हरियाणा कोर्ट में गैंगवार का खूनी इतिहास और पुलिस सुरक्षा

हरियाणा कोर्ट में गैंगवार का खूनी इतिहास और पुलिस सुरक्षा

हरियाणा में कोर्ट परिसर या पेशी के बाद बाहर निकलते समय गोली और चाकू से हत्या की कई घटनाएं हो चुकी हैं। सोनीपत से लेकर हिसार, रोहतक, झज्जर, भिवानी और जींद तक बदमाशों ने पेशी पर आए आरोपियों और गवाहों को निशाना बनाया है

जिलों के कोर्ट परिसर में गैंगवार और पेशी के दौरान हत्याओं की प्रमुख घटनाओं का पूरा ब्योरा।

चंडीगढ़ / 20 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

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हरियाणा के विभिन्न अदालती परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए पिछले डेढ़ दशक के दौरान गैंगवार, आपसी रंजिश और पुरानी दुश्मनी के चलते हत्या की कई संगीन वारदातें दर्ज की गई हैं। हाल ही में हिसार कोर्ट परिसर के भीतर गैंगस्टर विनोद पानू उर्फ काणा की सरेआम गोली मारकर की गई हत्या ने एक बार फिर से कैदियों और गवाहों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा दावे किए जाने के बावजूद, प्रदेश भर की अदालतों में पेशी के लिए लाए जाने वाले अपराधियों और गवाहों को निशाना बनाना अपराधियों के लिए बेहद आसान साबित हो रहा है।

अदालती कार्यवाही के दौरान कोर्ट परिसर में आने और वापस लौटते समय अंडरट्रायल कैदी पूरी तरह निहत्थे होते हैं। ऐसे समय में उनके साथ तैनात पुलिस सुरक्षा बल बेहद सीमित संख्या में होता है। अपराधियों द्वारा इसी कमजोरी का फायदा उठाकर रोहतक, झज्जर, सोनीपत, भिवानी, हिसार, जींद और सिरसा जैसी अदालतों में कई खूनी खेल खेले गए हैं। कुछ मामलों में सीधे कोर्ट रूम के बाहर तो कुछ में कैदी वाहन तक ले जाते समय ताबड़तोड़ फायरिंग और चाकूबाजी से वारदातों को अंजाम दिया गया है।

अदालती परिसरों में सुरक्षा चूक का इतिहास काफी पुराना है। 12 दिसंबर 2008 को सोनीपत के न्यायिक परिसर में एक हत्या के मामले की सुनवाई के लिए संजय बुटानिया को लाया गया था। जमीन की पुरानी रंजिश के चलते आरोपी जगबीर ने खुद को कंबल में छिपाकर रखा था। जैसे ही संजय कोर्ट गेट के पास पहुंचा, उसने पास से गोली चला दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस मामले में बाद में अदालत ने जगबीर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

इसी बुटाना गांव की रंजिश की अगली कड़ी के तहत 2008 के एक अन्य हत्या के मामले में आरोपी ओमप्रकाश उर्फ प्रकाश फौजी को सोनीपत कोर्ट लाया गया। पुलिस टीम जब सुनवाई समाप्त होने के बाद उसे वापस कैदी वाहन में बैठाने के लिए ले जा रही थी, तब घात लगाकर बैठे हमलावरों ने कोर्ट परिसर के भीतर ही गोलियां चलाकर उसकी हत्या कर दी। यह घटना पुरानी रंजिश में अदालती घेरे के भीतर हुई दूसरी बड़ी हत्या थी।

जींद जिले में भी 1 सितंबर 2014 को ऐसी ही एक वारदात को अंजाम दिया गया। कोकला गैंग से चल रही आपसी दुश्मनी के चलते संदीप मोखरा को जींद कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान गोली मार दी गई थी। संदीप की मौके पर ही मौत हो गई और पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद आरोपियों ने पूछताछ में गैंगवार के चलते इस वारदात को कबूल किया।

14 मई 2015 को हिसार कोर्ट परिसर में पुलिस कस्टडी में पेश करने लाए गए संदीप उर्फ बच्ची की सरेआम हत्या कर दी गई। जब पुलिस बल उसे कोर्ट रूम की तरफ ले जा रहा था, तभी साजिद खान नामक व्यक्ति ने उस पर गोलियां चला दीं। इस हमले में संदीप की मौत हो गई, जबकि बीच-बचाव में एएसआई गुलबीर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस की तफ्तीश में आगे चलकर इस हत्याकांड में अरविंद पंडित का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया।

इसके बाद 11 मार्च 2016 को पानीपत के सिवाह निवासी विकास उर्फ दूधिया को लूट के एक मामले में प्रोडक्शन वारंट पर गन्नौर कोर्ट लाया गया था। जैसे ही वह पेशी के बाद कोर्ट रूम के दरवाजे से बाहर निकला, पहले से तैयार बैठे हमलावरों ने उस पर पॉइंट ब्लैक रेंज से फायरिंग कर दी। विकास की मौके पर ही मौत हो गई और एक पुलिस जवान घायल हुआ। बाद में इस मामले में पांच आरोपियों को उम्रकैद मिली और जांच अधिकारी इंस्पेक्टर कंवल सिंह को भी साजिश में शामिल पाया गया।

अंबाला जेल में बंद राजीव उर्फ काला आसौदा को 22 मार्च 2017 को झज्जर कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया था। सुनवाई खत्म होने के बाद जब उसे वापस कैदी वैन में बैठाया जा रहा था, तभी दो हथियारबंद हमलावरों ने उस पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। गंभीर हालत में उसे पहले स्थानीय अस्पताल और फिर पीजीआई रोहतक भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जांच में अशोक प्रधान गैंग का नाम सामने आया था।

मार्च 2017 में ही एक अन्य घटना के तहत अंडरट्रायल कैदी रमेश लुहार और उसके साथियों पर कोर्ट में पेशी के दौरान बाइक सवार बदमाशों ने गोलियां बरसाईं। हालांकि रमेश इस हमले में बाल-बाल बच गया, लेकिन उसका साथी संजीत गोली लगने से मारा गया। हमले में कई अन्य लोग भी घायल हुए थे। पुलिस जांच में सुमित उर्फ पलोटरा और संदीप उर्फ पाद्दू के नाम शूटर के रूप में दर्ज किए गए।

भिवानी कोर्ट में 18 मई 2017 को शराब ठेकेदार शेर सिंह की हत्या कर दी गई। शेर सिंह अपने गांव के महिपाल हत्याकांड में पेशी के लिए अदालत पहुंचा था। हाजिरी लगाने के बाद जैसे ही वह बाहर आया, हमलावरों ने उस पर पांच गोलियां चला दीं। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित किया गया। पुलिस ने मौके से भाग रहे तीन हमलावरों को हथियारों के साथ गिरफ्तार कर लिया था।

अदालती परिसर केवल कैदियों के लिए ही नहीं बल्कि पुलिसकर्मियों के लिए भी असुरक्षित साबित हुए हैं। 7 मई 2018 को सिवानी मंडी तहसील कोर्ट में एक कैदी को छुड़ाने आए बदमाशों ने अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलीबारी में कैदी को ले जा रहे हिसार के गोरछी निवासी हेड कांस्टेबल भागीरथ को गोली लग गई और उनकी मौत हो गई। हालांकि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दो हमलावरों को मौके पर ही धर दबोचा।

13 सितंबर 2019 को इंद्री कोर्ट परिसर के मुख्य गेट पर शुभम नामक युवक पर हमला हुआ। वह एक मारपीट के मामले में तारीख पर आया हुआ था। शिकायतकर्ता पक्ष ने समझौते का बहाना बनाकर उसे मेन गेट के बाहर बुलाया और करीब सात लोगों ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। पेट, छाती और सिर पर गहरे घाव लगने के कारण अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया।

22 अप्रैल 2022 को सोनीपत कोर्ट में अपनी ही पत्नी की हत्या के मामले में मुख्य गवाह वेद प्रकाश की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। वेद प्रकाश वकीलों के चैंबर से कोर्ट रूम की ओर जा रहा था, तभी बाइक सवार हमलावरों ने उस पर तीन गोलियां चला दीं। दो गोलियां लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने मृतक की पत्नी के पिता विजयपाल और अन्य रिश्तेदारों के खिलाफ साजिश का केस दर्ज किया।

16 मई 2026 को दहेज प्रताड़ना और पारिवारिक विवाद के मामले में पेशी पर आए नीरज उर्फ कातिया की खरखौदा कोर्ट परिसर के पास हत्या कर दी गई। पेशी निपटाकर जैसे ही नीरज एसडीएम कार्यालय के पास पहुंचा, ब्रेजा कार में आए हमलावरों ने उसकी गाड़ी में सीधी टक्कर मारी और फिर गाड़ी से उतरकर उस पर अंधाधुंध गोलियां चलाकर उसे मौत के घाट उतार दिया।

सिरसा के किशोर न्यायालय में 1 जून 2017 को पेशी पर आए 17 वर्षीय नाबालिग पर पुराने विवाद के कारण चाकू से हमला किया गया। हमलावर ने उसकी गर्दन और कमर पर कई वार किए। हालांकि, मौके पर मौजूद अमर सिंह नाम के एक व्यक्ति ने साहस दिखाते हुए हमलावर को दबोच लिया और उससे हथियार छीन लिया, जिससे नाबालिग की जान बचाई जा सकी।

4 सितंबर 2025 को भिवानी कोर्ट परिसर में वकीलों के चैंबर के पास बैठे रोहतक के मोखरा निवासी लवजीत पर अचानक गोलीबारी हुई, जिसमें उसकी मौत हो गई। बाद में एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ कि हमलावर वास्तव में बिजेंद्र और काला नाम के दो व्यक्तियों की सुपारी लेकर आए थे। वकीलों के चैंबर के पास हुई फायरिंग के दौरान निशाना चूकने से गोली निर्दोष लवजीत को जा लगी।

इसके अतिरिक्त, 6 अगस्त 2026 को चरखी दादरी कोर्ट में पेशी के बाद बाहर निकले स्कॉर्पियो सवार सात युवकों पर सिटी पुलिस थाने के ठीक सामने अंधाधुंध फायरिंग की गई। इस हमले में सातों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के दौरान हिसार निवासी कीर्तिमान की 9 अगस्त 2026 को मौत हो गई, जबकि अन्य घायलों का इलाज जारी है।

इसी तरह का एक लंबा मामला सोनीपत कोर्ट से भी जुड़ा है, जहां 18 मार्च 2021 को रोहतक जेल से पेशी पर लाए गए अजय उर्फ बिट्टू बरोणा पर उसी की सुरक्षा में तैनात सिपाही महेश ने प्वाइंट ब्लैक रेंज से सिर में गोलियां मार दी थीं। अजय इस हमले के बाद गहरे कोमा में चला गया था और करीब पांच साल तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद मई 2026 में उसकी मृत्यु हो गई।

हरियाणा के विभिन्न अदालती परिसरों में सुरक्षा में चूक की ये घटनाएं स्पष्ट रूप से यह दर्शाती हैं कि राज्य के कोर्ट परिसरों में मेटल डिटेक्टर, पुलिस पिकेट्स और चेकिंग की व्यवस्था के बावजूद अपराधी आसानी से हथियार ले जाने और वारदातों को अंजाम देने में कामयाब हो रहे हैं।

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