कैग रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: हरियाणा की आमदनी बढ़ी, लेकिन खर्च और कर्ज का दबाव भारी

कैग रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: हरियाणा की आमदनी बढ़ी, लेकिन खर्च और कर्ज का दबाव भारी

चंडीगढ़ में कैग की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट विधानसभा में रखी गई है, जिसमें हरियाणा की वित्तीय स्थिति को लेकर दोहरी तस्वीर सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था में बढ़त हुई है और कर संग्रह में भी सुधार देखा गया है। लेकिन इसके साथ ही भारी प्रतिबद्ध खर्च, लगातार बढ़ता कर्ज और पूंजीगत निवेश की सीमित गुंजाइश राज्य की वित्तीय सेहत पर भारी दबाव बनाए हुए हैं। यह रिपोर्ट 13 अप्रैल को राज्य सरकार को भेजी गई थी जिसे मंगलवार को सदन में पेश किया गया।

जीएसडीपी और राजस्व प्राप्तियों में वृद्धि

वर्ष 2024-25 के दौरान हरियाणा का सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी पिछले साल के मुकाबले 11.83 प्रतिशत बढ़ा है। इस अवधि में राष्ट्रीय जीडीपी में राज्य की कुल हिस्सेदारी 3.67 प्रतिशत दर्ज की गई है जो पिछले पांच वर्षों से अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है। राज्य की राजस्व प्राप्तियों में भी 5.05 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिसका मुख्य कारण जीएसटी समेत कर संग्रह और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी का बढ़ना है। कुल प्राप्तियों में राज्य के अपने कर राजस्व की हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई रही है। हालांकि, गैर-कर राजस्व में सात प्रतिशत की कमी आई है और केंद्र से मिलने वाले सहायता अनुदान में 17.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

AtalHind की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

खर्च का ढांचा और पूंजीगत व्यय की स्थिति

कैग ने सबसे बड़ी चिंता राज्य के खर्च के ढांचे को लेकर व्यक्त की है। वर्ष 2024-25 में कुल व्यय का 88.94 प्रतिशत हिस्सा केवल राजस्व व्यय के रूप में खर्च हुआ है। अकेले प्रतिबद्ध लागत और सब्सिडी ने राजस्व व्यय का लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा, कुल व्यय का 57 प्रतिशत और राजस्व प्राप्तियों का लगभग 76 प्रतिशत हिस्सा घेर लिया है। इस भारी वित्तीय बोझ के कारण पूंजीगत व्यय बजटीय प्रावधान से काफी कम रहा है और यह कुल उधारी का केवल 17.67 प्रतिशत ही रहा है। कैग का कहना है कि इससे बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों में निवेश करने के लिए वित्तीय गुंजाइश बेहद सीमित हो जाती है।

बढ़ती देनदारियां और अदत्त कर्ज

हरियाणा राज्य राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम में तय किए गए राजस्व घाटे के लक्ष्यों को पूरा नहीं कर सका है। राज्य की कुल देयताएं पिछले पांच वर्षों से लगातार बढ़ रही हैं और एक साल के भीतर ही इसमें 10.52 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। कैग ने चेतावनी दी है कि इन बढ़ती देनदारियों के कारण भविष्य में मूलधन और ब्याज चुकाने का बोझ और अधिक बढ़ जाएगा। रिपोर्ट में कुल 2,491.65 करोड़ रुपये की अदत्त यानी पेंडिंग देनदारियां भी सामने आई हैं जो वर्ष 2024-25 के जीएसडीपी का लगभग 0.21 प्रतिशत और राजकोषीय घाटे का 7.19 प्रतिशत हिस्सा हैं। कैग ने इन सभी वित्तीय मामलों की समय पर पहचान, लेखांकन और रिपोर्टिंग करने पर बहुत जोर दिया है।

Share:

Comments

Leave a comment