हरियाणा विधानसभा में सफाई कर्मियों की हड़ताल पर हंगामा, विपक्ष और सरकार के बीच हुई तीखी बहस

हरियाणा विधानसभा में मंगलवार को सफाई कर्मचारियों की चल रही हड़ताल के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने सरकार के खिलाफ सदन में जमकर नारेबाजी की। सरकार की तरफ से हड़ताल के दौरान कर्मचारियों के साथ हुई बैठक की रिपोर्ट भी सदन में पेश की गई।
सदन में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सदन के भीतर सरकार तथा विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बहस के दौरान मंत्रियों और विधायकों ने आपस में निजी कटाक्ष भी किए। हरियाणा राज्य में छह अगस्त से लगातार सफाई कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है।
कांग्रेस का कामरोको प्रस्ताव और मंत्री का बयान
विपक्षी दल कांग्रेस की तरफ से मंगलवार के लिए इस मुद्दे पर एक कामरोको प्रस्ताव दिया गया था। स्पीकर की तरफ से इस प्रस्ताव को लेकर कोई भी निर्णय आता, उससे ठीक पहले प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल अपनी सीट पर खड़े हो गए। उन्होंने सफाई कर्मियों की हड़ताल के मुद्दे पर सदन को जानकारी देनी शुरू कर दी।
कांग्रेस का विरोध और सदन में हंगामा
कांग्रेस पार्टी ने इस बात का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि सदन में इस पर बिना किसी चर्चा के ही मंत्री अपनी बात बोल रहे हैं। इसी बात को लेकर पूरे सदन में भारी हंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस के सदस्यों ने सफाई कर्मचारियों के समर्थन में सदन के अंदर जोरदार नारेबाजी कर दी।
कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी और निकाय मंत्री का पक्ष
कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने इस मौके पर कहा कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे को जानबूझकर भड़काने का काम कर रहा है। स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने हंगामे के बीच सदन को बताया कि पहले कर्मचारियों ने 1 मई से 14 मई तक अपनी हड़ताल की थी। 13 मई को कर्मचारियों की मांगों पर पूर्ण सहमति बनने के बाद वह हड़ताल समाप्त हो गई थी।
हड़ताल की स्थिति और सरकार के साथ बैठकें
मंत्री विपुल गोयल ने आगे बताया कि अब छह अगस्त से कर्मचारी लगातार तीन-तीन दिन के लिए अपनी इस हड़ताल को आगे बढ़ाते जा रहे हैं। उन्होंने सदन में जानकारी दी कि अब तक सरकार और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के बीच कुल छह दौर की बैठकें हो चुकी हैं। कर्मचारियों की कुल 13 मांगों में से 12 मांगों को सरकार द्वारा मान लिया गया है।
नियमितीकरण की मांग और कानूनी राय
कर्मचारी दो साल की पॉलिसी के साथ खुद को पक्का करने या नियमित करने की मांग लगातार कर रहे हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस तरह की पॉलिसी देश के किसी भी अन्य राज्य में लागू नहीं है। कर्मचारियों के साथ बैठकें करने वाले मंत्री कृष्ण बेदी ने सदन को बताया कि पूर्व चौटाला सरकार में पांच साल और हुड्डा सरकार में दस साल की पॉलिसी के साथ पक्का करने का फैसला लिया गया था। इस पूरे मामले को लेकर वर्तमान सरकार द्वारा कानूनी राय ली जा रही है क्योंकि यह फैसला आगे चलकर कोर्ट में भी जा सकता है।
मुख्यमंत्री नायब सैनी और विपक्ष की प्रतिक्रिया
कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी को घेरते हुए पूर्व स्पीकर तथा कांग्रेस नेता अशोक अरोड़ा ने कहा कि सरकार इस संबंध में नई पॉलिसी लेकर आए, कांग्रेस पार्टी उसका पूरा समर्थन करेगी। हंगामे के बीच ही मुख्यमंत्री नायब सैनी ने मोर्चा संभालते हुए सदन में कहा कि विपक्ष अच्छी तरह से यह जानता है कि यह तकनीकी रूप से बिल्कुल संभव नहीं है। इसके बावजूद भी कर्मचारियों को लगातार भड़काया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समस्या कोई नई नहीं है और सरकार इस मामले को बहुत जल्द सुलझा लेगी।
कचरा उठवाने और मामलों को वापस लेने की मांग
विपक्ष की तरफ से नेता गीता भुक्कल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार पुलिस की मदद से जबरन कचरा उठवाने का काम कर रही है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान महिला सफाई कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की बात भी कही गई। प्रदेश में कई अलग-अलग जगहों पर सफाई कर्मियों के खिलाफ पुलिस मामले दर्ज किए गए हैं। कांग्रेस ने मांग की कि इन सभी दर्ज मामलों को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री का अंतिम आश्वासन
हंगामे के इस माहौल के बीच मुख्यमंत्री नायब सैनी ने स्पष्ट किया कि सरकार पूरी तरह से सफाई कर्मचारियों के साथ खड़ी है। उनकी सभी प्रमुख मांगों को बहुत जल्द पूरा कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ मामलों में केवल तकनीकी कारणों की वजह से सहमति नहीं बन पा रही है और इसे भी बहुत जल्द सुलझा लिया जाएगा। सरकार हर समय कर्मचारियों के साथ बातचीत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।