमता वाले मिर्जापुर एसटीपी का काम 30 अगस्त तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा फरीदाबाद में ही 20 एमएलडी क्षमता वाली सूरजकुंड परियोजना की तकनीकी निविदाएं 24 अगस्त तक खोली जानी प्रस्तावित हैं।

सोनीपत और पानीपत में नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

सोनीपत के कुंडली में 7.5 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का निर्माण कार्य भी जल्द से जल्द शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया है। पानीपत के समालखा में प्रस्तावित 4 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी की वित्तीय निविदाएं 25 अगस्त तक खोली जानी हैं। वहीं फरीदाबाद के प्रतापगढ़ में प्रस्तावित 50 एमएलडी क्षमता वाले साझा औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र के लिए निविदाएं पहले ही जारी की जा चुकी हैं। गुरुग्राम के सेक्टर-34 में 20 एमएलडी क्षमता वाले संयंत्र की तकनीकी निविदाएं 3 अगस्त को खोली जा चुकी हैं।

औद्योगिक अपशिष्ट और गांवों में सीवेज प्रबंधन पर जोर

बैठक में बादशाहपुर में 15 एमएलडी और सेक्टर-37 में 9 एमएलडी क्षमता वाले साझा उपचार संयंत्र सहित अन्य सभी संबंधित परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। यमुना किनारे बसे गांवों में सीवेज प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सोनीपत, करनाल और पानीपत के गांवों में थ्री-पोंड सिस्टम तथा छोटे एसटीपी के माध्यम से सीवेज का उपचार किया जाएगा।

जल स्रोतों का पुनरुद्धार और समयसीमा

यमुना से जुड़े स्थानीय जल स्रोतों के पुनरुद्धार के लिए फरीदाबाद, करनाल, पानीपत और सोनीपत के कुल 13 जल स्रोत चिन्हित किए गए हैं। इन चिन्हित जल स्रोतों का कुल क्षेत्रफल 19.12 हेक्टेयर है। इन जल स्रोतों में मुख्य रूप से घरेलू सीवेज के कारण प्रदूषण पाया गया है। इन सभी जल स्रोतों के पुनरुद्धार का काम 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का कड़ा लक्ष्य रखा गया है।

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