हरियाणा बोर्ड साल में दो बार कराएगा एचटेट परीक्षा, शिक्षकों के लिए 2028 तक टेस्ट पास करना अनिवार्य

चंडीगढ़, 15 सितंबर। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत उन शिक्षकों की नौकरी अब हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा से जुड़ गई है। पहली सितंबर, 2025 को सेवानिवृत्ति तक जिन शिक्षकों की पांच साल से ज्यादा सेवा बाकी थी और उन्होंने अभी तक यह परीक्षा पास नहीं की है, उन्हें अब यह टेस्ट पास करना होगा।
- शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को आदेश भेज दिए हैं।
- निर्धारित समय में परीक्षा पास नहीं करने पर सेवा छोड़नी पड़ सकती है।
- अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना भी करना पड़ सकता है।
- स्थापना शाखाओं को नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप करने को कहा गया है।
शिक्षकों की सेवा और रिटायरमेंट पर नया नियम
शिक्षकों पर इस व्यवस्था का असर उनकी पहली सितंबर, 2025 को बची हुई सेवा के आधार पर तय होगा। जिन शिक्षकों की उस तारीख को रिटायरमेंट में पांच साल से अधिक समय बाकी था, उन्हें अपने वर्तमान विषय और स्तर के अनुरूप एचटीईटी पास करना होगा। इसके लिए 31 अगस्त, 2028 तक की समय-सीमा तय की गई है। परीक्षा पास नहीं करने पर विभागीय निर्देशों के मुताबिक सेवा छोड़ने अथवा अनिवार्य सेवानिवृत्ति की स्थिति बन सकती है।
पांच साल से कम सेवा वाले शिक्षकों के लिए नियम
दूसरी ओर, जिन शिक्षकों की उस तारीख को सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय बचा था, उन्हें एचटीईटी के बिना सेवानिवृत्ति की उम्र तक नौकरी जारी रखने की अनुमति रहेगी। हालांकि ऐसे शिक्षक एचटीईटी पास किए बिना पदोन्नति हासिल नहीं कर सकेंगे। शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को संबंधित शिक्षकों तक ये आदेश पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और बोर्ड के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई, 2026 को रिव्यू याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए इन-सर्विस शिक्षकों के लिए टीईटी हासिल करने की अवधि को दो साल से बढ़ाकर तीन साल किया था। यह अवधि पहली सितंबर, 2025 से 31 अगस्त, 2028 तक है। इस तरह संबंधित शिक्षकों के लिए 31 अगस्त, 2028 अंतिम सीमा है। विभाग अब इसी समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए सेवा संबंधी कार्रवाई और रिकॉर्ड तैयार करेगा। शिक्षकों को एचटीईटी पास करने के पर्याप्त अवसर मिल सकें, इसके लिए बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन, भिवानी को साल में दो बार परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
परीक्षा की बारंबारता और अंतिम समय-सीमा
सुप्रीम कोर्ट ने भी टीईटी को नियमित रूप से, प्राथमिकता के आधार पर साल में दो बार आयोजित करने की बात कही है। इससे शिक्षकों को निर्धारित अवधि के भीतर परीक्षा पास करने के लिए कई अवसर मिल सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में टीईटी को केवल शिक्षक की पात्रता जांचने वाली परीक्षा नहीं माना है। परीक्षा साल में दो बार होगी और दोनों श्रेणियों में लागू व्यवस्था के लिए सुप्रीम कोर्ट की तय समय-सीमा 31 अगस्त, 2028 तक है। इसके बाद अतिरिक्त मोहलत का प्रावधान नहीं है।